सीरिया में दाएश का खात्मा?

24 मार्च 2019 को अमरीका के समर्थन वाली सीरिया डेमोक्रेटिक सेना ने उत्तर-पूर्वी सीरिया की प्राकृतिक रूप से सुंदर यूफ्रेटस घाटी के मध्य में स्थित बघूच क़स्बे पर अपने अधिकार की घोषणा कर दी। अक्तूबर 2017 में राजधानी रक़्क़ा को गंवाने के बाद यह दाएश अर्थात आइएस का अंतिम शेष गढ़ था। 

2004 में अलक़ायदा की शाखा के रूप में पहली बार दाएश का जन्म हुआ और 2006 में उसने अपनेआप को एक इस्लामिक स्टेट ऑफ ईराक़‘ नामक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया। इस आतंकी संगठन ने सीरिया के गृहयुद्ध का लाभ उठाते हुए देश के अंदर अपने पंख फैलाने शुरू कर दिए और इसके बाद उसने देश के एक बड़े भूभाग पर कब्ज़ा कर लिया। 2014 में जब उसका मोसुल पर अधिकार हो गया तब दाएश के मुखिया अबु बकर अल-बगदादी ने स्वयं को खलीफा घोषित कर इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक अथवा दाएश की स्थापना की भी घोषणा की। जल्दी हीदाएश आतंकी संगठन का प्रभाव मध्य पूर्व एशिया और उत्तरी अफ्रीका के कट्टरपंथी गुटों पर भी होना आरंभ हुआ।

दाएश से हज़ारों विदेशी लड़ाके भी जुड़ने लगे और विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में घात लगाकर हमला करने वाले भी बढ़ने लगे। इसकी साम्प्रदायिक क्रूरता भरी नीति और महिलाओं के विरुद्ध अत्याचार ने वैश्विक शक्तियों का ध्यान आकर्षित किया और इसके ज़हर को मिटाने की रणनीति पर काम करने को विवश किया। दाएश के खात्मे के लिए सीरिया में दो गठबंधन सेनाओं ने सैन्य कार्रवाई आरंभ की। एक ओर रुस ने ईरान तथा सीरिया में बशर अल असद प्रशासन के गठबंधन में भागीदारी की तो अमरीका ने कुर्दों के साथ मिलकर सीरिया डेमोक्रेटिक फोर्स अर्थात एसडीएफ बनायी।

कुर्दिश एसडीएफ ने 2016 के अंत मे अमरीकी सेनाओं की हवाई बमबारी के साथ साथ कई मोर्चों पर दाएश के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किए। सीरिया में अक्तूबर 2017 में दाएश की राजधानी रक़्क़ा के पतन के रूप में पहली बड़ी सफलता प्राप्त हुई और उसके बाद कुछ प्रतिरोधों के बावजूद धीरे धीरे दाएश को हराने में एसडीएफ को सफलता मिल गई। यद्यपि दाएश का खात्मा हो चुका है लेकिन सीरिया के कुर्दों का भविष्य अभी भी अधर में है। कुर्द लड़ाके दाएश के विरुद्ध सर्वाधिक प्रभावी सिद्ध हुए। अब सीरिया के लगभग सम्पूर्ण उत्तर पूर्वी भाग पर एसडीएफ का अधिकार हो गया है और यह क्षेत्र उसके नियंत्रण में एक स्वयंभू क्षेत्र अर्थात रोजवा बन चुका है। कुर्दों ने सीरिया लोकतांत्रिक परिषद के द्वारा लोकतांत्रिक विधि से कार्य करने की अपनी योग्यता सिद्ध कर दी है और एसडीएफ के रूप में एक शक्तिशाली सेना  का निर्माण भी कर दिया है। फिर भीदाएश के पतन के बाद सीरिया में उनका राजनीतिक समाधान किया जाना शेष है।  स्थिति जटिल है और कुर्दों ने असद सरकार के साथ मिलकर सीरिया के भविष्य के लिए काम करने की इच्छा प्रकट की है जो कि एक चुनौती है।

हालांकि असद सरकार सम्पूर्ण सीरिया पर अपनी सम्प्रभुता पर अड़ी है। अमरीकी समर्थन वाले कुर्दों और रूस तथा ईरान के समर्थन वाली असद सरकार के बीच यह एक विवादित मुद्दा बन सकता है। सम्पूर्ण सीरिया पर असद सरकार के दावे को रूस और ईरान पहले ही अपने समर्थन की बात कह चुके हैं लेकिन रूस की अपेक्षा ईरान ने कुर्दों को किसी प्रकार की छूट का कड़ा विरोध किया है।

उत्तर पश्चिमी सीरिया की अस्थिरता को सामान्य बनाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले तथा फ्री सीरिया आर्मी एफएसए समेत अरबी प्रभाव वाले प्रमुख विपक्ष के समर्थक तुर्की ने भी कुर्दों को किसी भी तरह की छूट का विरोध किया है। तुर्कीएसडीएफ और विशेष रूप से उसके घटक पीपल प्रोटेक्शन यूनिट वाईपीजी को तुर्की की सुरक्षा के लिए एक खतरा मानता है क्योंकि उसके सम्बंध तुर्की द्वारा प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी पीकेके के साथ हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमरीकी सेना उत्तर पूर्वी सीरिया में अपनी उपस्थिति बढ़ाने को आतुर है जिससे कुर्दों के लिए विकल्प चुनना कठिन हो सकता है। 

वैश्विक तथा क्षेत्रीय शक्तियों को चाहिए कि वे स्थानीय घटकों की भावनाओं को नजरअंदाज किए बिना सीरिया के संकट का राजनीतिक समाधान खोजना चाहिए। दाएश का पतन सीरिया के लिए एक अच्छा समाचार है लेकिन सीरिया के राजनैतिक समाधान अभी शेष है। यदि शीघ्र ही कोई उचित समाधान नहीं निकाला जाता है तो दाएश पुनः अपनी पुरानी आतंकी गतिविधियों को दोहराने के रास्ते खोज सकता है।

आलेख – डॉ मोहम्मद मुदस्सिर क़मर

अनुवादक – हर्ष वर्धन