कोरोना से लड़ाई में प्रधानमंत्री ने सावधानी बरतने के लिए प्रेरित किया

ऑल इंडिया रेडियो नेटवर्क पर प्रसारित होनेवाले मासिक कार्यक्रम “मन की बात” में लोगों को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में कोरोनावायरस के विरुद्ध लड़ाई सामूहिक प्रयासों से जमकर लड़ी जा रही है| भारतीय अर्थव्यवस्था के बड़े भागों को खोल दिया गया है, ऐसे में कोविड-19 महामारी के बीच में उन्होंने लोगों को और सजग और सावधान रहने के लिए प्रेरित किया है| 

 प्रधानमंत्री ने कहा कि पर्याप्त सतर्कतापूर्ण उपायों के साथ 200 ट्रेन सेवाएँ बहाल हो चुकी हैं| उन्होने कहा कि हवाई सेवाएँ भी शुरू हो चुकी हैं तथा उद्योग भी सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहा है| उन्होंने लोगों को किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतने की बात पर बल दिया तथा सार्वजनिक स्थानों पर एक से दूसरे व्यक्ति के बीच दो गज की दूरी बनाए रखने, फेस मास्क लगाने और जहां तक संभव हो घर पर रहने के सुझाव दिये | श्री मोदी ने बल दिया कि बहुत सारी कठिनाइयों के बावजूद, चल रही स्थिति से चतुराई से निपटने की देश की भावना व्यर्थ नहीं जानी चाहिए| 

देश के लोगों ने सेवा की जो भावना दिखाई है, भारत के प्रधानमंत्री ने उसका स्वागत करते हुए, इसे सबसे बड़ी शक्ति कहा है| उन्होंने कहा कि हम “सेवा परमो धर्म” के कथन से परिचित हैं| सेवा अपने आप में एक आनंद है| देशभर के स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति अपने गहरे सम्मान को व्यक्त करते हुए, प्रधानमंत्री ने डॉक्टरों, नर्सों, सफ़ाई कर्मियों, पुलिस कर्मियों तथा मीडिया कर्मियों की सेवा की भावना का अभिवादन किया| इस संकट के दौरान, उन्होंने महिला स्व-सहायता समूह के असाधारण कार्य की भी प्रशंसा की| उन्होंने तमिलनाडु के के॰सी॰ मोहन, आगरतला के गौतम दास और पठानकोट के दिव्याङ्ग राजू जैसे आम देशवासियों का उल्लेख किया, जिन्होंने संकट की इस कठिन घड़ी में अपने सीमित साधनों के बावजूद लोगों की मदद की | उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं के स्व-सहायता समूहों की दृढ़ता की कई कहानियाँ देशभर के सभी भागों से सामने आ रहीं हैं| 

श्री मोदी ने इस महामारी के साथ निपटने में लोगों द्वारा निभाई जा रही भूमिका की सराहना की| अपने ट्रैक्टर में सैनिटाईज़ेशन मशीन जोड़ने के विचार का ईजाद करनेवाले नासिक के राजेंद्र यादव का उन्होंने उदाहरण दिया| बहुत से दुकानदारों ने अपनी-अपनी दुकानों में “दो गज की दूरी” का पालन करने के लिए बड़े घेरे बना रखे हैं| 

इस महामारी के कारण लोगों की कठिनाइयों और कष्टों पर अपने दुख: को साझा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोनावायरस ने सुविधा से वंचित अधिकतर श्रमिकों और मज़दूरों को प्रभावित किया है| केंद्र, राज्य सरकारें, प्रत्येक विभाग तथा संस्थान त्वरित गति से हाथों हाथ काम कर रहे हैं| उन्होंने कहा कि किस तरह की कठिन घड़ी से हम गुज़र रहे हैं, इसे पूरा देश समझ और अनुभव कर रहा है और केंद्र, राज्य तथा स्थानीय शासन के निकाय हर समय कठिन परिश्रम कर रहे हैं| 

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दिशा में सरकार ने कई क़दम उठाए हैं| उन्होंने कहा कि हाल के केंद्र के फ़ैसलों ने ग्रामीण रोज़गार, स्व-रोज़गार तथा छोटे स्तर के उद्योग के लिए विशाल संभावनाओं के द्वार खोले हैं| उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस दशक में “आत्मनिर्भर भारत” अभियान देश को नई ऊंचाइयों तक लेकर जाएगा| 

 प्रधानमंत्री ने फिर से बल दिया कि वर्तमान कोरोना महामारी के दौरान, हर जगह के लोग “योग” तथा “आयुर्वेद” के बारे में और जानकारी चाहते हैं तथा इसे जीवन में स्थान देना चाहते हैं| उन्होंने “कम्युनिटी, इम्यूनिटी तथा यूनिटी” के लिए योग को आवश्यक बताया| उन्होंने कहा कि वर्तमान कोरोना महामारी के दौरान, योग और महत्वपूर्ण हो चुका है, क्योंकि यह विषाणु श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है| योगा में श्वसन तंत्र को सशक्त करनेवाले कई तरह के प्राणायाम हैं और लंबे समय में स्वास्थ्य पर इसके लाभकारी प्रभाव देखने को मिलते हैं| इस महामारी से निपटने में सरकार के प्रयासों की प्रधानमंत्री ने प्रशंसा की| उन्होंने इसे साझा करते हुए गर्व का अनुभव किया कि “आयुष्मान भारत” योजना के लाभार्थियों की संख्या एक करोड़ से अधिक हो चुकी है| 

 प्रधानमंत्री ने कहा कि एक ही साथ हम कोरोनवायरस महामारी और अंफान जैसे चक्रवात से भी लड़ रहे हैं| उन्होंने महाचक्रवात अंफान से निपटने में पश्चिम बंगाल तथा ओडिशा के लोगों के साहस की प्रशंसा की| टिड्डियों के हमलों से राज्यों के किसानों को हुए नुकसान के प्रति उन्होंने सहानुभूति दिखाई|  उन्होंने कहा कि जिस तरह के कटु अनुभव से वे दो चार हुए हैं तथा जिस तरह की दृढ़ता का प्रदर्शन उन्होंने किया है, वह प्रशंसनीय है| 

प्रधानमंत्री ने वर्तमान पीढ़ी को जल के बचाव की ज़िम्मेदारी को समझने की आवश्यकता को रेखांकित किया| उन्होंने वर्षा के जल को बचाने की आवश्यकता पर बल दिया तथा कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को जल संरक्षण के लिए प्रयासरत रहना चाहिए| उन्होने प्रकृति की सेवा करने के लिए इस “पर्यावरण दिवस” पर कुछ पेड़ लगाने तथा प्रकृति के साथ एक दैनिक सम्बन्धों को जोड़ने के संकल्प लेने के लिए देशवासियों से निवेदन भी किया| उन्होंने कहा कि लॉकडाउन ने जीवन की गति को धीमा किया है, लेकिन इसने प्रकृति और जंगली पशु को उचित रूप से समझने का एक अवसर दिया है|  

आलेख – कौशिक रॉय, आकाशवाणी के समाचार विश्लेषक 

अनुवादक/वाचक – मनोज कुमार चौधरी