राजोर्षि रोय, शोध विश्लेषक, आईडीएसए

युक्रेन के उथल-पुथल भरे राजनीतिक इतिहास में एक बड़ा बदलाव आया है। हास्य अभिनेता से राजनेता बने वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की को देश के राष्ट्रपति चुनावों में भारी जीत मिली है। यहूदी वंशावली के मूल रूसी वक्ता ज़ेलेंस्की 73 प्रतिशत से अधिक मत जीतकर युक्रेन के सबसे युवा राष्ट्रपति बनेंगे।

ज़ेलेंस्की के जीवन ने उन के कलात्मक जीवन का अनुसरण किया। उन्होंने एक चर्चित टेलिविजन धारावाहिक में सुधारवादी राष्ट्रपति की भूमिका निभाई थी और अब अपने ही देश के राष्ट्रपति बनने वाले हैं। राजनीति में नए होने के नाते जेलेंस्की ने केवल चार महीने पहले ही अपनी उम्मीदवारी का दावा किया था और देर से ही राजनीतिक दल का गठन किया।      

 युक्रेन के चुनाव परिणाम राजनीति में आ रहे वैश्विक बदलावों को दर्शाते हैं कि किस तरह से राजनीतिक अनुभव ना रखने वाले उम्मीदवार स्थापित व्यवस्था के विरोध में और लोकप्रियता के बल पर विजेता होकर उभर रहे हैं।  

 बदलाव और निरंतरता की बात करते हुए श्री ज़ेलेंस्की के चुनाव घोषणापत्र में सिर्फ़ घरेलू सुधारों पर ही ज़ोर नहीं दिया गया बल्कि अधिक संतुलित विदेश नीति पर भी ज़ोर दिया गया। इस में रूस के साथ संबंधों में कुछ बदलाव, दोनात्स्क और लूहांस्क के पूर्वी क्षेत्रों में युद्ध समाप्ति और पश्चिम के लिए नीति को जारी रखने का भी संदर्भ था।

युक्रेन के बदलाव के दौर में श्री ज़ेलेंस्की के राष्ट्रपति काल में क्या फ़ैसले किए जाएँगे इस पर पिछले समय की तुलना में राजनीतिक बदलाव की सफलता निर्भर करती है।    

 ये भी प्रासंगिक है कि श्री ज़ेलेंस्कि का कोई संस्थागत आधार नहीं है। युक्रेन जैसे संसदीय लोकतंत्र में उन के फ़्लैगशिप कार्यक्रमों के पूरे ना होने की आशंका भी है। देश में राष्ट्रपति जहाँ रक्षा और विदेश नीतियों को चलाने के लिए एकल शक्ति हैं वहीं मुख्य घरेलू सुधारों में राजनीतिक विपक्ष द्वारा अवरोध डाले जा सकते हैं जो कि अभी युक्रेन की संसद में बहुमत में है।

इसी तरह मीडिया और बैंक प्रणाली से ज़ेलेंस्की के निकट संबंधों की वजह से देश के राजनीतिक परिदृश्य के रूप में कई अटकलें भी लग रही हैं क्योंकि माना जाता है कि राजनीति और व्यवसाय के बीच अंतर होना चाहिए। रूसी प्रतिबंधों के साथ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अलोकप्रिय सुधारों की वजह से युक्रेन का आर्थिक परिदृश्य अव्यवस्थित हो गया है और इस वजह से देश की अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने के नए राष्ट्रपति के प्रयासों के सामने मुश्किलें आ सकती हैं। पूर्व और पश्चिम मुद्दों के आधार पर भी युक्रेन में आम राय नहीं है। क्षेत्रीय भू-सामरिक हितों में संतुलन बनाने लिए भी काफ़ी प्रयास करने होंगे।       

लेकिन फिर भी पूरे युक्रेन से समर्थन मिलने और रूसी भाषा वाले पूर्वी क्षेत्र से समर्थन मिलने के साथ ही श्री ज़ेलेंस्की के पास राजनीतिक पूर्वाग्रह भी नहीं हैं। ऐसे में उन्हें देश के घरेलू और विदेश नीति लक्ष्यों को पूरा करने के अवसर मिल सकते हैं। अक्तूबर में होने वाले संसदीय चुनावों से और ये तय हो जाएगा कि वे युक्रेन की राजनीतिक शतरंज में क्या सार्थक कर सकते हैं।    

इसी बीच रूस के साथ ख़राब हुए संबंध एक चुनौती है। हालांकि श्री ज़ेलेंस्की ने मूल रूसी मतदाताओं के प्रति अधिक समझौताकारी नीति अपनाई है लेकिन फिर भी संभव है कि विदेश नीति की उन की पूर्ण अवधारणा रूस के विशाल सामरिक गणित के अनुरूप ना हो। इस में क्रिमिया को लौटाने और पश्चिम के साथ अधिक सामंजस्य की माँग शामिल है। रूस चाहता है कि मिंस्क समझौता लागू हो। ये अभी भी अलगाववादियों के पक्ष में झुका हुआ है और श्री ज़ेलेंस्की के लिए संवेदनशील मुद्दा होगा।     

  क्रेमलिन के प्रवक्ता का सतर्कतापूर्ण वक्तव्य है कि राष्ट्रपति पुतीन द्वारा श्री ज़ेलेंस्की को मुबारक़बाद दिए जाने के बारे में बात किया जाना या साथ काम करने के बारे में बताना बहुत जल्दबाज़ी होगी। इससे वर्तमान समय में एक दूसरे के प्रति उन के सामरिक दृष्टिकोण का पता चलता है। शायद श्री ज़ेलेंस्की के चुनाव के बाद दीर्घकालीन संघर्ष विराम और क़ैदियों की अदला-बदली जैसे विश्वास वर्धन उपायों से टकराव समाप्त करने का अवसर मिले।

एक मित्र राष्ट्र होने के नाते भारत ये चाहता है कि युक्रेन और रूस, दोनों ही अपने मतभेदों को दूर करें और शांति तथा विकास के पथ पर आगे बढ़ें जो कि युक्रेन के लिए बहुत ज़रूरी है।

   रील से रीयल यानी वास्तविक जीवन में अपनी पारी की शुरुआत करने वाले नव-निर्वाचित राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के पास युक्रेन के विकास की असीम संभावनाओं के अवसर हैं।

अनुवाद- नीलम मलकानिया