स्वीडेन के शाही जोड़े की भारत यात्रा

स्वीडन के शाही जोड़े किंग कार्ल सोलहवें गुस्ताफ और रानी सिल्विया की पांच दिवसीय भारत यात्रा हाल ही में सम्पन्न हुई। स्वीडन के विदेश मंत्री एन लिंडे और व्यापार मंत्री इब्राहिम बेअलान भी इस राजकीय यात्रा में उनके साथ थे। उच्चस्तरीय शिष्टमंडल में लगभग 50 स्वीडिश कंपनियों और स्टार्ट-अप के प्रतिनिधि भी शामिल थे। यह 1993 और 2005 के बाद स्वीडिश किंग की तीसरी भारत यात्रा थी। यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की 2015 में स्वीडन की यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच यह चौथा उच्च स्तरीय राजनीतिक आदान-प्रदान था। वर्षों से जारी उच्चस्तरीय बातचीत के चलते भारत-स्वीडन के संबंधों को एक नया आयाम मिला है। 

 

किंग गुस्ताफ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। उन्होंने इनोवेशन पॉलिसी पर भारत-स्वीडन उच्च-स्तरीय नीति संवादका उद्घाटन किया। संवाद में प्रतिभागियों ने टिकाऊ विकास की चुनौतियों से निपटने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए सस्ती, स्केलेबल प्रौद्योगिकियों को खोजने के लिए भविष्य में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया। स्वीडिश किंग ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की, जिसके बाद दोनों पक्षों ने तीन समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। स्वीडिश एनर्जी एजेंसी और भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के बीच सहयोग पर हस्ताक्षर किए गए। ध्रुवीय विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग पर स्वीडन के शिक्षा और अनुसंधान मंत्रालय तथा भारत के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के बीच एक अन्य समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। तीसरे एमओयू पर हस्ताक्षर समुद्री वातावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया गया था। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), भारत और स्वीडिश अनुसंधान परिषद भारत-स्वीडिश संयुक्त नेटवर्क अनुदान पुरस्कार के तहत कंप्यूटर विज्ञान और सामग्री विज्ञान के क्षेत्र में 20 द्विपक्षीय परियोजनाओं को वित्तपोषित करेंगे।

 

इस कार्यक्रम के लिए स्वीडिश रिसर्च काउंसिल 2 वर्षों के लिए 14 मिलियन SEK (लगभग 10 करोड़ 51 लाख रुपये) की फंडिंग करेगी। दोनों देशों ने केटीएच रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और आईआईटी मद्रास के बीच ज्वाइंट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप की स्थापना की घोषणा की। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी स्वीडेन के शाही जोड़े द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा की। स्मार्ट ग्रिड के क्षेत्र में भारत-स्वीडिश सहयोगात्मक औद्योगिक अनुसंधान विकास कार्यक्रम और डिजिटल स्वास्थ्य के क्षेत्र में `संयुक्त कॉल की घोषणा 2020 में संयुक्त प्रस्तावों के तहत की जाएगी। स्वीडिश किंग ने भारत-स्वीडेन संवाद के अंतर्गत भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन से भी मुलाक़ात की। बातचीत में सर्कुलर अर्थव्यवस्था के माध्यम से उत्सर्जन को कम करने और वायु प्रदूषण से निपटने पर चर्चा हुई। स्टॉकहोम जाने से पहले स्वीडेन के शाही जोड़े ने उत्तराखंड और मुंबई का दौरा भी किया।

 

आर्थिक मोर्चे पर देखें तो यह उल्लेखनीय है कि भारत, स्वीडन का 19वां सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार है और एशिया में चीन और जापान के बाद तीसरा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है। द्विपक्षीय व्यापार की वृद्धि 2009-10 के 2 बिलियन अमरीकी डॉलर से बढ़कर 2014-15 में 2.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गई है। हालांकि, यह 5 बिलियन के लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका है, जिसे 2018 तक प्राप्त करने के लिए निर्धारित किया गया था। हालांकि इस संदर्भ में स्वीडिश निवेशों में वृद्धि एक सकारात्मक संकेत है। यह भी गौरतलब है कि कई स्वीडिश कंपनियां आज़ादी से पहले ही भारत आ गईं थीं। एरिक्सन, स्वीडिश मैच (WIMCO) और SKF 1920 के दशक से भारत में हैं। एटलस कोप्को, सैंडविक, अल्फा लवल, वोल्वो, एस्ट्रा ज़ेनेका आदि कंपनियों की भी भारत में उपस्थिति है। आईटी कंपनियों सहित लगभग 70 भारतीय कंपनियां वर्तमान में स्वीडन में मौजूद हैं।

 

भारत और स्वीडन दोनों लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करते हैं और आपसी हित के क्षेत्रों पर निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। स्वीडन और भारत के बीच आपसी हित और लाभों पर आधारित मजबूत सम्बन्धों की असीम संभावनाओं को कम करके नहीं आँका जा सकता है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक और राजनीतिक सक्रियता बढ़ी है। जलवायु परिवर्तन और अन्य वैश्विक स्थितियों के परिप्रेक्ष्य में दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण, वित्त पोषण और उपकरण, साइबर सुरक्षा और डिजिटल सहयोग, कृषि और जैव ईंधन जैसे सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान की आवश्यकता है। स्वीडिश रॉयल जोड़े की इस उच्च स्तरीय भारत यात्रा से समग्र रिश्तों में बदलाव की बड़ी संभावना है।

 

आलेख- डॉ संघ मित्रा सरमा, यूरोपीय मामलों के रणनीतिक विश्लेषक

अनुवाद/वाचन- देवेंद्र त्रिपाठी