संपर्क के माध्यम से भारत और आइसलैंड के मजबूत होते संबंध

आइसलैंड के विदेश मंत्री गौड्लागुर थोर थोर्डोर्सन भारत के अपने पहले दौरे पर हैं। उनकी यह यात्रा बेहद खास है क्योंकि सीधे संपर्क के माध्यम से अब भारत और आयरलैंड के बीच संपर्क बेहतर करने की दिशा में आगे बढ़ने की शुरुआत हुई है। यह द्विपक्षीय महत्वाकांक्षा के तहत बहुप्रतीक्षित शुरुआत है, जिसमें दोनों देश न सिर्फ सीधे तौर पर करीब आए हैं बल्कि इससे द्विपक्षीय अवसरों को और मजबूत दिशा में आगे बढ़ाने की नींव पड़ी है।

दोनों देशों के बीच संबंध पारंपरिक तौर पर अच्छे रहे हैं। मूल्यों और द्विपक्षीय हितों के अंतर्गत उच्चस्तरीय दौरों के जरिए पारस्परिक संबंधों को पहले भी दिशा मिलती रही है। लेकिन अब तक कुछ ऐसी कमी रह गई थी जिससे भारत और आयरलैंड के संबंध परवान नहीं चढ़े थे। या यूं कहें कि नज़दीकियाँ नहीं बढ़ीं थी जितनी की संभावना है। लेकिन अब रेकजाविक और नई दिल्ली के बीच सीधे हवाई सेवा शुरू करने से व्यवसायिक अवसर दोनों तरफ बढ़ेंगे, जिससे दोनों देश और नजदीक आएंगे। अन्य कई क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

अपनी यात्रा के दौरान आइसलैंड के विदेश मंत्री ने भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय, बहुपक्षीय तथा अन्य पारस्परिक हित के अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार विमर्श किया। बढ़ते व्यावसायिक अवसरों और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना भी बातचीत के मुख्य एजेंडे में था। आइसलैंड भी यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ का एक सदस्य है। यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत दुनिया की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था बन गया है। व्यापार में सहयोग के अलावा मत्स्य पालन, खाद्य प्रसंस्करण, भू-ताप विद्युत ऊर्जा, आईटी, फार्मास्युटिकल्स और पर्यटन ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें दोनों देश और वृहद स्तर पर सहयोग बढ़ाने को लेकर काम कर सकते हैं।

आइसलैंड भारत से कारें, धातुएं और कपड़े आयात करने के मामले में भी एक महत्वपूर्ण देश है। सीधा संपर्क होने से वस्तुओं के और अधिक आयात और निर्यात की संभावना बढ़ती है। यहां यह भी जिक्र करना महत्वपूर्ण है कि आइसलैंड की बड़ी निर्यातक कंपनियाँ भारत में उच्च तकनीकी के साथ काम कर रही हैं जिनमें ओसुर, मोरेल और एसी सॉफ्टवेयर का नाम लिया जा सकता है। जिनकी भारतीय बाजार में सफलतापूर्वक उपस्थिती पहले से है। व्यवसाय के अलावा सीधा संपर्क दोनों देशों के पारस्परिक संस्कृति और पर्यटन संबंधों को भी और बेहतर दिशा में ले जाने में मदद करेगा। बीते लगभग 9 वर्षों में तकरीबन 10 भारतीय फिल्मों और विज्ञापनों की शूटिंग आइसलैंड में हुई है। साथ ही दोनों देशों ने पर्यटन अवसरों को और बढ़ाने के प्रति सहमति और इच्छा जाहिर की है, जिससे न सिर्फ व्यवसाय बढ़ेगा बल्कि सुंदर दर्शनीय स्थलों का लोग भी लुत्फ़ ले सकेंगे।

जहां तक बहुपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों का सवाल है तो आइसलैंड ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का समर्थन किया है। यह कहना गलत नहीं होगा कि आइसलैंड पहला नॉर्डिक देश है जिसने संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी का सार्वजनिक तौर पर समर्थन किया। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने बातचीत में आर्कटिक परिषद में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। आर्कटिक परिषद एक अंतर सरकारी मंच है जिसमें आर्कटिक देश सदस्य हैं और भारत एक पर्यवेक्षक देश के तौर पर शामिल है।

श्री थोर्डोर्सन के साथ लगभग 50 एंटरप्रेन्योर्स का प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया था, जो पर्यटन, खाद्य उत्पादन, नवाचार और उच्च तकनीकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की 20 कंपनियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके भारत दौरे के दौरान प्रमोट आइसलैंड इन कोऑपरेशन विद वॉव एयर, भारत आइसलैंड व्यापार संघ, आइसलैंड-भारत चेंबर ऑफ कॉमर्स और आइसलैंड के विदेश मंत्रालय ने एक व्यापार सम्मेलन का आयोजन किया। जिसके केंद्र में पर्यटन, आइसलैंड का खाद्य और नवाचार जैसे विषय थे। सम्मेलन को संबोधित करते हुए आइसलैंड के विदेश मंत्री ने दोनों देशों के चेंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा किए जा रहे प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार सहयोग को बढ़ाए जाने में मदद मिलती है।

आइसलैंड के विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और आइसलैंड का पारस्परिक व्यापार अभी तक सामान्य रहा है। जबकि इसमें विकास की प्रबल संभावना है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि सीधे हवाई संपर्क स्थापित होने से व्यावसायिक संबंधों को एक स्थिर गति मिलेगी, लेकिन यह बहुस्तरीय और प्रभावी सहयोग से ही संभव होगा। अब तक द्विपक्षीय व्यापार और साझेदारी सही दिशा में चल रहे थे, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों जैसे विज्ञान एवं तकनीकी, अक्षय ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि क्षेत्र,स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा, शिक्षा, संस्कृति और लोगों से लोगों के सीधे संपर्क जैसे क्षेत्रों में और तेजी से आगे बढ़ने के लिए काम करना होगा।

आलेख: डॉ संघमित्र सर्मा, यूरोपीय मामलों की रणनीतिक विश्लेषक