अर्जेंटीना के राष्ट्रपति की भारत यात्रा

अर्जेंटीना फुटबाल और टैंगो का पर्याय है । इस दक्षिण अमरीकी देश में फुटबाल  भगवान सरीखा है। यह न केवल आनंद देता है, बल्कि अभिभूत भी करता है । माराडोना, मेसी तथा बतिस्तुता की मूर्तियाँ ब्यूनस आयर्स तथा अन्य शहरों की शोभा बढ़ाती हैं । फुटबाल  का खेल इसके चाहने वालों में समर्पण की भावना जगाता है । अर्जेंटीना एक टैंगो राष्ट्र भी है । यह ‘’टैंगो राष्ट्रीय दिवस’’ भी मनाता है । यहाँ एक “टैंगो स्मारक” है तथा टैंगो को यूनेस्को का विश्व सांस्कृतिक विरासत घोषित किया गया है । एक प्रमुख लैटिन अमरीकी राष्ट्र के रूप में अर्जेंटीना की आवाज़ क्षेत्रीय मामलों में मायने रखती है । इसकी विदेश नीति के कारण, वैश्विक मामलों में इसे सम्मान तथा विशिष्ट स्थान प्राप्त हुआ है । राष्ट्रपति मौरिसियो मैक्री के नेतृत्व में अर्जेंटीना कई देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों में विविधता देने पर काम कर रहा है । बहुपक्षीय राजनय के गलियारे में अर्जेंटीना फिर से दस्तक दे रहा है । कुछ महीने पहले ही, इसने जी-20 शिखर सम्मलेन की मेज़बानी का निर्वहन सफलतापूर्वक किया। आर्थिक तथा राजनीतिक शक्ति का पश्चिम से पूर्व की ओर विश्व के प्रस्थान को ध्यान में रखते हुए एशियाई शक्तियों के निकट जाने के लिए अर्जेंटीना ने एक सचेत नीति का अनुसरण किया है ।

इस पृष्ठभूमि के उलट, राष्ट्रपति मैक्री की भारत यात्रा को समझने और विश्लेषण करने की आवश्यकता है । श्री मैक्री ने निवेश के माहौल को दुरुस्त करने के लिए क़दम उठाये हैं ताकि अति आवश्यक पूंजी को आकर्षित किया जा सके और एक रचनात्मक तथा आपसी हितों के लिए लाभकारी साझेदारी को भी गढ़ा जा सके । भारत के बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय क़द तथा इसके प्रभावशाली आर्थिक प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए, ब्यूनस आयर्स एक संभावित साझेदार के रूप में भारत से उम्मीद लगा रहा है । 2019 दोनों देशों के बीच के राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ को चिन्हित कर रहा है । इस प्रकार, राष्ट्रपति मैक्री की यात्रा महत्वपूर्ण थी । उनके साथ इस यात्रा पर 100 व्यापारिक नेता भी पधारे थे। इन नेताओं ने मुंबई में भारत के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक की । यह बैठक एजेंडा की वरीयता सूची में थी।

अधिकतर लैटिन अमरीकी देशों की तुलना में, भारत तथा अर्जेंटीना के बीच उच्च स्तर की नियमित द्विपक्षीय यात्राएं होती रहीं हैं । गत वर्ष नवम्बर महीने में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी-20 शिखर सम्मलेन में भागीदारी करने के लिए ब्यूनस आयर्स गए थे। कई अवसरों पर मिलने के कारण दोनों नेतायों के बीच अच्छे संबंध हैं । परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की  सदस्यता को लेकर अर्जेंटीना का रवैया काफ़ी समर्थनकारी रहा है  ।

प्रधानमंत्री मोदी के साथ राष्ट्रपति मैक्री की वार्ता साझा वक्तव्य में एक सकारात्मकता को दर्शाती है | दोनों देशों के बीच हुई चर्चाओं पर ध्यान देने वाली बात यह है कि दोनों देश रक्षा, परमाणु तथा अन्तरिक्ष क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाओं को तलाशने के प्रति वचनबद्ध हैं |

भारत के साथ होने वाले व्यापार में अर्जेन्टीना सब्ज़ियों, फलों, मत्स्य तथा शराब के क्षेत्रों में लाभ की संभावना को स्वीकार करता है | प्रामाणिक ख़बरों के अनुसार, श्री मैक्री के एजेंडे पर लिथियम सर्वोपरि है, क्योंकि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक स्थान हासिल करने की इच्छा भारत रखता है | अर्जेन्टीना में लिथियम का विशाल भंडार है | यह भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह विद्युत वाहन क्षेत्र की ओर क़दम बढ़ा रहा है |

दोनों देश ऊर्जा, खनन, कृषि व्यवसाय तथा खाद्य सुरक्षा, अन्तरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में परमाणु सहयोग जैसे मुख्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को सशक्त करने के प्रति अपनी वचनबद्धता जता चुके हैं | दो तरफ़ा निवेश प्रवाह ने हाल के वर्षों में उत्साहजनक संकेत दिये हैं | इसलिए, दोनों देशों ने द्विपक्षीय निवेश संधि तथा दोहरे कराधान से बचाव के समझौते पर जल्द हस्ताक्षर करके अच्छा काम किया है | टीसीएस, विप्रो, क्रिसिल, बजाज, कॉग्निज़ेन्ट तकनीक आदि जैसी अग्रणी भारतीय कंपनियाँ अब अर्जेन्टीना में सफलतापूर्वक अपना व्यवसाय कर रही हैं | फ़ार्मा क्षेत्र में अर्जेन्टीना एक महत्वपूर्ण साझेदार हो सकता है, क्योंकि अर्जेन्टीना की फ़ार्मा कंपनियाँ एमएनसीज़ की तुलना में कहीं अधिक व्यवसाय कर रही हैं |

लैटिन अमरीका के साथ अपने व्यापारिक सम्बन्धों को आगे बढ़ाने के लिए भारत के प्रयास सराहनीय हैं, क्योंकि यह क्षेत्र भारत के साथ अपने सम्बन्धों को विविधता देने के लिए समान रूप से इच्छुक है | राहत की बात यह है कि इस क्षेत्र के साथ व्यापार में एक महती बढ़ोतरी हुई है | लैटिन अमरीका के साथ चीन के व्यापार का आयतन 300 बिलियन डॉलर के आंकड़े तक पहुँच चुका है | लैटिन अमरीका के साथ भारत के सम्बन्धों में ध्यान देने वाली बात यह है कि दोनों के व्यापार या निर्यात के आयतन से कहीं अधिक दोनों पक्षों का संयोजन महत्वपूर्ण है | हाल के वर्षों में, कुल निर्यात में सेवाओं की असामान्य रूप से हुई उच्च साझेदारी तथा बढ़ोतरी को दर्शाते हुए, भारत स्पष्ट रूप से स्वयं को चीन से अलग करता है |

वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते पदचिन्ह को अब लैटिन अमरीका की नीति चर्चाओं में महत्व दिया जा रहा है | इससे इस क्षेत्र के साथ भारत के सम्बन्धों के भविष्य का पता चलता है | बहरहाल, भारत को व्यापार तथा वाणिज्यिक सम्बन्धों के मामले में ध्यान देने की आवश्यकता है |

आलेख – ऐश नारायण राय, निदेशक, सामाजिक विज्ञान संस्थान

अनुवादक एवं वाचक – मनोज कुमार चौधरी