दक्षिण अफ्रीका के साथ भारत ने अपने संबंध किए प्रगाढ़

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण पर दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा भारत की  राजकीय यात्रा पर थे। वे गणतंत्र दिवस समारोह 2019 के विशिष्ट अतिथि भी थे। क्षी रामाफोसा के साथ दक्षिण अफ्रीका की प्रथम महिला डॉ. त्शोपो मोत्सोवे, नौ मंत्रियों सहित एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल, उनकी सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और पचास सदस्यों वाला कारोबारी मंडल भी भारत आया था। राष्ट्राध्यक्ष के रूप में ये राष्ट्रपति रामाफोसा की पहली यात्रा थी। गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि बनने वाले श्री रामाफोसा राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला के बाद दक्षिण अफ्रीका के दूसरे राष्ट्रपति हैं।

25 जनवरी को राष्ट्रपति भवन में श्री रामाफोसा का विधिवत स्वागत किया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति रामाफोसा के स्वागत में राजकीय भोज का आयोजन किया। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति व प्रथम महिला ने राजघाट स्थित महात्मा गांधी के प्रति सम्मान समर्पित किया। ये साल महात्मा गांधी का 150वां जन्म जयंति वर्ष है और भारत समेत पूरी दुनिया में इसे मनाया जा रहा है। गौरतलब है कि दक्षिण अफ्रीका में उन्हें विशेष सम्मान प्राप्त है। श्री रामाफोसा ने परस्पर हित वाले वैश्विक, क्षेत्रीय और द्विपक्षीय मुद्दों के बारे में प्रधानमंत्री के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता की। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति रामाफोसा के लिए दोपहर भोज का आयोजन किया।

दोनों देशों के बीच कारोबारी संबंधों के विकास के उद्देश्य से दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ भारत-दक्षिण अफ्रीका कारोबारी मंच को संबोधित किया। यात्रा पर आए राष्ट्रपति ने आईबीएसए की पन्द्रहवीं वर्षगांठ के आयोजन के हिस्से के तौर पर भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका को इस गठजोड़ के अंतर्गत भारत विश्व संबंध परिषद द्वारा आयोजित गांधी-मंडेला मुक्ति व्याख्यान भी दिया।

दक्षिण अफ्रीका की प्रथम महिला के साथ राष्ट्रपति रामाफोसा ने विशिष्ट सम्मानीय अतिथि के रूप में 26 जनवरी 2019 को भारतीय गणतंत्र दिवस की परेड का अवलोकन किया। नई दिल्ली से दक्षिण अफ्रीका रवाना होने से पहले 26 जनवरी को दोपहर उन्होंने राष्ट्रति द्वारा आयोजित- एट होम आयोजन में भी शिरकत की।

भारत और दक्षिण अफ्रीका 1997 से बहुआयामी, सामरिक साझेदारी का आनंद उठा रहे हैं। जो कि ऐतिहासिक, सांस्कृति और आर्थिक संबंधों पर आधारित है। जोहान्सबर्ग में ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका के सम्मेलन में प्रधानमंत्री के शामिल होने का साथ ही हालिया समय में दोनों ओर से बहुत ही उच्चस्तरीय यात्राएं हुई हैं। दक्षिण अफ्रीका में लगभग 1.5 मिलियन भारतवंशी रहते हैं जो एक मजबूत संबंध बनाते हैं। दक्षिण अफ्रीका में 150 से अधिक भारतीय कंपनियों ने निवेश किया है जिनसे 20 हजार से अधिक स्थानीय नागरिकों को रोजगार मिल रहा है। भारत दक्षिण अफ्रीका के ऊपरी पांच व्यापारिक साझेदारों में से एक है। द्विपक्षीय व्यापार 2017-18 में 9.38 अरब अमरीकी डॉलर से बढ़कर 2018-19 में 10.65 अरब अमरीकी डॉलर हो गया है। वैकल्पिक प्रशिक्षण और क्षमतावर्धन आदि क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच निकट सहयोग है। दोनों देश बहुत से वैश्विक मुद्दों पर एक जैसा दृष्टिकोण रखते हैं और संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स, जी-20, राष्ट्रमंडल, हिंद महासागर रिम संगठन और भारत ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका यानि आईबीएसए जैसे विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर निकट सहयोग करते हैं।

रंगभेद के दौर से ही भारत और दक्षिण अफ्रीका के पारंपरिक रूप से अच्छे संबंध रहे हैं। असल में, सबसे पहले भारत ने ही डॉक्टर नेल्सल मंडेला की अफ्रीका राष्ट्रीय कांग्रेस को देश में एक राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी थी। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर दक्षिण अफ्रीक के हित की बात की और रंग भेद के शासन के अंत की मांग की। 1990 के दशक के आरंभ में रंगभेद के समापन के बाद भारत ने तत्कालीन राष्ट्रपति प्रडोरिक डे क्लेर्क की सरकार को मान्यता दी और इन्दधनुषी राष्ट्र के साथ पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित किए। भारत ने एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का आयोजन करके दक्षिण अफ्रीका को फिर से अंतरराष्ट्रीय खेलों का हिस्सा बनाया। अपनी रिहाई के बाद डॉक्टर मंडेला ने पहली विदेश यात्रा भारत की ही की थी। भारत ने उन्हें, अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा। दक्षिण अफ्रीका के विभिन्न पक्षों के बीच सुलह सफाई कराने के लिए डॉक्टर नेल्सन मंडेला के प्रयासों के लिए उन्हें गांधी शांति पुरस्कार भी दिया गया। भारत अपनी तकनीकी और आर्थिक सहयोग परियोजनाओं के माध्यम से दक्षिण अफ्रीका के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।   

आशा है कि दक्षिण अफ्रीका की भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे।

आलेख- कौशिक रॉय, समाचार विश्लेषक, ऑल इंडिया रेडियो