18.03.2020

आज के समाचार पत्रों ने विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ने वाले कोरोना वायरस के प्रतिकूल प्रभाव को लेकर संपादकीय टिप्पणियाँ की हैं, कुछ समाचार पत्रों ने अन्य विषयों को भी अपने संपादकीय में स्थान दिया है, वहीं समाचार पत्रों की सुर्खियां भी ध्यान आकर्षित करती हैं |

कोरोना वायरस संक्रमण का मुक़ाबला करने के लिए पूरे देश में हो रहे एहतियाती उपाय और विश्‍व स्‍तर पर संक्रमण के प्रभाव को लगभग सभी अख़बारों ने बड़ी सुर्खियों में दिया है। हरिभूमि ने बॉक्‍स में लिखा है- देशभर में 57 हज़ार लोग निगरानी में हैं। अख़बारों ने नौसेना में पुरूषों और महिलाओं के साथ समान व्‍यवहार किये जाते हुए महिला अधिकारियों को स्‍थाई कमिशन देने के उच्‍चतम न्‍यायालय के फ़ैसले  को भी अहमियत दी है। संसद का बजट सत्र निर्धारित समय तीन अप्रैल तक ही चलने और कार्यवाही का पुनरनिर्धारण न होने के संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी का वक्‍तव्‍य भी सभी अख़बारों के मुखपृष्‍ठ पर दिया है।

ढीला न पड़े अर्थतन्त्र शीर्षक से प्रकाशित अपने संपादकीय में हिन्दी दैनिक नवभारत टाइम्स लिखता है कि देश में कोरोना वायरस से निपटने की तैयारी हर स्तर पर चल रही है। भारतीय अर्थव्यवस्था को इसके असर से बचाने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने कई क़दम उठाए हैं। सोमवार को उसने लांग टर्म रेपो ऑपरेशन (एलटीआरओ) का दायरा बढ़ाने का फ़ैसला  किया। एलटीआरओ एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत रिज़र्व बैंक विभिन्न बैंकों को एक से तीन साल के लिए वर्तमान रेपो रेट (5.15 प्रतिशत) पर कर्ज़ उपलब्ध कराता है। बदले में बैंक कोलैटरल के तौर पर अपने पास मौजूद पब्लिक सिक्युरिटीज़ यानी सरकारी बॉन्ड रिज़र्व बैंक के पास गिरवी रखते हैं। इस क़दम का उद्देश्य बैंकों को अपनी ब्याज दरें घटाने के लिए प्रेरित करना है। इसके पहले रिज़र्व बैंक चार बार, 17 फ़रवरी, 24 फ़रवरी, 1 मार्च और 9 मार्च को एलटीआरओ का संचालन कर चुका है। इस सस्ते फ़ंड के बल पर बैंकों ने अगर अपना कर्ज़ सस्ता किया तो बाज़ार में कुछ गति आ सकती है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि नए एलटीआरओ के ज़रिए कई हिस्सों में एक लाख करोड़ रुपये सिस्टम में डाले जाएंगे। इसके अलावा आरबीआई ने छह महीने तक दो अरब डॉलर की ख़रीद-बिक्री करने का फ़ैसला  किया है, जिसका मक़सद देश के विदेशी मुद्रा विनिमय बाज़ार में तरलता बनाए रखना और डॉलर की ज़रूरतों को आसान बनाना है। डॉलर के मुक़ाबले रुपये में जो तेज़ गिरावट देखी जा रही है, उस पर आरबीआई के इस क़दम से कुछ लगाम लगेगी। शक्तिकांत दास के मुताबिक देश के कई हिस्सों में नीलामी के ज़रिए डॉलर की ख़रीद-बिक्री (स्वैप) की जाएगी। कोरोना वायरस से इंडस्ट्री पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए सरकार ने सेक्टोरल पैकेज की तैयारी शुरू की है।

हिन्दी दैनिक हिंदुस्तान “बढ़ती चुनौतियां” शीर्षक से प्रकाशित अपने संपादकीय में लिखता है कि भले ही यह ख़बर किसी बडे़ ख़तरे की ओर इशारा न कर रही हो, लेकिन भारत में कोरोना वायरस से हुई तीसरी मौत यह तो बता ही रही है कि आशंकाएं अभी पूरी तरह से बरक़रार हैं। मंगलवार को एक 64 वर्षीय व्यक्ति का निधन मुंबई के कस्तूरबा अस्पताल में हुआ। इससे पहले दिल्ली में एक 68 वर्षीया महिला का निधन इसी संक्रमण के चलते हुआ था और उसके भी पहले कर्नाटक में 76 वर्षीय व्यक्ति का निधन इसी कारण से हुआ था। इन सभी मामलों में महत्वपूर्ण बात यही है कि कोरोना वायरस के तीनों ही शिकार 60 वर्ष से अधिक उम्र के थे। यानी वे उस उम्र के थे, जिन्हें इस संक्रमण से सबसे ज़्यादा ख़तरा रहता है। इस उम्र के लोगों की प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है और अक्सर शरीर किसी न किसी तरह की व्याधि से भी जूझ रहा होता है। भारत ही नहीं, दुनिया भर में भी इसी उम्र के लोग कोरोना वायरस का सबसे ज़्यादा शिकार बने हैं। ज़ाहिर है कि कोराना वायरस के संक्रमण को लेकर हमारी चुनौती दोहरी हो गई है। एक तो इसके संक्रमण को रोकने की लगातार कोशिश और दूसरी, जो वरिष्ठ नागरिक इसकी चपेट में आएं, उनका ख़ास ख़्याल। मंगलवार को कोरोना वायरस को लेकर आने वाली यह अकेली बुरी ख़बर नहीं थी। दुनिया भर में इसकी वजह से जान गंवाने वालों का आकंड़ा 7,100 को पार कर गया है। और मंगलवार को ही कोरोना वायरस के 14,000 से ज़्यादा नए मामले सामने आए। ऐसा पहली बार हुआ है, जब एक दिन में इस वायरस से संक्रमित होने वाले इतने ज़्यादा मामले सामने आए हैं। यह बताता है कि इस महामारी का संक्रमण अब कहीं ज़्यादा तेज़ी से फैल रहा है। अब तक दुनिया के 150 से अधिक देश इसकी ज़द में आ चुके हैं। ज़ाहिर है, विश्व की चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। इसके साथ ही एक बुरी ख़बर यह भी है कि भारत में कोरोना वायरस के पहले मरीज़ को ठीक करने वाले डॉक्टर में कोरोना वायरस होने की पुष्टि हुई।

आलेख – हिन्दी एकांश, विदेश प्रसारण प्रभाग