22.10.2019

राजधानी दिल्ली से प्रकाशित समाचार पत्रों ने अलग-अलग विषयों को अपने सम्पादकीय में शामिल किया है। साथ ही समाचारों की सुर्खियों ने भी प्रमुख पृष्ठ पर स्थान पाया है। विधानसभा चुनाव के मतदान के बाद एक्जिट पोल के पूर्वानुमानों के मुताबिक हरियाणा और महाराष्‍ट्र में भाजपा की जीत अधिकतर अख़बारों ने प्रमुखता से दी है। जनसत्‍ता की सुर्खी है – बड़ी जीत संग भाजपा की वापसी का अनुमान। दैनिक जागरण मताधिकार शीर्षक से लिखता है-हरियाणा में घूंघट की ओट लेकर निकले, महिलाओं के उम्‍मीदों भरे क़दम । करतारपुर कॉरिडोर के संचालन के लिए पाकिस्‍तान के साथ समझौते पर हस्‍ताक्षर करने को अधिकतर अख़बारों ने मुख पृष्‍ठ पर दिया है। राष्‍ट्रीय सहारा की सुर्खी है – करतारपुर पर 23 को समझौते पर हस्‍ताक्षर करेंगे भारत-पाक। हिन्‍दुस्‍तान लिखता है – करतारपुर पर पाक से कल होगा करार। पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने से दिल्‍ली में हवा प्रदूषित होने की ख़बर कुछ अख़बारों ने प्रमुखता से दी है। नवभारत टाइम्‍स लिखता है – हवाओं का रुख बदला, दिल्‍ली की हवा में मिला पराली का धुआं। हिन्‍दुस्‍तान की सुर्खी है – 29 अक्‍तूबर से 15 दिन तक हवा दम घोंटू रहेगी। दुनिया का सबसे ऊंचा युद्ध क्षेत्र सियाचिन पर्यटकों के लिए खोलने की ख़बर राजस्‍थान पत्रिका ने मुख पृष्‍ठ पर दी है। पत्र लिखता है पर्यटकों के लिए भी खोला गया सियाचिन ग्‍लेशियर।
87 साल पहले आए कुम्‍हारों ने मुंबई के धारावी को सबसे बड़ा दीया बाज़ार बनाया। दैनिक भास्‍कर पॉजिटिव शीर्षक से लिखता है – दुनिया की सबसे बड़ी झुग्‍गी-बस्‍ती में बनते हैं 10 करोड़ दीये।

भारत का जवाब” शीर्षक से राष्ट्रीय सहारा का लिखना है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भारतीय सेना की कार्रवाई की जो तस्वीरें आई हैं, उनसे साफ है कि तबाही उससे ज़्यादा है, जितनी कल्पना की गई थी। पाकिस्तान की तिलमिलाहट यूं ही नहीं है। भले वह एक सैनिक के मरने और एक नागरिक के घायल होने की बात कर रहा है, लेकिन उस पार से आ रही ख़बरों में स्थानीय लोग कह रहे हैं कि ऐसा लग रहा था, मानो भारत सब कुछ तबाह कर देगा। वास्तव में पाकिस्तान का चरित्र सच को नकारने का है। वह तो नौ भारतीय सैनिकों को मार डालने तक का दावा कर रहा है। इससे बड़ा सफेद झूठ कुछ नहीं हो सकता है। सच यही है कि भारतीय सेना ने तंगधार सेक्टर में सीमा पार से गोलीबारी करते हुए आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की कोशिशों को भांपकर बड़ी कार्रवाई की है। पाकिस्तानी गोलाबारी में दो सैनिकों के शहीद हो जाने और एक नागरिक के मारे जाने के बाद आक्रोशित सेना ने तोप का मुंह उस ओर कर दिया और इस तरह गोले बरसाए कि पाकिस्तान को संभलने का भी मौका नहीं मिला। कम से कम तीन आतंकवादी शिविर, चार लॉन्चिंग पैड नष्ट हुए और कुछ सैन्य ठिकानों को नुकसान हुआ है। पाकिस्तान 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, उसके बाद इस वर्ष की हवाई बमबारी और वर्तमान कार्रवाई के बावजूद बदले हुए चरित्र वाले दृढ़ निश्चयी भारत को समझ नहीं पा रहा है, तो समस्या उसकी है। उसके पास एक ही विकल्प है, वह जम्मू-कश्मीर में अशांति और हिंसा फैलाने का इरादा त्याग दे। अगर वह ऐसा नहीं करता और आतंकवाद को नीति के तहत प्रयोजित करना जारी रखेगा तो उसे इतनी क्षति उठानी पड़ेगी, जिसकी भरपाई उसके लिए कतई संभव नहीं होगी।

दैनिक भास्कर “देश में बदलाव के साथ बढ़ती सामूहिक सकारात्मकता” शीर्षक से अपने सम्पादकीय में लिखता है कि धान की बालियां काटने के बाद बची पराली (डंठल) वाले खेतों में कृषि में उन्नत पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान आग लगा देते है। नतीजतन, दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र के करीब तीन करोड़ लोग ख़तरनाक प्रदूषणमें सांस लेने को मजबूर हो जाते हैं। किसानों के पास विकल्प उपलब्ध है- ट्रैक्टर में रोटरवेलर लगाकर उसे खेत में ही दबा देने का और एक हल्का पानी देकर उसे बेहतरीन खाद में तब्दील करने का। किंतु शायद आर्थिक कारणों से किसान जलाने की आदत पर टिका हुआ है, जबकि आग से खेत की जमीन की नमी लगभग ख़त्म हो जाती है। सरकार की दंडात्मक और प्रोत्साहन योजनाएं भी बहुत सफल नहीं रह पाईं, क्योंकि समृद्ध किसान वोटबैंक भी है। बहरहाल, देश के प्रमुख उद्योग और वाणिज्य संगठन (सीआईआई) ने फैसला किया है कि बड़े औद्योगिक समूह सौ-सौ गांवों को गोद लेंगें और उन्हें मशीनें उपलब्ध कराएंगे और आर्थिक मदद भी करेंगें। अगर छोटी सी तकनीकी के प्रयोग से बड़ा परिवर्तन संभव है तो क्या यह देश में नया संकेत नहीं हैं? अगर आप हाल में कुछ प्रमुख ट्रेनों में सफर करें तो उनमें बायो-टॉयलेट लगाया गया है, जिससे बदबू नहीं आती। टॉयलेट का दरवाजा खोलिए तो एक आग्रह सुनाई देता है यह बायो-टॉयलेट है, कृपया इसमें बोतल या कोई सामन न फेंकें और इस्तेमाल के बाद फ्लश चला दें। धर्म के नाम पर तलवारें तानने और जातिवाद पर भौहें चढ़ाने की जगह बदलते भारत में इस आग्रह को अब लोग मानने लगें हैं।