हमारे बारे में

1939 में ऑल इंडिया रेडियो ने द्वितीय विश्व युद्ध आरंभ होने के बाद मित्र राष्ट्रों के प्रचार के लिए विदेशी भाषा में प्रसारण की शुरुआत की । तत्कालीन भारत के उत्तर-पश्चिमी सीमांत प्रांत में बी.बी.सी. के सहयोगी के तौर पर जर्मनी के प्रचार युद्ध का जवाब देते हुए पश्तो भाषा में प्रसारण शुरु किया गया । जैसे-जैसे क्षेत्र मे लड़ाई ज़ोर पकड़ती गई वैसे-वैसे और विदेशी भाषाएं भी जुड़ती गईं ।

जब द्वितीय विश्व युद्ध की चपेट में दक्षिण पूर्व तथा पूर्वी एशिया भी आया तो उन इलाकों के लिए भी विदेशी भाषाओं में प्रसारण शुरु किया गया । 1945 आते-आते विदेश प्रसारण प्रभाग 22 भाषाओं में प्रसारण कर रहा था । स्वतंत्रता के नव-विहान के साथ ही विदेश प्रसारण प्रभाग एक नए अवतार में, एक उभरते हुए राष्ट्र की आवाज़ बन कर सामने आया, जिसे लोक-राजनय के प्रभावी औज़ार तथा संकट काल में कुशल प्रचार तंत्र की भूमिका भी निभानी थी ।

आज आकाशवाणी की विदेश प्रसारण प्रभाग सेवा 27 भाषाओं में प्रसारण करती है और पहुँच एवं दायरे के नज़रिए से दुनिया की विदेश प्रसारण सेवाओं में प्रमुख स्थान रखती है । मीडियम तथा शार्ट वेव सेवाओं के माध्यम से इसकी पहुँच 150 देशों तक है । और हाल ही में प्रारंभ की गई इस वेबसाइट airworldservice.org तथा मोबाइल ऐप के माध्यम से इसे वैश्विक पहचान मिल रही है ।

अपनी विदेश प्रसारण सेवा के माध्यम से आकाशवाणी का लक्ष्य दुनिया भर में फैले श्रोताओं को भारतीय मूल्यों से परिचित कराते हुए विभिन्न मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण की जानकारी देना है । साथ ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत की प्रगति, भारत की लोकतांत्रिक एवं धर्म निरपेक्ष परम्पराओं, कला, संस्कृति, संगीत, अर्थव्यवस्था और भारत में विद्यमान व्यापारिक अवसरों की जानकारी देना भी इसका लक्ष्य है । भारत को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा पर्यटक-आकर्षणों के केंद्र के तौर पर दुनिया के सामने रखते हुए मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा में भारत की आस्था का परिचय देना भी विदेश प्रसारण प्रभाग का दायित्व है । जिन देशों में भारत वंशियों की तादाद काफ़़ी है उन देशों की जनता को भारत से जोड़ने में भी विदेश प्रसारण प्रभाग महत्वपूर्ण  भूमिका निभाता है । कई देशों में ऐसे भारतीय बसे हुए हैं जिन्होंने बेहतर जीवन की तलाश में दशकों पहले अथवा उनके पूर्वजों ने सदियों पहले भारत छोड़ा था और अब वो अपने मूल देश के बारे में जानने को काफ़ी उत्सुक रहते हैं । विदेश प्रसारण प्रभाग जिन 27 भाषाओं में प्रसारण करता है उनमें से 14 भाषा सेवाएं भारत के पड़ौस में फैले भारतीय उपमहाद्वीप के देशों को लक्ष्य करती हैं ।

विदेश प्रसारण प्रभाग से प्रसारित कार्यक्रमों में समाचार बुलेटिन, सामयिक विषयों पर वार्ता, भारतीय समाचार पत्रों की समीक्षा के साथ ही ज्ञानवर्धक वार्ताओं, साक्षात्कार, डाक्यूमेंटरी, फीचर, रेडियो नाटक तथा भारतीय संगीत की प्रत्येक विद्या को स्थान दिया जाता है।

हाल के वर्षों में विदेश प्रसारण प्रभाग ने आधुनिकीकरण की दिशा में नई पहल करते हुए मल्टीमीडिया वेबसाइट और मोबाइल एप का शुभांरभ किया है ताकि श्रोताओं और पाठकों तक पहुँच और आसान हो जाए । सभी सेवाओं के लिए कार्यक्रमों की नई अवधारणाएं तैयार की गई हैं । विषयवस्तु को श्रोताओं के करीब ले जाने के लिए और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न सोशल मीडिया मंचों का प्रयोग पूरी कुशलता से किया जा रहा है । विदेश प्रसारण प्रभाग सेवा को और सार्थक बनाने के लिए विदेश मंत्रालय सहित कई भागीदारों का सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है । दुनिया भर के देशों के बीच भारत का बढ़ता कद और उसकी जीवंतता आज विदेश प्रसारण सेवा की भूमिका को और भी महत्वपूर्ण बनाते हैं । विदेशों में हिंदी भाषा को प्रोत्साहित और प्रचारित करने के लिए विदेश प्रसारण प्रभाग ने चीनी, रुसी, फ़ारसी और अरबी भाषाओं की सेवाओं में हिंदी शिक्षण की पाठ माला शुरु की है ।  ये कार्यक्रम लोकप्रिय हो रहे हैं और श्रोताओं की अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है । विदेश प्रसारण प्रभाग भविष्य में भी अपने प्रयास जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है ।

 हिन्दी सेवा का शुभारंभ पचास के दशक  में हुआ ।  हिन्दी सेवा से प्रतिदिन पाँच प्रसारण होते हैं और हमारा लक्ष्य क्षेत्र मुख्यतः दक्षिण पूर्व व पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया व खाड़ी देश, मॉरिशस, फ़िजी, इंग्लैण्ड, मध्ययूरोप और भारतवंशी आबादियों वाले इलाक़े हैं । हमारे प्रसारण इस वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं ।