23.10.2019

राजधानी से प्रकाशित आज के हिंदी समाचार पत्रों ने विभिन्न विषयों को संपादकीय में शीर्षक बनाया है। इसके अतिरिक्त अन्य समाचारों ने भी प्रमुख पृष्ठ पर स्थान पाया है।
सोशल मीडिया के लिए आधार जरूरी या नही, तय करेगा सुप्रीमकोर्ट- यह खबर लगभग सभी अखबारों ने सुर्खियों में दी है। राजस्‍थान पत्रिका लिखता है- आधार लिंक के सभी मामले सुप्रीमकोर्ट में ट्रांसफर, तीन महीने में नये नियम बनेंगे। केन्‍द ने कहा- सरकार का प्रयास गोपनीयता भंग करना नहीं, देश की सुरक्षा मजबूत करना है।

नोबेल पुरस्‍कार के लिए चयनित अर्थशास्‍त्री अभिजीत बनर्जी की प्रधानमंत्री से मुलाकात की खबर भी लगभग सभी अखबारों के पहले पन्‍ने पर है। इकोनॉमिक टाइम्‍स ने उनके चित्र सहित लिखा है- अनोखी मुलाकात में गवर्नेंस पर हुई चर्चा, बनर्जी ने प्रधानमंत्री को अनूठी सोच वाला बताया।

जम्‍मू कश्‍मीर और लद्दाख के सरकारी कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ मिलने की खबर सभी अखबारों ने दी है।

पाकिस्‍तान की ओर से आतंकियों की घुसपैठ की कोशिश और संघर्षविराम का उल्‍लंघन करने को अखबारों ने पहले पन्‍ने पर अहमियत दी है।

हिन्‍दुस्‍तान की खबर है- सरकार ने तोहफे की सीमा में तीन गुना बढ़ोतरी की। केन्‍द्रीय कर्मचारी पांच हजार तक का उपहार स्‍वीकार कर सकते हैं।

जापान के सम्राट के राज्‍याभिषेक के चित्र दैनिक ट्रिब्‍यून ने पहले पन्‍ने पर दिये हैं।

बादशाहत की चमक नाम से अपने संपादकीय लेख में नवभारत टाइम्स का लिखना है कि टीम इंडिया ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 3-0 से जीत हासिल कर देशवासियों को दीवाली को तोहफा दिया और दुनिया के टेस्ट क्रिकेट परिदृश्य में अपना मुकाम थोड़ा और ऊंचा कर लिया। मंगलवार को रांची टेस्ट के चौथे दिन भारत ने साउथ अफ्रीका को पारी और 202 रनों से हरा दिया। साउथ अफ्रीका के खिलाफ यह भारत की सबसे बड़ी जीत है। इस शानदार जीत के साथ ही भारत ने घरेलू सरजमीं पर लगातार सबसे ज्यादा टेस्ट सीरीज जीतने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। भारतीय टीम ने एमएस धोनी, अजिंक्य रहाणे और विराट कोहली की कप्तानी में अब तक घरेलू सरजमीं पर कुल 11 सीरीज जीती हैं। इस क्रम में उसने ऑस्ट्रेलिया को पीछे छोड़ दिया है, जिसने दो बार 10-10 टेस्ट सीरीज लगातार अपने देश में जीती हैं।

भारत ने इस श्रृंखला का पहला टेस्ट 203 रन से और दूसरा पारी और 137 रन से जीता था। तीनों मैचों में साउथ अफ्रीकी टीम एकदम बेदम नजर आई। भारतीय खिलाड़ी खेल के हर विभाग में हावी रहे। सीरीज विजय में सबसे उल्लेखनीय भूमिका भारत के पेस अटैक की रही। अब तक भारतीय माहौल में स्पिनर्स को ही भारत की असली ताकत माना जाता था। हर मेहमान टीम नेट पर स्पिन प्रैक्टिस ही ज्यादा करती थी, क्योंकि यह मानकर चलती थी कि फिरकी के जाल से बचना ही उसके सामने मुख्य चुनौती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भारतीय पेसर्स की नई खेप ने दुनिया को चकित कर दिया है। आज देश के पास एक से एक शानदार तेज गेंदबाज हैं जो हर कंडीशन में एक लय में गेंदबाजी कर सकते हैं और जरूरत के मुताबिक अपनी शैली बदल भी सकते हैं।

दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज जुबैर हमजा ने स्वीकार किया कि वे स्पिनरों के खिलाफ रणनीति बनाकर आए थे, पर उन्हें तेज गेंदबाजों से कड़ी चुनौती मिली। पिछले दिनों वेस्टइंडीज के पूर्व बल्लेबाज ब्रायन लारा ने टीम इंडिया के पेस अटैक की जमकर तारीफ की और कहा कि इसको देखकर उन्हें 80 के दशक का कैरीबियाई तेज गेंदबाजी आक्रमण याद आ जाता है। सबसे बड़ी बात यह रही कि इस टीम में ईशांत शर्मा को छोड़कर बाकी पेसर ज्यादा अनुभवी नहीं थे, फिर भी उन्होंने जबर्दस्त धार दिखाई। बल्लेबाजी में भी हर स्तर पर मजबूती दिखी।

इस सीरीज से सलामी बल्लेबाज की भूमिका शुरू करने वाले रोहित शर्मा ने तीन टेस्ट में 529 रन जोड़े। मयंक अग्रवाल ने भी एक दोहरा शतक और एक शतक जड़ा जिससे साफ है कि भारत को एक ताकतवर और भरोसेमंद सलामी जोड़ी मिल गई है। मिडल ऑर्डर में चेतेश्वर पुजारा, विराट कोहली और अजिंक्य रहाणे की तिकड़ी मजबूत है। अच्छे स्पिनर्स का जुड़ना लगातार जारी है। शाहबाज नदीम ने अपने पहले ही टेस्ट में सबका ध्यान खींचा है। विराट कोहली की कप्तानी की चमक थोड़ी और बढ़ी है। खिलाड़ियों को एकजुट रखने और नई चुनौतियों के लिए उन्हें तैयार करने में फिलहाल वे दुनिया के सभी कप्तानों में अव्वल हैं।

करतारपुर का रास्ता नामक संपादकीय में जनसत्ता का कहना है कि तमाम विवादों और सहमति-असहमति के बीच करतारपुर साहिब गुरद्वारे तक श्रद्धालुओं की पहुंच के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला समझौता दोनों देशों के रिश्तों में नए युग की शुरुआत से कम नहीं माना जाना चाहिए। करतारपुर गलियारे का रास्ता खुलना और इसके लिए पाकिस्तान के साथ होने वाला समझौता दोनों देशों के बीच जमी बर्फ को पिघलाने का काम कर सकता है। लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में जो तनाव बना हुआ है, उस स्थिति में यह समझौता होना बड़ी बात है। हालांकि इस समझौते के साथ भारत ने पाकिस्तान से यह उम्मीद की थी कि वह हर तीर्थयात्री से बीस डॉलर का सेवा शुल्क लेने का फैसला टाल दे। लेकिन पाकिस्तान इस शुल्क को लेने पर अड़ा हुआ है। इससे हर श्रद्धालु पर करीब डेढ़ हजार रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। वैसे इस मौके पर पाकिस्तान थोड़ी-सी दरियादिली दिखाए और इस शुल्क को वापस ले ले तो इससे उसका कोई बहुत भारी नुकसान नहीं होने वाला है, बल्कि सिख समुदाय और भारत के मन में उसके प्रति एक जगह ही बनेगी। यह कोई कारोबारी समझौता तो है नहीं जिसमें नफा-नुकसान देखा जाए, बल्कि धार्मिक पर्यटन के तहत रियायत दी जा सकती है। लेकिन भारत ने फिलहाल अपनी ओर से इसे कोई ऐसा मुद्दा नहीं बनाया है जिससे कि समझौते के रास्ते में कोई बाधा पैदा हो।

कश्मीर सहित कई मुद्दों को लेकर समय-समय पर भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते नाजुक दौर में पहुंचते रहे हैं। करगिल युद्ध से ठीक पहले दोनों देशों के बीच लाहौर-दिल्ली बस सेवा शुरू हुई थी। उसके बाद मुनाबाव-खोखरापार रेल लिंक और श्रीनगर-मुजफ्फराबाद बस सेवा के लिए समझौता हुआ था। लेकिन इस साल पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से रिश्तों में सुधार की सारी उम्मीदें छोड़ दी थीं। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने के बाद से तो दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात बन गए और पाकिस्तान ने परमाणु युद्ध तक की धमकी दे डाली। लेकिन इतना सब होते हुए भी अगर पाकिस्तान ने भारतीय सिखों के लिए करतारपुर साहिब गलियारे का रास्ता खोला है तो इससे काफी उम्मीदें बनती हैं।