दूसरी मोदी सरकार का शपथग्रहण समारोह


प्रचंड बहुमत प्राप्त करने के उपरांत श्री नरेंद्र मोदी ने 30 मई को लगातार दूसरी बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद के 58 सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। नए मंत्रिमंडल में भारतीय जनता पार्टी और इसके सहयोगी दलों के योग्य…

आईसीसी विश्वकप 2019 का आगाज़


अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट विश्वकप के 12वें संस्करण का आगाज़ हो गया है। इस बार विश्वकप की मेज़बानी इंग्लैंड और वेल्स कर रहे हैं। 30 मई से 14 जुलाई तक चलने वाले इस विश्वकप के दौरान क्रिकेट का ख़ुमार लोगों के सिर चढ़कर बोलेगा। करीब डेढ़ महीने तक लगातार क्रिकेट प्रेमियों का…

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार जारी


पाकिस्तान सरकार की भेदभावपूर्ण नीतियों की वजह से पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही पाकिस्तान के बहुसंख्यक लोग भी अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का कोई मौका नहीं चूक रहे। इनमें विशेष रूप से दक्षिण-पंथी विचार रखने वाले लोग शामिल हैं। पाकिस्तान की कुल…

मोदी के दूसरे कार्यकाल में भारत की विदेश नीति


2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी ने देश में कई महत्वाकांक्षी परिवर्तन किए। इन परिवर्तनों को आगे जारी रखने के लिए भारत के 900 मिलियन मतदाताओं ने अपनी लोकतांत्रिक ताकत का इस्तेमाल करते हुए उन्हें एक बार फिर से प्रचंड बहुमत दिया है। नरेन्द्र मोदी को मिला यह जनादेश आगामी…

भारत एक वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर


जब निर्णय लेने में एक उच्चतर मानक निर्धारित करने की बात आती है, तो इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बराबरी का कोई नहीं नज़र आता है | यह बात स्पष्ट दिखी, जब उन्होंने कहा कि उनकी दूसरी सरकार “नई ऊर्जा के साथ एक नए भारत” को निर्मित करने…

जोकोवि की इंडोनेशिया की सत्ता में वापसी


एक महीने के इंतज़ार के बाद जोकोवि के नाम से चर्चित जोको विडोडो इंडोनेशिया के राष्ट्रपतित्व चुनाव में विजेता घोषित हुए हैं | 17 अप्रैल को इंडोनेशिया में चुनाव हुआ था | राष्ट्रपति तथा उप-राष्ट्रपति के चुनाव के अलावा पीपल्स कंसल्टेटिव एसेम्बली तथा स्थानीय विधान निकायों के लिए भी चुनाव…

एस.सी.ओ. के विदेशमन्त्रियों की बैठक।


विदेशमन्त्री सुषमा स्वराज ने इस हफ्ते किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन यानि एस.सी.ओ. की मंत्रिस्तरीय बैठक में शिरकत की। सरकार का कार्यकाल समाप्त होने के चलते यह विदेशमन्त्री के तौर पर श्रीमती स्वराज की आखिरी विदेशयात्रा थी। देश में आमचुनावों के नतीजे आने से एक दिन पहले उनकी इस यात्रा से पता लगता है कि एस.सी.ओ. की भारत के लिए खास अहमियत है। पिछले सालों में भारतीय नेताओं ने एस.सी.ओ. की सभी बैठकों में गम्भीरता से भाग लिया है। प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी 2015 में रूस के उफा में आयोजित सम्मेलन के बाद से ही एस.सी.ओ. की तमाम शिखर बैठकों में शिरकत करते रहे हैं। पिछले साल श्रीमती स्वराज के साथ रक्षामन्त्री निर्मला सीतारमण और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने भी अपने स्तर पर चीन में एस.सी.ओ. की बैठकों में भाग लिया था। इन बैठकों की मार्फत भारत को डोकालाम विवाद के बाद चीनी पक्षकारों से सम्पर्क रखने और मध्यएशिया से रूस तक तमाम मुल्कों के साथ समन्वय के अवसर मिलते रहे हैं। हालिया एस.सी.ओ. बैठक के साथ श्रीमती स्वराज ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात की। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने वुहान अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के फैसलों के अमल पर चर्चा की। भारत को जून 2017 में एस.सी.ओ. की पूर्ण सदस्यता हासिल हुई थी। एस.सी.ओ. में भारत और पाकिस्तान की शुमारगी से संगठन को यूरेशिया के साथ भारतीय उपमहाद्वीप तक व्यापकता मिली। एस.सी.ओ. की बैठकों में नियमित उपस्थिति से भारत को अनेक अहम मसलों पर अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय से सामंजस्य का मौका मिलता रहा है। इससे नई दिल्ली की ‘मध्यएशिया सम्पर्कनीति’ को भी बल मिला है। एस.सी.ओ. की बैठकों में ईरान और अफ़ग़ानिस्तान को पर्यवेक्षक का दर्ज़ा दिया गया है। बैठक में अपने सम्बोधन के दौरान श्रीमती स्वराज ने अफ़ग़ानिस्तान में शान्तिप्रक्रिया जारी रखने पर ज़ोर दिया। उन्होंने एस.सी.ओ. के ‘अफ़ग़ानिस्तान सम्पर्क समूह’ को भारत के बेशर्त समर्थन की घोषणा की। सुषमा स्वराज ने इस समूह के भावी योजना दस्तावेज को जल्दी पूरा करने का आग्रह किया; ताकि क्षेत्र की तमाम ताकतों के सहयोग से शान्तिप्रक्रिया को सटीक और सफल बनाया जा सके। इससे पता लगता है कि भारत एस.सी.ओ. को अफ़ग़ानिस्तान में शान्ति-स्थापना और क्षेत्रीय सहयोग के अहम मंच के तौर पर तवज्जो देता है। एस.सी.ओ. में भारत की शुमारगी से आतंकवाद के खिलाफ क्षेत्रीय संघर्ष को बल मिला है। फरवरी 2019 के पुलवामा हमले के बाद भारत आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष में काफी आक्रामक हो गया है। एस.सी.ओ. के अन्तर्गत आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ संघर्ष के लिए क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी ढाँचे या आर.ए.टी.एस. की स्थापना की गई है। इसके तहत ‘पीस-मिशन’ नाम से आयोजित वार्षिक आतंकवादरोधी अभ्यास में भारत ने भी हिस्सा लिया। भारत के लिए आतंकवाद का प्रतिकार एस.सी.ओ. में सहभागिता का अहम उद्देश्य है। इसके अलावा वह क्षेत्रीय सम्पर्क गहराने और शान्ति तथा स्थिरता मज़बूत करने के लिए भी प्रयासरत रहा है। हालिया बैठक में भारतीय विदेशमन्त्री ने अन्तर्क्षेत्रीय सम्पर्क की सम्भावना तलाशने पर बल दिया। उन्होंने भारत के प्रयास से संचालित अन्तर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे, चाबहार बन्दरगाह, अशगाबट समझौते  और भारत-म्यांमार-थाइलैण्ड त्रिकोणीय महामार्ग की चर्चा की। लेकिन चीन की बी.आर.आई. परियोजना का स्वरूप भारत की विदेशनीति के अनुरूप नहीं है। भारत का कहना है कि अन्तर्राष्ट्रीय सम्पर्क परियोजनाओं में सभी पक्षों की सम्प्रभुता और अखण्डता का सम्मान किया जाना चाहिए। एस.सी.ओ. की मार्फत भारत को एक तरफ तो मध्य एशियाई देशों से सम्पर्क गहराने का माध्यम मिला है तो दूसरी ओर रूस और चीन जैसी क्षेत्रीय ताकतों के निकट आने का मौका हासिल हुआ है। पिछले कुछ वक्त से यूरेशिया अनेक समस्याओं से जूझ रहा है; जिनमें आतंकवाद, सम्पर्क की कमी, क्षेत्रीय अशान्ति, अस्थिरता और धीमी आर्थिक तरक्की अहम हैं। इनसे निपटने के लिए क्षेत्र के सभी मुल्कों को मिलकर कदम बढ़ाने की ज़रूरत है। भारत अपनी ‘मध्यएशिया नीति’ के तहत इस क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाने के लिए उत्सुक है। यही वजह है कि वह एस.सी.ओ. की तमाम गतिविधियों में पूरी तत्परता से सहभागी होता रहा है। संगठन के सदस्यों की सक्रियता से एस.सी.ओ. एक मज़बूत क्षेत्रीय ताकत के तौर पर स्थापित हो रहा है। इससे सदस्य देशों को एक-दूसरे के साथ निकट सहयोग का मौका मिला है। यही वजह है कि भारत एस.सी.ओ. को विकास और सहभागिता के अहम मंच के तौर पर स्वीकार करता है। आलेख - सना हाशमी, चीनी और यूरेशियाई मामलों की कूटनीतिक विश्लेषक। अनुवाद और वाचन - डॉ. श्रुतिकान्त पाण्डेय।

एक सशक्त सरकार के लिए भारत का मतदान


भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को 900 मिलियन से अधिक भारतीय मतदाताओं ने एक निर्णायक जनादेश दिया है | 35 वर्षों में पहली बार, भारतीय सरकार की लोकसभा में एक अकेली पार्टी 303 सीटें जीत पाने में सफल रही है | प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र…

निगरानी क्षमता को मज़बूत करने के लिए अंतरिक्ष में तैनात भारत की नई आँख


भारत ने बुधवार सुबह पृथ्वी अवलोकन सैटेलाइट रिसैट-2बी का सफल परीक्षण किया। यह सैटेलाइट अंतरिक्ष में भारत की निगरानी क्षमता को मज़बूत करेगा क्योंकि यह 24 घंटे और किसी भी मौसम में भारत की सीमाओं की निगरानी करने में सक्षम है। 615 किलोग्राम भार वर्ग वाला यह रिसैट-2बी मिशन करीब…

भारत का मिशन चंद्रयान-2


भारत के दूसरे चंद्रयान मिशन “चंद्रयान-2” का इस साल जुलाई में प्रक्षेपण करने की योजना है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान परिषद् (इसरो) के मुताबिक इसमें देश के विभिन्न अनुसंधान संगठनों द्वारा विकसित अंतरिक्ष उपकरण होंगे, जिससे वैज्ञानिक प्रयोगों और डाटा की लंबी श्रंखला को लागू कर पाना संभव होगा। 3.8 टन…