बीबीआईएन उप-क्षेत्रीय सहयोग की संभावना

अधिकतर देशों के लिए आर्थिक एकीकरण प्राथमिकता बनता जा रहा है। ऐसे में समय में क्षेत्रीय सहयोग एक ऐसा माध्यम है जिस में क्षेत्र विशेष के देशों को एक साझे मंच पर लाकर बदलाव करने की क्षमता है। दक्षिण एशिया ने देखा है कि अगर भू-राजनीतिक नज़रिए से देखें तो क्षेत्र में आवश्यक सम्पर्क विफल रहा है। उप-क्षेत्रीय सहयोग को एक ऐसा माध्यम समझा जा रहा है जो एक जैसी विकासात्मक प्राथमिकताओं वाले देशों को समान विरचारधारा और भौगोलिक रूप से नज़दीकी के आधार पर एक मंच पर ला सकता है। इस संदर्भ में बांग्लादेश, भूटान, भारत और नेपाल उप-क्षेत्रीय सहयोग के मंच के रूप में अपनी जड़ें बनाते जा रहे हैं। बीबीआईएन सार्क की परिकल्पना के अनुरूप उप-क्षेत्रीय सहयोग का हिस्सा नहीं है। लेकिन इसमें परिवहन और ऊर्जा के माध्यम से पूर्वी दक्षिण एशिया में बदलाव करने की संभावना है। जून 2015 में काठमांडू सार्क मोटर वाहन समझौते पर सहमति न बन पाके के बाद बीबीआईएन के सभी चार सदस्यों ने मौजूदा परिवहन नेटवर्क को आपस में जोड़ने के लिए सहयोग करने और निर्बाध संपर्क के नए माध्यम तलाशने के लिए सहमति व्यक्त की थी। भारत, नेपाल और बांग्लादेश ने बीबीआईएन की पुष्टि की है, लेकिन भूटान द्वारा पुष्टि अभी बाक़ी है। थिंपु ने अन्य तीनों देशों को सहयोग मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए कहा है। अपनी राष्ट्रीय सभा में उठाए गए  पर्यावरणीय मुद्दों को सुलझाने के बाद ये इस संधि की पुष्टि करेगा। भूटान ने निरीक्षक के तौर पर बैठकों में शामिल होना जारी रखा है। इस क्षेत्र के देशों के बीच बहुत सी द्विपक्षीय संपर्क परियोजनाओं की या तो पहले से ही योजना बनाई जा चुकी है या फिर परियोजनाएँ जारी हैं। भारत ने पड़ोसी देशों को सड़क नेटवर्क का विकास करने मीटर गेज रेल मार्ग को विस्तृत रेल मार्ग बनाने और 1965 से पहले के संपर्क नेटवर्क को बहाल करने के लिए ऋण व्यवस्था तैयार की है। नेपाल को भारतीय रेल मार्ग से जोड़ने के लिए उपाय किए जा रहे हैं और काठमांडू तक तेल की निर्वाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पेट्रोलियम पाइपलाइनों का भी निर्माण किया जा रहा है। भारत और भूटान पहले से ही सड़क मार्ग द्वारा जुड़े हुए हैं।

इस तरह की संपर्क परियोजनाओं का उद्देश्य व्यापार बढ़ाना और जन में जन का संपर्क बढ़ाना है। प्रस्तावित उप-क्षेत्रीय परिवहन से एशियाई राज्य मार्गों और रेल मार्गों को जोड़ा जाएगा। जो एकीकृत परिवहन गलियारा तैयार करेगा। भारत कालादान बहुरूपीय परियोजना का और त्रिपक्षीय राजमार्ग का भी निर्माण कर रहा है जिससे भारत म्यांमा और थाईलैंड को जोड़ा जाएगा।

बीबीआईएएन उप-क्षेत्रीय नेटवर्क भू-राजनीतिक स्तर पर बड़े बदलाव कर सकता है क्योंकि इससे दक्षिण एशिया के आर्थिक रूप से सबसे अधिक हाशिये पर आए क्षेत्रों को जोड़ा जाएगा। भारत के पूर्वोत्तरी हिस्से का विकास किया जाना है। इस क्षेत्र के माध्यम से नेपाल और भूटान, बांग्लादेश में नज़दीकी पत्तनों का उपयोग कर सकेंगे। ज़मीन से घिरे नेपाल और भूटान के साथ व्यापारिक संबंध बेहतर करने के लिए ढाका इन संपर्क नेटवर्कों का इस्तेमाल करेगा।

तीनों देशों में बीबीआईएएन के अंतर्गत बिजली ग्रिड को आपस में जोड़ने का फैसला किया है। भारत और बांगलादेश इस क्षेत्र में पहले से व्यापार कर रहे हैं। ग्रिड सूत्र द्वारा बांग्लादेश को लगभग 660 मेगावाट बिजली की आपूर्ति की गई है और भारत आने वाले वर्षों में अतिरिक्त 1000 मेगावाट बिजली की आपूर्ति के लिए सहमत हुआ है। भारत, नेपाल और भूटान ने अपनी पन बिजली परियोजनाओं के अतिरिक्त बांग्लादेश में रामपाल विद्युत संयंत्र में भी निवेश कर रहा है। बांग्लादेश ने अब भूटान की पन बिजली परियोजना में निवेश करने का फैसला किया है और भारत-भूटान ग्रिड संपर्क द्वारा बिजली प्राप्त करने का निरणय लिया है। इसी तरह बांग्लादेश मौजूदा भारतीय ग्रिड के द्वारा नेपाल से बिजली हासिल करेगा और अतिरिक्त दबाव झेलने के लिए इस ग्रिड को मज़बूत किया जाएगा। भारत ने इस तरह के व्यापक संचालन के लिए सीमा पार विद्युत व्यापार मसौदे में पहले से ही संसोशन कर लिए हैं। इस प्रकार के उप- क्षेत्रीय ग्रिड संपर्क क्षेत्रीय ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति करेंगे।

बीबीआईएएन में क्षेत्रीय सहयोग की अपार संभावनाएँ हैं। बहुरूपीय मोटर वाहन समझौता सीमा पार व्यापार और परिवहन संपर्क उप-क्षेत्रीय सहयोग की सफलता के बहुत ज़रूरी है। मुक्त व्यापार नकारात्मक सूची में कम से कम उत्पादों की मौजूदगी गैर शुल्क बाधाएँ दूर करने से पूर्वी दक्षिण एशिया के उप-क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव आएंगे।

आलेख- डॉ. स्मृति एस. पटनायक, दक्षिण एशियाई सामरिक मामलों की विश्लेषक

अनुवाद – नीलम मलकानिया