भारत और मोज़ाम्बिक द्विपक्षीय समझौते

भारत ने मोजाम्बिक के साथ रणनीतिक संबंधों और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए जहां बड़े निवेश किए हैं, वहीं रक्षा मंत्री,राजनाथ सिंह की हाल ही में सम्पन्न हुई मोज़ाम्बिक की 3 दिवसीय यात्रा के दौरान दोनों देशों ने ‘व्हाइट शिपिंग’ से जुड़ी जानकारी साझा करने के संबंध में दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करके एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

श्री सिंह ने मोज़ाम्बिक के रक्षा मंत्री के साथ बातचीत में कहा कि भारत अफ्रीका में मोजाम्बिक को अपने सबसे महत्वपूर्ण मित्रों और भागीदारों में से एक मानता है। आंकड़े बताते हैं कि मोज़ाम्बिक में भारतीय निवेश 7 बिलियन डॉलर का है, जो अफ्रीका में भारतीय निवेश का लगभग 25 प्रतिशत है। यह निवेश मुख्यतः कोयला और ऊर्जा क्षेत्र में है। 2017 में, मोजाम्बिक का सबसे अधिक निर्यात भारत में हुआ जब इसके कुल निर्यात का लगभग 35 प्रतिशत राजस्व हिस्सा भारत से प्राप्त हुआ।

रक्षा मंत्री के रूप में अपनी पहली विदेश यात्रा और एक भारतीय रक्षा मंत्री की पहली मोज़ाम्बिक यात्रा के दौरान उन्होंने कहा कि इस यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों और भारत-मोजाम्बिक रक्षा सहयोग को और प्रगाढ़ करने की दिशा में प्रगति होगी। हिन्द महासागर क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की क्षमता में भी सुधार आएगा।

रक्षा मंत्री ने संचार उपकरणों के क्षेत्र में सहायता की भी घोषणा की और तस्करी, आतंकवाद, समुद्री डकैती, अवैध शिकार तथा समुद्री क्षेत्र में समग्र सहयोग के मिलकर काम करने के महत्व पर भी बल दिया। भारत ने मोज़ाम्बिक को मापुटो में आयोजित एक समारोह में भारत में बने दो फास्ट इंटरसेप्टर बोट्स (एफआईबी) और 44 एसयूवी भी सौंपे। 4 सदस्यीय भारतीय तटरक्षक दल इन नावों के रखरखाव और संचालन के लिए प्रशिक्षण और सहायता के लिए मोज़ाम्बिक गया है।

इससे पहले, मोजाम्बिक रक्षा मंत्री ने श्री सिंह को आंतरिक सुरक्षा स्थिति और चल रहे निरस्त्रीकरण, विमुद्रीकरण और पुनर्वितरण (डीडीआर) प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। श्री सिंह ने मोजाम्बिक के नेताओं से मुलाकात के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के पूरे परिदृश्य पर चर्चा की और दोनों देशों के बीच उत्कृष्ट सरकार-से-सरकार के संबंधों, मजबूत व्यापारिक आदान-प्रदान, जीवंत विकास साझेदारी और लोगों से लोगों के संपर्क के लंबित मुद्दों पर चर्चा की।

उन्होंने मोजाम्बिक के प्रधानमंत्री, श्री कार्लोस अगोस्तिंहों दो रोसारियो से मापुतो में मुलाक़ात की और दोनों देशों के बीच रक्षा तथा सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर चर्चा की। अफ्रीकी देश आतंकवाद और कट्टरपंथ के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए भारत से सहयोग चाहता है। दोनों पक्षों ने हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने के लिए सहयोग मज़बूत करने की संभावनाओं पर भी बातचीत की।

निवेश के अलावा, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार भी हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार 2010 के मुक़ाबले 2015 में पांच गुना बढ़ गया। द्विपक्षीय व्यापार 2014-15 में कुल 2.4 बिलियन अमरीकी डॉलर के साथ शिखर पर पहुँच गया। परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद और फार्मास्यूटिकल्स उत्पाद भारत से मोज़ाम्बिक को होने वाली प्रमुख निर्यात वस्तुएं हैं, जबकि मोजाम्बिक से भारत ने मुख्यतः कोयला और काजू आयात किए हैं। मोज़ाम्बिक के लगभग 20,000 नागरिक ऐसे हैं जो भारत में अपने वंशज ढूंढ रहे हैं।

जैसा कि भारतीय रक्षा मंत्रालय ने कहा है, भारत, मोजाम्बिक के साथ घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध साझा करता है, जिसे मजबूत विकास साझेदारी और मोज़ाम्बिक में बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीयों की मौजूदगी से मदद मिलती है। रक्षामंत्री की इस यात्रा से मोजाम्बिक के साथ संबंधों में और मजबूती आने की उम्मीद है।

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि जुलाई, 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अफ्रीकी देश मोज़ाम्बिक की यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध तेज़ी से मज़बूत हुए हैं। यह ज़िक्र करना भी महत्वपूर्ण है कि वर्ष 2014 में पहली बार श्री मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालने के बाद से सिर्फ मोज़ाम्बिक ही नहीं बल्कि अन्य अफ्रीकी देशों के साथ भारत के सम्बन्धों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। संसाधन-संपन्न अफ्रीका में उच्च-स्तरीय यात्राओं में वृद्धि हुई है, विशेष रूप से 2015 में तीसरे भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन के बाद से। उसके उपरांत अब तक भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की 29 अफ्रीकी यात्राओं के अलावा अन्य वरिष्ठ मंत्रियों की भी अफ्रीकी देशों की यात्राएँ हुई हैं। वर्तमान में भी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, तीन पश्चिम अफ्रीकी देशों के दौरे पर हैं।

आलेख- विनीत वाही, पत्रकार