वैज्ञानिक प्रगति में भारत की लंबी छलांग

हाल के समय में भारत ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में तीव्र गति से विकास किया है और अब मूल अनुसंधान से प्रायोगिक शोध की ओर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। वर्तमान में विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र प्रयोगशाला से निकलकर सामाजिक मुद्दों को हल करने तथा वैज्ञानिक विचारधारा को पुनर्जीवित करने का मूलभूत काम कर रहा है। स्वाधीन भारत के समक्ष सबसे बड़ा मुद्दा राष्ट्र को प्रगति के मार्ग पर लाना थाविशेष रूप से खाद्य तथा राष्ट्रीय सुरक्षा की आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्रों में। इसीलिएतत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने प्रसिद्ध नारा दिया था जय जवान जय किसान। उनके बाद प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसमें जय विज्ञान‘ भी जोड़ दिया था। अब देश ने आगे बढ़कर इसमें जय अनुसंधान‘ जोड़ते हुए अनुसंधान को राष्ट्रीय एजेंडे में प्रमुख स्थान दे दिया है। 

 शीर्षस्थ विज्ञान संस्थान प्रधानमंत्री विज्ञानतकनीक तथा नवोत्थान सलाहकार परिषद में किये गए सुधार तेज़ी से उभरते और परिवर्तनशील माहौल में भारत को सर्वोच्च शिखर पर ले जाने की राष्ट्र की प्रतिबद्धता दर्शाते हैं। 2030 तक विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में शीर्ष तीन स्थानों में आने के लिए भारत ने बहुत महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किये हैं मगर यह कोई आसान काम नहीं है।लेकिन भारत की तीव्र गति को देखते हुए यह असंभव भी नहीं लगता। यद्यपिकिफायती खोजों के अतिरिक्तविज्ञान के क्षेत्र में यदि संसाधनों को दृष्टिगत किया जाए तो लोगों की प्रतिबद्धता के अनुरूप प्रगति को बनाये नहीं रखा जा सका है। अनुसंधान तथा विकास पर कुल व्यय पिछले एक दशक में तीन गुना बढ़ा है। लेकिन भारत का वैज्ञानिक समुदाय सर सी वी रमनजगदीश चंद्र बोसश्रीनिवास रामानुजम अथवा मेघनाद साहा जैसे स्तर तक नहीं पहुँच पाया है। 

भारतीय विज्ञान जगत वर्तमान में जलकृषिस्वास्थ्यऊर्जापर्यावरणजलवायुखाद्य जैसे क्षेत्रों में काम कर रहा है जो कि प्रधानमंत्री की विज्ञान और तकनीक नवोत्थान सलाहकार परिषद के मुख्य मुद्दे हैं। 

यह परिषद भविष्य के नौ क्षेत्रों में युद्धस्तर पर राष्ट्रीय नीति का निर्माण करेगीये क्षेत्र होंगे क्वांटम भौतिकीआर्टिफिशियल इंटेलिजेंसराष्ट्रीय जैवविविधताविद्युत गतिकीमानव स्वास्थ्य से जुड़ा जीव विज्ञानकूड़ा तथा स्वास्थ्यगहरे समुद्र में खोज तथा अग्नि(एक्सीलेरटिंग ग्रोथ फ़ॉर न्यू इंडिया)। इन क्षेत्रों में विकास के द्वारा देश को तेज़ी से बदलते विश्व परिदृश्य में प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बना देगा।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अब मूल विज्ञान के साथ साथ अनुप्रयुक्त विज्ञान की राह पर ले जाया जा रहा है। मिशन आधारित योजनाएं अनुप्रयोग तथा समाधान मूलक वैज्ञानिक कार्यक्रमों के ही प्रमाण हैं।

हाल के समय में कृषि के क्षेत्र में विज्ञान तथा तकनीक के हस्तक्षेप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ा हैउदाहरण के लिए किसानों के लिए लाभकारी कृषि-मौसम सम्बंधी दिशानिर्देश। समयानुकूल मौसम सम्बंधी जानकारी से खेती पर सकारात्मक आर्थिक प्रभाव पड़े हैं जिसके कारण राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में पचास हजार करोड़ रुपए की वृद्धि हुई है। मौसम तथा समुद्री पूर्वानुमानों की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं। 6.8 पीटा फ्लोप्स की संयुक्त क्षमता वाले दो सुपर कम्प्यूटरों प्रत्यूष‘ एवं मिहिर‘ के आ जाने से भारत के पास विश्व की सर्वश्रेष्ठ मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों में से एक मौजूद है।

भारत द्वारा जीवाश्म ईंधन के प्रयोग में कटौती की वचनबद्धता के बाद स्वच्छ ऊर्जा के लिए विभिन्न स्रोतों का उपयोग किया जाएगा। देश में हमारे वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न तकनीकों का विकास किया गया है। भारत के प्रथम जैविक ईंधन द्वारा संचालित विमान ने अगस्त 2018 में देहरादून से नई दिल्ली के बीच ऐतिहासिक उड़ान पूरी की। भारतीय वायुसेना ने एक एएन-32 मालवाहक विमान को इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में जैविक ईंधन से उड़ाकर इतिहास रच दिया था। देश इस समय एक ऐसी परियोजना पर काम कर रहा है जिससे प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कार्बनयुक्त ठोस कूड़ेगंदे पानी एवं द्रव तथा वायुमंडल में छोड़ी जाने वाली मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड से ईंधन बनाकर कच्चे तेल पर निर्भरता कम की जा सकेगी।

अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत विश्व के अग्रणी देशों में से एक है। एक समय तकनीक अहस्तांतरण का शिकार रहे भारत पर वर्तमान में अनेक देश अंतरिक्ष अभियानों में हमारी कुशलता पर आश्रित हैं जो कि प्रामाणिक तथा कम ख़र्चीली है। हाल के समय में अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में प्रगति और सामाजिक कल्याण के मामलों में उसके अनुप्रयोग स्वतंत्र भारत के इतिहास में अद्वितीय हैं।

कुल मिलाकरविज्ञान ने हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में पुनः प्रवेश कर लिया है और सही दिशा तथा उचित प्रतिबद्धता के कारण इस क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व करने के भारत के लक्ष्य को असंभव नहीं माना जाना चाहिए।

आलेख – एन भंडारन नायर

अनुवादक – हर्ष वर्धन