ओमान में एक युग का अंत

दस जनवरी को ओमान के सुल्तान क़ाबूस बिन सईद अल सईद का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। इसके साथ ही एक युग का अंत हुआ। उन्होंने पाँच दशकों तक देश पर राज किया था। सुल्तान क़ाबूस का रुतबा बहुत बड़ा था और विश्व भर में उन्हें सम्मान मिला था। एक महत्त्वपूर्ण खाड़ी देश में अब सर्वोच्च पद पर बदलाव का दौर है।

79 वर्षीय सुल्तान ने क्षेत्र में प्रभावशाली देश सऊदी अरब और ईरान के बीच संतुलन बनाते हुए ओमान में स्थिरता और स्वतंत्र विदेश नीति का दौर आरम्भ किया। 1970 में एक अहिंसक तख्तापलट में अपने रूढ़िवादी पिता सईद बिन तैमूर का स्थान लेने वाले सुल्तान क़ाबूस ने दफ़र विद्रोहियों को समाप्त किया, दासता का अंत किया, ओमान को आधुनिक बनाते हुए 1996 में पहला लिखित संविधान पेश किया और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए राजनीति, कारोबार और खेलों में उन्हें प्रोत्साहित किया। आधुनिक ओमान के जनक को 2015 में ईरान परमाणु संधि में उनकी भूमिका और यमन में युद्धरत पक्षों को एकजुट करने के लिए की गई मध्यस्थता के लिए जाना जाता है। 

इस समय ओमान में स्वाभाविक उत्तराधिकारी के न होने की वजह से उनके उत्तराधिकारी को चुनने के लिए सामने आने वाली परेशानियों से छुटकारा मिल गया है क्योंकि परिवार समिति ने पूर्व सुल्तान की इच्छा का सम्मान करते हुए सुल्तान क़ाबूस के रिश्ते के भाई हैथम बिन तारिक़ सईद को चुना है जिन्होंने सल्तनत में संस्कृति और विरासत मंत्रालय की कमान संभालने से पहले ऑक्सफोर्ड में पढ़ाई की थी।  

नए सुल्तान को एक ऐसा देश मिल रहा है जहाँ सुल्तान क़ाबूस ने देश के प्रधानमंत्री, रक्षा और विदेश मंत्री तथा केन्द्रीय बैंक के गवर्नर के रूप में सभी दायित्व ख़ुद संभाले थे। उनके लिए पहले की तरह सारी ज़िम्मेदारियाँ संभालना और उतना ही सम्मान अर्जित करना आसान नहीं होगा। राज्य की कठिन वित्तीय स्थिति और बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी से नए सुल्तान को घरेलू स्तर पर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा जबकि क्षेत्रीय विरोधियों के बीच किसी एक का पक्ष लेने का बाहरी दबाव तटस्थ विदेश नीति बनाए रखने की उनकी वैचारिक क्षमता की परीक्षा होगी। लेकिन फिर भी ओमान के सुल्तान के तौर पर शपथ लेने के बाद हैथम बिन तारिक़ ने आश्वासन दिया कि वे देश को विकास की राह पर आगे ले जाते हुए सभी देशों के साथ मित्रतापूर्ण संबंध बनाए रखने की अपने पूर्वाधिकारी की नीतियों का पालन करते रहेंगे।

मस्कट ने क़ाबूस बिन सईद के शोक में तीन दिन का आधिकारिक शोक घोषित करते हुए बताया कि अगले चालीस दिन तक ध्वज आधा झुका रहेगा। अमरीका, ब्रिटेन, ईरान, सऊदी अरब, क़तर, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, मिस्र और बहरीन जैसे देशों ने एक कुशल राजनेता की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि सुल्तान क़ाबूस दुनिया और हमारे क्षेत्र के लिए शांति स्थापक थे तथा भारत के सच्चे मित्र थे। भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा कि सुल्तान क़ाबूस भारत के घनिष्ठ मित्र थे और दुनिया ने एक ऐसा राजनेता खो दिया है जिन्होंने दुनिया और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए अथक प्रयास किए।

भारत के गृह मंत्रालय ने घोषणा की थी कि भारत दिवंगत सुल्तान क़ाबूस बिन सईद अल सईद के सम्मान में 13 जनवरी को राष्ट्रीय शोक प्रकट करेगा। इस दौरान भारतीय राष्ट्रीय ध्वज भी दिन भर आधा झुका हुआ रहा। भारत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री, श्री मुख्तार अब्बास नक्वी भारत की ओर से 14 जनवरी 2020 को शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए मस्कट जाने वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। 

दिवंगत सुल्तान क़ाबूस की मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्होंने भारत और ओमान के बीच सक्रिय साझेदारी विकसित करने में मज़बूत नेतृत्व प्रदान किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने नए सुल्तान को बधाई देते हुए ये आशा व्यक्त की कि सुल्तान हैथम मौजूदा साझेदारी को और आगे ले जाने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेंगे। भारत और ओमान के दोस्ताना कूटनीतिक संबंध हैं और दोनों देशों के बीच प्राचीन काल से ही स्वाभाविक तौर पर व्यापार होता आया है। ओमान में आठ लाख से ज़्यादा भारतीय रहते हैं जो कमाई गई विदेशी मुद्रा भारत भेजते हैं। भारतीय कामगारों ने सल्तनत के सर्वांगीण विकास के लिए उल्लेखनीय योगदान किया है। भारत नए सुल्तान के नेतृत्व में ओमान के साथ नज़दीकी संबंध बनाए रखने और हर स्तर पर पहले की तरह सक्रियता बनाए रखने की कामना करता है।   

आलेख- डॉ. लक्ष्मी प्रिया, आईडीएसए, शोध विश्लेषक

अनुवाद- नीलम मलकानिया