पाकिस्तान की खोखली कोशिशें

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने पुलवामा में हुए आतंकी  हमले के एक सप्ताह बाद बेमन से इन आरोपों से बचने की कोशिश की है कि इस हमले के पीछे इस्लामाबाद है । केंद्रीय आरक्षित पुलिस बल पर हुए हमले में चालीस से अधिक भारतीय सैनिक मारे गए । दुनिया का ध्यान इन पर जाने के बाद पाकिस्तान नेतृत्व की और से ये बहुत ही कमज़ोर बचाव किया गया है ।

वैश्विक समुदाय ये अच्छी तरह जनता है कि पाकिस्तान आतंकवाद को अपनी राजकीय नीति में इस्तेमाल करता है । सबसे पहले पुलवामा में हुए बर्बर हमले की निंदा करने वालों में अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प शामिल थे। पी पांच देश भी इस निंदा में शामिल हुए। हालांकि चीन ने अपने सामरिक हितों के चलते इस घृणित हमले के लिए दिखाने के लिए जैश–ए-मोहम्मद का नाम लिया ।

  भारत के विदेश मंत्रालय ने इमरान ख़ान के संबोधन की कड़ी निंदा की है । भारत ने उनके हर कथन का पूरी तरह खंडन किया है । नई दिल्ली ने कहा कि भारत हैरान नहीं है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पुलवामा में भारतीय सुरक्षा बलों पर हुए हमले को आतंकी हमला मानने से इनकार कर रहे हैं । पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने न तो इस घृणित कृत्य की निंदा की और न ही शोकसंतप्त परिवारों के लिए संवेदना प्रकट की । 

आतंकी हमले और पाकिस्तान के बीच किसी भी संबंध को नकारना पाकिस्तान का जाना-पहचाना बहाना हो गया है । पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने इस घिनौने अपराध को अंजाम देने वाले आतंकियों और जैश-ए-मोहम्मद द्वारा किए गए दावों को नज़र अंदाज़ कर दिया । ये तथ्य तो सभी जानते हैं कि जैश-ए-मोहम्मद और इसका सरगना मसूद अज़हर पाकिस्तान में है। कोई भी कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान के लिए यही सबूत पर्याप्त होने चाहिए ।

भारत ने आगे कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने प्रस्ताव रखा है कि अगर भारत सबूत पेश करे तो मामले की जांच करवाई जाएगी। ये कोरा बहाना है । 26 नवंबर को मुम्बई पर हुए भयानक हमले का पाकिस्तान को सबूत दिया गया था । इसके बावजूद दस वर्षों से भी अधिक समय बीत जाने पर भी मामला आगे नहीं बढ़ा है । इसी तरह पठानकोट हवाई अड्डे पर हुए आतंकी हमले की जांच में भी कोई प्रगति नहीं हुई। पाकिस्तान का पिछला रिकॉर्ड देखते हुए निश्चित कार्रवाई का वादा खोखला नज़र आता है ।

इमरान ख़ान ने नई सोच वाले नए पाकिस्तान का उल्लेख किया । इस नए पाकिस्तान में पाकिस्तान की वर्तमान सरकार के मंत्री सार्वजानिक रूप से हाफिज़ सईद जैसे आतंकियों के साथ मंच साझा करते हैं जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित है 

आलेख – कौशिक रॉय, सामरिक मामलों के विश्लेषक

अनुवादक एवं वाचक – नीलम मलकानिया