एफ़एटीएफ़ टीम का पाकिस्तान दौरा

हाल ही में एशिया प्रशांत समूह एपीजी का एक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान दौरे पर था। एपीजी, फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स, एफ़एटीएफ़ से जुड़ा एक क्षेत्रीय समूह है। पाकिस्तान दौरे में इसका उद्देश्य यह आकलन करना था कि पाकिस्तान वैश्विक मानकों के अनुसार ग्रे सूची से बाहर आने के लिए वित्तीय अपराध के खिलाफ पर्याप्त उपाय और कार्रवाई किए हैं या नहीं।

एफ़एटीएफ़ अधिकारियों और पाकिस्तान सरकार के अधिकारियों के बीच बैठक हुई। एपीजी के अधिकारियों ने पाकिस्तान स्टेट बैंक, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ऑफ पाकिस्तान, इलेक्शन कमिशन ऑफ पाकिस्तानपाकिस्तान के विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आतंक रोधी समूह के अधिकारियों सहित अन्य विभागों और अधिकारियों के साथ भी बैठक की।

पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने तय समय सीमा में निर्धारित नियमों और निर्देशों का पालन किया है, ताकि ब्लैक लिस्ट होने की नौबत ना आए। हालांकि ऐसे एफ़एटीएफ़ द्वारा विशेष रूप से नामित 8 क्षेत्रों में पाकिस्तान को वैश्विक वित्तीय सिस्टम में हाई रिस्क वाला देश घोषित किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने एफ़एटीएफ़ के भीतर पाकिस्तान के खिलाफ आक्रामक कदम उठाए हैं। इस समय पाकिस्तान की इमरान खान सरकार के लिए 10 सूत्रीय कार्य योजना के अंतर्गत 27 लक्ष्यों को हासिल करना उच्च प्राथमिकता है। पिछले महीने में एफ़एटीएफ़ के साथ बैठक में पाकिस्तान ने जमात-उद-दावा, फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन और जैश-ए- मोहम्मद सहित 6 समान संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी।

पाकिस्तान ने एपीजी को बताया कि सभी प्रतिबंधित संगठन कड़ी निगरानी में हैं और उन पर पंजीकरण से लेकर अभियान चलाने, धन इकट्ठा करने, बैंक खाता खोलने और पैसों का लेनदेन करने सहित सभी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

पाकिस्तान ने 6 बैंकों पर जुर्माना लगाया है और फर्जी खाता खोलने के मामले में 109 बैंकरों पर जांच शुरू की है। पिछले साल वित्तीय निगरानी इकाई ने 8707 संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्ट दी थी जो 2007 के 5548 की तुलना में 57% ज्यादा है।

पाकिस्तान ने खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए ब्रिटेन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया के साथ एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। माना जा रहा है कि पाकिस्तान में विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल भी हाल के दिनों में बेहतर हुआ है। यह सब बातें प्रभावित कर सकती हैं लेकिन एफ़एटीएफ़ की समीक्षा प्रक्रिया का एक स्टैंडर्ड मापदंड है। पाकिस्तान पर 10 बिन्दु की कार्य योजना के अंतर्गत 27 ऐसे क्षेत्र हैं जिन पर नजर रखी जा रही है और इसकी एक निश्चित समय सीमा है।

हाल की एफ़एटीएफ़ बैठकों में पाकिस्तान का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं दिखा है। एफ़एटीएफ़ ने पाकिस्तान से आग्रह किया है कि मई 2019 की निर्धारित समय सीमा से पहले वह अपनी कार्य योजनाओं को पूरा करे ताकि रणनीतिक खामियों को ठीक किया जा सके। है ने माना है कि पाकिस्तान ने आतंक को धन मुहैया कराने के जोखिम का आकलन संशोधित किया है। लेकिन इस्लामिक स्टेट, अलकायदा, जमात-उद-दावा, फलह-ए-इंसानियत, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हक्कानी नेटवर्क और तालिबान से जुड़े लोगों द्वारा आतंकी गतिविधियों में धन उपलब्ध कराने के रिस्क को लेकर कोई बेहतर समझ प्रदर्शित नहीं की है।

पाकिस्तान को कार्य योजना का पालन करना होगा जिसके लिए आतंकी संगठनों को धन उपलब्ध कराने के जोखिम को समझना होगा और गंभीरता से स्वीकार करना होगा। साथ ही इसे जोखिम वाले संवेदनशील आधार पर जांच करनी होगी और यह साबित करना होगा कि इससे निपटने के उपाय किए गए हैं या प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया अपनाई गई है।

पाकिस्तान को आतंक को धन उपलब्ध कराने के आरोपियों को न्याय के कटघरे में लाना होगा। इसके लिए न्याय व्यवस्था को छूट देनी होगी। इसके अलावा पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 1267 और 1373 के अंतर्गत प्रतिबंधित आतंकियों और आतंकी गुटों को धन जुटाने और उनके धन के प्रवाह को रोकना होगा और उनकी संपत्तियों को ज़ब्त करना होगा। साथ ही वित्तीय सेवाओं से उन्हें अलग अलग करना होगा।

एफ़एटीएफ़ पाकिस्तान की अगली समीक्षा जून में करेगा, जो मई में होने वाले संयुक्त समूह की बैठक के बाद होगी। आतंकी धन का प्रवाह रोकने, आतंकी समूह पर प्रतिबंध लगाने जैसे सफल क्रियान्वयन के बाद एफ़एटीएफ़ उसे वेरीफाई करेगा और अगर यह सफल होता है एफ़एटीएफ़ पाकिस्तान को ग्रे सूची से बाहर करेगा अन्यथा असफल होने की स्थिति में इस साल सितंबर में उसे ब्लैक लिस्टेड किया सकता है।

आलेख: कौशिक रॉय, एआईआर, समाचार विश्लेषक