09.10.2019

आज के समाचार पत्रों ने विभिन्न विषयों पर संपादकीय टिप्पणियाँ की हैं, वहीं समाचार पत्रों की सुर्खियां भी ध्यान आकर्षित करती हैं |

विजय पर्व पर शक्ति और शौर्य की उड़ान, देश को मिला पहला राफ़ाल अमर उजाला सहित सभी अख़बारों की प्रमुख ख़बर है। नवभारत टाइम्‍स ने लिखा है- तूफ़ान कहलाने वाले राफ़ाल की फ्रांस में शस्‍त्र पूजा के बाद रक्षामंत्री ने 35 मिनट तक उड़ान भरी। हर नागरिक एक बुराई दूर करने की पहल करे और देशहित में अपने संकल्‍प को आंदोलन बनाये- विजय दशमी पर प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी का यह संबोधन हिन्‍दुस्‍तान की सुर्खी है।  जनसत्‍ता ने राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ प्रमुख के इस बयान को अहमियत दी है- लिंचिंग पश्चिमी तरीक़ा, भारत को बदनाम न करें। हिन्‍दुस्‍तान के आर्थिक पन्‍ने की ख़बर है- वित्‍त मंत्रालय ने तीन सरकारी साधारण बीमा कंपनियों के विलय का प्रस्‍ताव कैबिनेट की मंज़ूरी के लिए भेजा, पत्र का कहना है- विलय से मज़बूत बीमा कंपनी बनेगी। दैनिक भास्‍कर की ख़ास ख़बर है- यात्री बड़े रेलवे स्‍टेशनों पर ब्‍लड प्रेशर, बॉडी मास इंडेक्‍स समेत 16 टैस्‍ट 50 रूपये में करा सकेंगे। रिपोर्ट सिर्फ़ दस मिनट में, लखनऊ और दिल्‍ली में लग चुकी हैं मशीनें।

हिन्दी दैनिक जनसत्ता “क़ामयाबी और चुनौती” शीर्षक से अपने संपादकीय में लिखता है कि आख़िरकार भारत को अपने कुछ नागरिकों के स्विस बैंक खातों तक पहुँचने में क़ामयाबी मिल गई | सरकार लंबे समय से इस क़वायद में लगी थी कि स्विस खाताधारकों का ब्योरा पता चले और कालेधन के खिलाफ़ मुहिम ज़ोर पकड़ सके | लेकिन ये सारी जानकारियाँ गोपनीय बनी रहेंगी, क्योंकि स्विस सरकार ने इस तरह की सूचनाओं का लेनदेन गोपनीयता की शर्तों के साथ किया है, किसी भी खाताधारक का नाम उजागर नहीं होगा |  ऐसे में आमजन के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि अगर सब गोपनीय ही बना रहेगा तो देश को उन लोगों के बारे में कैसे पता चलेगा जो कालेधन के कारोबार में लिप्त हैं और देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाने में लगे हैं | अभी जिन लोगों के खातों की ख़बर भारत को मिली है, उनमें ज़्यादातर प्रवासी भारतीय और बड़े कारोबारी हैं | इनमें कई तो दूसरे देशों में बस चुके हैं | इसके अलावा क़रीब सौ ऐसे खातों की जानकारी भी दी है जो खाताधारकों ने पिछले साल बंद करा दिये थे, ताकि किसी भी कार्रवाई से बचा जा सके |  

हिन्दी दैनिक नवभारत टाइम्स “मॉब लिंचिंग पर चिंता” राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि मॉब लिंचिंग एक पश्चिम निर्मित है, देश को बदनाम करने के लिए भारत के संदर्भ में इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। विजयादशमी के मौक़े पर नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ‘लिंचिंग’ शब्द की उत्पत्ति भारतीय लोकाचार से नहीं हुई। इस तरह की घटनाओं से संघ का कोई लेना-देना नहीं है और इन्हें रोकना हर किसी की ज़िम्मेदारी है। क़ानून-व्यवस्था की सीमा का उल्लंघन कर हिंसा की प्रवृत्ति समाज में परस्पर संबंधों को नष्ट कर अपना प्रताप दिखाती है। यह प्रवृत्ति हमारे देश की परंपरा नहीं है, न ही हमारे संविधान में यह है । कितना भी मतभेद हो, क़ानून और संविधान की मर्यादा में रहें। संघ प्रमुख ने जो कहा है वह अपनी जगह सही है। भारतीय संस्कृति और परंपरा में ऐसे कृत्यों के लिए कोई स्थान नहीं है, न ही वह इनको किसी तरह से जायज़ ठहराती है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि भारतीय समाज इधर इस बीमारी से ग्रस्त हो गया है। मॉब लिंचिंग की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। लोग जिस तरह की क्रूरता दिखा रहे हैं वह किसी भी सभ्य समाज के लिए चिंता की बात होनी चाहिए। पिछले दिनों मध्य प्रदेश के शिवपुरी ज़िले में भीड़ ने एक दबंग परिवार के उकसावे पर दो बच्चों को खुले में शौच करने के कारण पीट-पीटकर मार डाला। इसी तरह झारखंड के खूंटी ज़िले में गोहत्या के शक़ में भीड़ ने एक अपाहिज को मार डाला। कुछ दिनों पहले बच्चा चोरी के शक़ में देश के कई इलाकों में लोगों पर हमले हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं कई बार मॉब लिंचिंग की कड़ी निंदा कर चुके हैं और राज्य सरकारों से ऐसी घटनाओं के खिलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने को कह चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर कड़ी टिप्पणी की है।

आलेख – हिन्दी एकांश, विदेश प्रसारण प्रभाग