बदलते परिदृश्य में भारत दक्षिण कोरिया के सम्बन्ध

एक उच्च स्तरीय शिष्टमंडल के साथ दक्षिण कोरिया की विदेश मंत्री, कंग क्यूंग-व्हा दो दिवसीय भारत यात्रा पर थीं | इस यात्रा का मुख्य एजेंडा 9वीं भारत कोरिया साझा आयोग बैठक था | यह बैठक कंग क्यूंग-व्हा तथा विदेश मंत्री, सुषमा स्वराज के बीच हुई | सुश्री कंग क्यूंग-व्हा की यह यात्रा सशक्त द्विपक्षीय सम्बन्धों में जारी निरंतरता को विस्तार देने के उद्देश्य से हुई है | 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरिया गणतन्त्र की यात्रा की थी | इस यात्रा के दौरान दोनों देशों में “विशेष रणनीतिक साझेदारी” हुई | सुश्री कंग क्यूंग-व्हा की इस यात्रा ने दोनों देशों के बीच सशक्त द्विपक्षीय सम्बन्धों में जारी निरंतरता को एक स्वाभाविक विस्तार दिया |

       इस वर्ष दोनों राष्ट्रों के बीच द्विपक्षीय सम्बन्धों में एक ठोस प्रगति हुई है | कोरिया गणतन्त्र के राष्ट्रपति मून जे-इन ने जुलाई महीने में भारत की यात्रा की | उस यात्रा के दौरान मुख्य रूप से आर्थिक तथा रक्षा सम्बन्धों को लेकर चर्चा हुई | दोनों नेताओं ने भारत तथा दक्षिण कोरिया के बीच की साझेदारी का भविष्य तीन मुद्दों, मानव, शांति और समृद्धि को बताया | दोनों देशों के लोगों पर बल देने से सम्बन्धों में गति आई | जिस कारण दोनों राष्ट्रों के लोगों को बहु-आयामी गतिविधियों में भागीदारी करने की प्रेरणा मिली | जिससे निकटतम सम्बन्धों में और प्रगाढ़ता आएगी |

         कोरिया के साथ ऐतिहासिक संबंध उत्तर प्रदेश के अयोध्या की राजकुमारी सुरीरत्ना के समय से है | राजकुमारी ने कोरिया की यात्रा की थी | इस राजकुमारी ने कोरिया के किंग से विवाह किया | कोरिया में इस राजकुमारी को हे हवांग-ओक के नाम से जाना जाता है | इसी ऐतिहासिक संबंध के कारण दक्षिण कोरिया की पहली महिला, किम जुंग-सूक ने गत महीने अयोध्या की यात्रा की तथा प्रिंसेस सुरीरत्ना के नाम पर एक पार्क की आधारशिला रखी |

      सुश्री कंग तथा श्रीमती स्वराज की बैठक में चिन्हित क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई तथा राष्ट्रपति मून जे-इन की यात्रा के दौरान इस दिशा में पहल भी हुई | आर्थिक संबंध, रक्षा तथा कार्यात्मक सहयोग जैसे मुख्य क्षेत्र इसमें शामिल किए गए |

     भारत की “पूर्वोन्मुख नीति” तथा कोरिया गणतन्त्र की “नई दक्षिणी नीति” के सराहनीय पहलुओं को संबोधित करते हुए दोनों मंत्रियों ने स्वाभाविक तालमेल बनाए रखने पर बल दिया | इस तरह के संबंध भारत-प्रशांत समेत एक विशाल क्षेत्र में एक स्वतंत्र, उन्मुक्त तथा शांतिपूर्ण शासन व्यवस्था को सुनिश्चित करेंगे | ध्यातव्य है कि भारत-प्रशांत क्षेत्र को लेकर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में अत्यधिक तनाव है | कोरिया गणतन्त्र के घरेलू मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए भारत की विदेश मंत्री ने संवाद तथा बातचीत के ज़रिए परमाणु मुद्दे तथा अंतर-कोरियायाई सम्बन्धों के संवर्धन पर सिओल को पूर्ण सहयोग देने को लेकर आश्वस्त किया ताकि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति तथा स्थिरता बहाल हो सके |

         दोनों राष्ट्रों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 2017-2018 के 20 बिलियन अमरीकी डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 50 बिलियन अमरीकी डॉलर तक ले जाने के एजेंडे को दोनों मंत्रियों ने व्यापार विस्तार के क्रियान्वयन के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीपीईसी) को उन्नत करने तथा पुर्नलोकन के साथ सम्पन्न किया | व्यापार विस्तार करने पर विचार चल रहा है, जो दोनों देशों के बीच के व्यापार को बढ़ा सकता है |

       भारत में मूलभूत संरचना में कोरियाई निवेश के माध्यम से आर्थिक संबंध को बढ़ाना एक नया पहलू है, जिस पर भी चर्चा की गई | इन उद्योगों में कोरियाई कंपनियों की दक्षता को ध्यान में रखते हुए, “मेक इन इंडिया”, “स्किल इंडिया”, “डिजिटल इंडिया” तथा “स्मार्ट इंडिया” जैसे भारत के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के साथ सामंजस्य स्थापित करने की सोच के साथ इस साझेदारी की रूपरेखा तैयार की गई है |   

   ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है | ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों के कार्यक्षेत्र में है, क्योंकि दोनों ही ऊर्जा निर्भर तथा एक विश्वसनीय राष्ट्र हैं और परंपरागत ऊर्जा की सुरक्षित आपूर्ति आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है | इस प्रकार, संपर्क के समुद्री मार्गों (एसएलओसी) के माध्यम से तेल की सुरक्षित आपूर्ति भारत तथा कोरिया दोनों के लिए चिंता का विषय है | नई दिल्ली ने सिओल को अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन से जुड़ने को कहा | अपने लोगों को समृद्ध बनाने, ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने और सुस्थिर विकास के लिए आंशिक तथा पूर्ण रूप से कर्क रेखा तथा मकर रेखा के बीच पड़ने वाले सौर सम्पन्न देशों के लिए यह गठबंधन एक अभूतपूर्व अवसर प्रदान करता है | ग़ैर-नवीकरणीय तथा नवीकरणीय ऊर्जा दोनों क्षेत्रों में सहयोग की संभावना महत्वपूर्ण है तथा परामर्श की एक प्रक्रिया आपसी हितों के लिए मददगार हो सकती है |

             भारत-कोरियाई सम्बन्धों के नए आयाम क्षेत्र की नई वास्तविकताओं के साथ तालमेल स्थापित करने के सिओल की प्रयासों में दिख रहे हैं, जो द्विपक्षीय सम्बन्धों में एक नई मिसाल की तरह है | इस प्रकार की बैठकें आनेवाले वर्षों में और होंगी |

आलेख – प्रो॰ श्राबनी रॉय चौधरी, पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र, जे॰एन॰यू