ज़ाम्बिया के राष्ट्रपति की भारत यात्रा: गहराते द्विपक्षीय संबंध

ज़ाम्बिया के राष्ट्रपति एड्गर चाग्वा लुंगु राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के निमंत्रण पर भारत यात्रा पर आए। नई सरकार के गठन के बाद ये ज़ाम्बिया के राष्ट्राध्यक्ष की और राष्ट्रपति लुंगु की भारत की पहली राजकीय यात्रा थी। पिछली बार ज़ाम्बिया के राष्ट्रपति लेवी म्वानावासा ने 16 साल पहले अप्रैल 2003 में भारत की यात्रा की थी।

 भारत की अफ़्रीका नीति के संदर्भ में ये यात्रा अत्यंत महत्त्वपूर्ण रही। इस नीति के अंतर्गत तीसरे भारत-अफ्रीका मंच सम्मेलन प्रक्रिया के चलते 32 भारतीय राजनेताओं ने अफ्रीकी देशों की और 35 अफ्रीकी नेताओं ने भारत की यात्रा की है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा अप्रैल 2018 में ज़ाम्बिया की राजकीय यात्रा के 16 महीनों बाद राष्ट्रपति लुंगु ने भारत की यात्रा की है। ये यात्रा द्विपक्षीय संबंधों में हुई पूर्ण प्रगति का जायज़ा लेने का एक अहम अवसर रही।

 राष्ट्रपति भवन में स्वागत समारोह का आयोजन,राजघाट का दौरा, राष्ट्रपति से मुलाक़ात तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता ज़ाम्बिया के राष्ट्रपति की यात्रा के मुख्य बिंदु रहे। श्री लुंगु ने नई दिल्ली में भारत-ज़ाम्बिया कारोबारी मंच की बैठक में भी शिरकत की।

 ज़ाम्बिया के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता के दौरान रक्षा, सुरक्षा,खनिज संसाधन, व्यापार और निवेश, अवसंरचना,ऊर्जा, स्वास्थ्य, क्षमता वर्धन और संस्कृति तथा क्षेत्रीय और वैश्विक हितों से जुड़े मुद्दों के बारे में सफल बातचीत हुई।

इस दौरान राष्ट्रपति कोविंद की अप्रैल 2018 में ज़ाम्बिया यात्रा के दौरान जिन समझौतो पर हस्ताक्षर किए गए थे उनकी समीक्षा भी की गई और उनकी प्रगति पर संतोष भी व्यक्त किया गया। राष्ट्रपति लुंगु ने महात्मा गाँधी प्राथमिक विद्यालय को तीस लाख डॉलर मूल्य की दवाएँ और चिकित्सा उपकरणों के अनुदान और एक लाख डॉलर दिए जाने की भी सराहना की। इस विद्यालय की घोषणा पिछले वर्ष भारत के राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान की गई थी।

विकासात्मक साझेदारी के मंच पर राष्ट्रपति लुंगु ने ज़ाम्बिया के विकासात्मक कार्यक्रमों के लिए भारत के सहयोग की सराहना की, विशेष तौर से रक्षा बलों की क्षमता वर्धन में किए गए योगदान की। उन्होंने रक्षा सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पत्र पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया क्योंकि इससे क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का रास्ता साफ हो जाता है। साथ ही देश के सशस्त्र बलों की क्षमता बढ़ाने के लिए भारत की सेना और वायु सेना की प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए ज़ाम्बिया में तैनात की जा सकेंगी।

  भूविज्ञान और खनिज संसाधन, स्वास्थ्य और औषधि,कला और संस्कृति, ई-वीबाब नेटवर्क परियोजना के माध्यम से टेलि शिक्षा और टेलि चिकित्सा में सहयोग के लिए, भारत के निर्वाचन आयोग और ज़ाम्बिया के निर्वाचन आयोग के बीच सहयोग के लिए और भारत के विदेश सेवा संस्थान और ज़ाम्बिया के कूटनीति तथा अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान के बीच सहयोग के लिए भी कई सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए।

भारत द्वारा सौर ऊर्जा, लघु और मझौले उद्योगों के बारेमें भी कई महत्त्वपूर्ण घोषणाएँ की गईं जिनके लिए राष्ट्रपति लुंगु ने आभार व्यक्त किया। इन में लघु और मझौले उद्योगों को बढ़ावा देने, ज़ाम्बिया में कृषि को बढ़ावा देने के लिए एक सौ सौर सिंचाई पम्प देने,ज़ाम्बिया की वायु सेना के अड्डों पर तैनाती के लिए पाँच अग्निश्मन निविदाएँ और मानवीय सहायता के लिए1000 एमटी चावल और 100 एमटी दूध पाउडर दिए जाने की घोषणा भी शामिल है। इन घोषणाओं से पता चलता है कि ज़ाम्बिया के विकास और वृद्धि के लिए भारत लगातार प्रतिबद्ध है।

व्यापार और निवेश द्विपक्षीय सहयोग का अहम हिस्सा है। दोनों नेताओं ने व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने और इनमें विविधता लाने पर बल दिया। द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ा है और 2018-19 में कुल 830मिलियन अमरीकी डॉलर का व्यापारहुआ लेकिन इसमें ज़ाम्बिया से किए गए निर्यात का हिस्सा अधिक है। ज़ाम्बिया में खनन, अवसंचरना, विनिर्माण और औषधि तथा कृषि में भी धीरे-धीरे भारत का निजी निवेश बढ़ा है। भारत और ज़ाम्बिया के बीच वर्तमान मज़बूत द्विपक्षीय संबंध ज़ाम्बिया के राष्ट्रपति की यात्रा से निश्चित तौर पर और प्रगाढ़ हुए हैं।

आलेख- डॉ. निवेदिता रे, अफ़्रीका के सामरिक मामलों की विश्लेषक

अनुवाद- नीलम मलकानिया