भारत-रूस रणनीतिक साझीदारी

विश्व व्यवस्था की बदलती गतिशीलता में भारत और रूस की 20 वीं वार्षिक शिखर बैठक  विशेष, समय की कसौटी पर परखी और रणनीतिक साझेदारी का प्रमाण थी। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुदूर पूर्व के व्लादिवोस्तोक में पांचवें पूर्वी आर्थिक फोरम में भाग लेने के लिए दो दिवसीय यात्रा की और साथ ही उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ वार्षिक शिखर बैठक भी की।

आर्थिक फोरम के कार्यक्रम में  भारत ने अपनी एक्ट फॉर इस्ट नीति का शुभारम्भ किया, जिसे भारत की आर्थिक कूटनीति जारी रखने के तौर पर देखा जा सकता है। प्रधानमंत्री ने एक अरब अमरीकी डॉलर की ऋण सुविधा देने की घोषणा इस संसाधन-समृद्ध क्षेत्र के विकास के लिए की। यह नीति भारत को इस क्षेत्र में अधिक निवेश और सहयोग करने में मदद करेगी। भारत हीरा, कोयला और सोना खनन क्षेत्र में निवेश कर रहा है। दोनों देशों के सम्बंधों को सहयोग के सभी संभावित क्षेत्रों में अद्वितीय, गोपनीय और आपसी और  स्वाभाविक रूप से लाभप्रद होने की बात कही गयी है ’।

इसके अलावा भारत और रूस को  समान सभ्यतागत मूल्य,  समय परख मित्रता, आपसी समझ, विश्वास, साझा हितों के साथ ही विकास के बुनियादी मुद्दों के लिए समान दृष्टिकोण और आर्थिक प्रगति ने वैश्विक और क्षेत्रीय दोनों स्तरों पर करीब आने में मदद की है। दोनों नेताओं के बीच चर्चा के दौरान शंघाई सहयोग परिषद मुख्य मुद्दा रहा।

दोनों देशों को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था उनकी पृष्ठभुमि में, वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान, दोनों नेताओं ने कुछ सर्वश्रेष्ठ राजनीतिक सुझबुझ भरे कामों का भी उल्लेख किया। इसमें देश के आंतरिक मुद्दे पर भारत की सीमा से लगते पड़ोसी देशों द्वारा बनाई गई गलत छवि की बात भी शामिल रही। भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित इस मुद्दे पर भी रूस का स्पष्ट समर्थन मिला था, उसका कहना था कि अनुच्छेद 370 को हटाना भारत का आंतरिक मामला है।

दोनों नेताओं ने 20 वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में  व्यापार, रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा और समुद्री संपर्क क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के नए क्षितिज खोजने पर ध्यान केंद्रित किया। आर्थिक मोर्चे पर, राष्ट्रपति पुतिन ने वार्षिक व्यापार में 17 प्रतिशत की वृद्धि पर संतोष व्यक्त किया, जो 2018 में 11  अरब डॉलर तक पहुंच गया। दोनों नेताओं ने आर्थिक गतिविधियां और व्यापार बढाने के लिए मजबूत, बहुमुखी व्यापार और आर्थिक सहयोग को एक नींव के रूप में प्राथमिकता दी।  “मेक इन इंडिया” कार्यक्रम में रूस की भागीदारी और रूस की निवेश परियोजनाओं में भारतीयों की भागीदारी बढाने पर चर्चा की गई।

ऊर्जा क्षेत्र में, वर्तमान में चलाई जारी रही सभी उर्जा गतिविधियों की प्रशंसा करते हुए, भारत और रूस अपतटीय क्षेत्रों सहित दोनों देशों में मौजूद तेल और गैस क्षेत्रों के भूवैज्ञानिक अन्वेषण और इनके संयुक्त विकास में सहयोग बढाने के लिए प्रतिबद्द हैं। दोनों देश रूस से भारत की ऊर्जा आवश्यकता लम्बे समय तक पूरी करने सहमत हुए, जिसमें आर्कटिक में उत्तरी समुद्री मार्ग भी शामिल है। भारत आर्कटिक में रूस के साथ सहयोग का इच्छुक है। 2019-2024  के लिए दोनों देशों ने हाइड्रोकार्बन में सहयोग को लेकर एक योजना पर हस्ताक्षर किए। उम्मीद है कि ऊर्जा क्षेत्र अगले पांच वर्षों में नई ऊंचाइयों को छुएगा। आने वालें 20 साल में परमाणु क्षेत्र में रूसी-डिज़ाइन की 12 और बिजली इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।

अंतरर्राष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) पर भी चर्चा हुई। डिजिटल प्रौद्योगिकियों और उपग्रह नेविगेशन को परिवहन प्रक्रिया में शामिल किये जाने के बारे में जानकारी देने के अलावा  इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़ कामकाज़ पर ध्यान दिया गया है। चेन्नई और व्लादिवोस्तोक के बीच एक नया संपर्क मार्ग बनाने की बात कही गयी, जो आर्थिक और व्यापारिक निवेश में वादा निभाने के रूप में देखा जा रहा है। रक्षा क्षेत्र की एक बड़ी सफलता ये है कि प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण और संयुक्त उद्यमों की स्थापना के तहत भारत रूसी सैन्य उपकरणों के लिए स्पेयर पार्ट्स और घटकों का निर्माण शुरू करेगा। दोनों देश पारस्परिक सामरिक सहयोग के लिए एक रूपरेखा तैयार करने पर भी सहमत हुए। अंतरिक्ष की बात करे तो भारत ने घोषणा की है कि गगनयान मानव मिशन के लिए भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को रूस में प्रशिक्षित किया जाएगा। सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के सम्बंधों पर महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के अवसर पर रूस में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया गया था।

कुल मिलाकर, वार्षिक शिखर सम्मेलन और पांचवीं पूर्वी आर्थिक फोरम को एक बड़ी सफलता कहा जा सकता है जो सभी क्षेत्रों में नए विकास के साथ आगे बढ़ रही है और इसमें नई एक्ट फार इस्ट नीति की शुरुआत भी शामिल है।

आलेख: डॉ। इंद्राणी तालुकदार, रूस मामलों की रणनीतिक विश्लेषक

अनुवाद एवं स्वर वीरेन्द्र कौशिक