पाकिस्‍तान ने सर्वविदित सत्‍य का किया खुलासा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक दिलचस्प रहस्योद्घाटन करते हुए स्वीकार किया है कि पाकिस्तान में 40 आतंकवादी शिविर थे, और पाकिस्तान की धरती पर अब तक लगभग 40,000 आतंकी मौजूद हैं। इमरान खान की तरफ से यह स्‍वीकारोक्‍ति अमरीका की पहली आधिकारिक यात्रा के दौरान हुई। उन्होंने यह भी स्‍वीकार किया कि पाकिस्‍तान की पिछली सरकारों ने अमेरिका के साथ ‘सच्चाई’ साझा नहीं की।

इमरान खान ने कहा कि पाकिस्तान आतंक के खिलाफ अमरीका का युद्ध लड़ रहा था। उनका आकलन है कि पाकिस्तान का 9-11 से कोई लेना-देना नहीं है। अल-कायदा अफगानिस्तान में था। पाकिस्तान में तालिबानी आतंकवादी नहीं थे। लेकिन हम अमरीकी युद्ध में शामिल हुए। उन्‍होंने कहा कि दुर्भाग्य से, जब स्थितियां बिगड़ने लगीं तब पाकिस्‍तान की तत्‍कालीन सरकार ने अमरीका को सच नहीं बताया। इमरान खान कांग्रेस महिला शीला जैक्‍सन ली द्वारा पाकिस्‍तान के समथर्न में कैपिटल हिल पर आयोजित एक आयोजन में यह बातें कहीं। इसके अलावा अमरीका की अपनी तीन दिवसीय यात्रा के दौरान इंस्टीट्यूट ऑफ पीस के एक कार्यक्रम में, श्री खान ने कहा कि उनके देश में अभी भी लगभग 30,000 से 40,000 आतंकवादी हैं, जो अफगानिस्तान या कश्मीर के कुछ हिस्सों में प्रशिक्षित किए गए और संघर्ष में शामिल रहे हैं।
भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी को एक भयावह स्‍वीकृति करार दिया है और कहा कि यह पाकिस्‍तान के लिए आतंकवादियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने का समय है। भारतीय विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि पाकिस्‍तान को अब भरोसेमंद कदम उठाना होगा।
भारत के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पाकिस्तान की जमीन पर अब भी हजारों आतंकवादी मौजूद हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा, आतंक को प्रोत्साहित करना हमारे पड़ोसी सहित कुछ देशों की राज्य नीति का हिस्‍सा है।
हालांकि पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री ने अमरीका में जो कुछ कहा, उससे पूरी दुनिया पहले से ही अवगत है। लेकिन उन्‍होंने यह नहीं बताया कि उनकी सरकार ने इन 40 हज़ार आतंकवादियों के खिलाफ क्‍या कदम उठाए हैं। यह साबित करता है कि पाकिस्‍तान की झूठी बयानबाज़ी जारी है।
विश्‍लेषकों का मानना है कि इमरान खान ने जो आंकड़े बताए हैं वह उन आंकड़ों से बहुत अधिक हैं, जिसे उसने फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स को उपलब्‍ध कराए हैं। फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स एक ऐसी संस्‍था है, जो वैश्विक आतंकी फंडिंग की निगरानी करती है। पाकिस्‍तान अगर आतंक रोकने की अपनी प्रतिबद्धताओं को अक्‍टूबर तक पूरा नहीं करता है तो फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स उसे ब्‍लैकलिस्‍ट कर सकता है। पाकिस्‍तान के आतंक रोधी कार्रवाई में अनुसूची 4 में दिए गए प्रतिबंधित संगठनों में 8000 सक्रिय आतंकवादी बताए गए हैं।
पाकिस्‍तान मामलों के एक विश्‍लेषक के अनुसार इमरान खान के इस बयान से सवाल खड़ा होता है कि फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स की कड़ाई का पाकिस्‍तान पर बहुत असर नहीं हो रहा है और इससे भारत जैसे देशों को एफएटीएफ से सवाल पूछने का मौका मिल गया है।
यह पहली बार नहीं है जब इमरान खान ने आतंक पर साफगोई से बयानबाज़ी करके विवाद खड़ा किया है। इससे पहले अप्रैल में ईरान के राष्‍ट्रपति हसन रूहानी से मुलाक़ात में इमरान ख़ान ने कहा था कि पाकिस्‍तान की धरती से इरान विरोधी आतंकी गतिविधियां संचालित होती हैं। उनके इस बयान की पाकिस्‍तान की संसद में आलोचना हुई थी।
पाकिस्‍तान पर ट्रम्‍प की कभी गर्म और कभी नर्म नीति सफल नहीं हुई है। ट्रम्‍प प्रशासन ने पाकिस्‍तान को दी जाने वाली 1.3 बिलियन डॉलर की नागरिक और सैन्‍य सहायता पर पिछले साल से रोक लगा दी है। हालांकि इमरान खान की हालिया अमरीका यात्रा से अमरीका का हृदय परिवर्तन हुआ है।
अफगान-तालिबान के साथ समझौते में अमरीका, पाकिस्‍तान की भूमिका देखता है। अमरीकी राष्‍ट्रपति ट्रम्‍प को अच्‍छी तरह पता है कि अफगान-तालिबान का परोक्ष रूप से नियंत्रण पाकिस्‍तानी सैन्‍य व्‍यवस्‍था करती है। अमरीका तालिबान के साथ बातचीत कर रहा है, जिसे पाकिस्‍तान मदद दे रहा है। पाकिस्‍तान चाहता है कि अफगानिस्‍तान मामले में उसकी मुख्‍य भूमिका हो। पाकिस्‍तान इस चालाकी में है कि अपने आपको अमरीका का दोस्‍त दिखाए और अफगानिस्‍तान से अमरीकी सेना की वापसी में मदद करे उसके बाद अफगान राजनीति में सरकार बनाने की भूमिका में आ जाए। इससे ना सिर्फ दक्षिण एशिया में बल्कि नज़दीकी पड़ोसी देशों के लिए गम्‍भीर सुरक्षा चुनौ‍ती पैदा होने का ख़तरा है।
आलेख- कौशिक रॉय, समाचार विश्‍लेषक, ऑल इण्‍डिया रेडियो