भारत कृषि तथा रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर

कृषि तथा रक्षा समेत भारत के मुख्य क्षेत्रों की शक्ति आत्म-निर्भरता में है| आत्म-निर्भरता एक ऐसी पहल है, जिसका उद्देश्य देश को वैश्विक मंच के शीर्ष पर पहुंचाना है| यह निर्विवाद रहा जब प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने कृषि मूलभूत संरचना कोष के अंतर्गत एक लाख करोड़ रुपये की वित्तपोषण सुविधा की शुरुयात की|

रक्षा मंत्री, राजनाथ सिंह ने 101 रक्षा उपकरणों की एक सूची की घोषणा की| इन उपकरणों के आयात दी गई समयसीमा के परे तक प्रतिबंधित रहेंगे| ये दो घटनाक्रम विश्व की तेज़ी से विकसित होती आर्थिक शक्ति बनने के भारत के टैग को कमज़ोर पड़ने में अधिक समय को गँवाए बग़ैर इसके आत्म-निर्भर बनने के उद्देश्य में एक नए चरण को चिन्हित करते हैं|

कृषि मूलभूत संरचना कोष का उद्देश्य देश के कृषि समुदाय को योग्य बनाना है, ताकि यह समुदाय अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए अपने उत्पादन का भंडारण कर सके और फिर इनकी बर्बादी में कमी करके अपने कृषि उत्पादन को अधिक मूल्य पर बेच सके| यह कोष कृषि क्षेत्र में “स्टार्ट अप्स” के लिए लाभ की भी परिकल्पना करता है| इससे फ़सल कटाई के बाद के प्रबंधन को बढ़ाकर एक तंत्र उत्पन्न करने के लिए इन्हें एक अवसर मिलेगा|

देश की जनसंख्या का अधिकतम भाग जीवित रहने के माध्यम के रूप में अभी भी कृषि पर निर्भर है| यह क्षेत्र भंडारण, कोल्ड चेन तथा खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्रों में निवेश के लिए विशाल अवसर की पेशकश करता है|

इस मामले में कृषि मूलभूत संरचना कोष द्वारा दी जानेवाली मध्यम तथा दीर्घ कालिक ऋण वित्तपोषण सुविधाएं फ़सल कटाई के बाद की मूलभूत संरचना प्रबंधन के विकास में अधिक लाभकारी साबित हो सकती हैं| किसानों के अतिरिक्त, प्राथमिक कृषि साख समितियां (पी॰ए॰सी॰एस॰), किसान उत्पादक संगठन तथा कृषि-उद्यमियों को कृषि मूलभूत संरचना कोष के लाभ मिलेंगे|

अनाजों के मुख्य आयातक बनने संबंधी भारत के अभियान के एक उज्ज्वल उदाहरण वाले कृषि क्षेत्र को बनाना इस कोष का समग्र उद्देश्य है| जब विश्व कोविड-19 से उपजी चुनौतियों के साथ संघर्षरत था, तब दवाइयों की तरह भारत के कृषि क्षेत्र ने निर्यातों के साथ विश्व की खाद्य आपूर्ति की शृंखला को संभाले रखा|

मार्च-जून 2020 के दौरान, गत वर्ष की तुलना में कृषि निर्यात 23॰24 प्रतिशत तक बढ़ा| निश्चित रूप से, आनेवाले कुछ वर्षों में भारत को आत्म-निर्भर बनाने में किसान तथा कृषि क्षेत्र की एक बड़ी भूमिका होनेवाली है| इसी प्रकार, रक्षा समेत महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी में आत्म-निर्भर बनने के भारत के संकल्प को एक प्रोत्साहन मिला, जब रक्षा मंत्रालय ने 2020 तथा 2024 के बीच एक चरणबद्ध तरीक़े से 101 रक्षा उपकरणों के आयात को प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया|

भारत के इतिहास में पहली बार, इन उपकरणों को देश में निर्मित करके सशस्त्र बलों को बेहतर तरीक़े से तैयार करने के लिए इस प्रकार के क़दम उठाए गए हैं|

101 उपकरणों पर प्रतिबंध के साथ, अगले पाँच से सात वर्षों में घरेलू उद्योगों को अनुमानित लगभग चार लाख करोड़ रुपये के मूल्य के अनुबंध दिये जाएँगे| इनमें से, सेना तथा वायु सेना में प्रत्येक को लगभग 1,30,000 करोड़ रुपये के मूल्य के उपकरण मिलने की आशा है, जबकि, इसी अवधि में नौसेना को लगभग 1,40,000 करोड़ रुपये के मूल्य के उपकरण मिलने की आशा की जा रही है|

प्रतिबंधित उपकरणों में ना केवल साधारण कल-पुर्ज़े शामिल हैं, बल्कि, इनमें आर्टिलरी गन, असॉल्ट राइफ़ल, लड़ाकू जलपोत, सोनार प्रणाली, परिवहन विमान, हल्के युद्धक हेलिकॉप्टर, रेडार तथा अन्य उपकरण जैसे कुछ उच्च प्रौद्योगिकीय हथियार भी हैं|

रक्षा क्षेत्र में “आत्मनिर्भर” बनने की दिशा में एक बड़े क़दम के रूप में देखा जानेवाला यह क़दम प्रतिबंधित उपकरणों को देश में निर्मित करने के अवसर को बढ़ाने के लिए भारतीय रक्षा उद्योग को एक बड़ा अवसर प्रदान करता है| यह आनेवाले वर्षों में सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डी॰आर॰डी॰ओ॰) द्वारा विकसित तथा परिकल्पित प्रौद्योगिकी को अपना सकता है या फिर अपनी स्वयं की परिकल्पना तथा विकास क्षमताओं का प्रयोग करके इस काम को अंजाम दे सकता है|

रक्षा प्रौद्योगिकी को प्राप्त करने में सशस्त्र बलों को किसी तरह की समस्या नहीं है, इस बात को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक क़दम उठाए गए हैं, ताकि उपकरणों के उत्पादन में लगनेवाली समयसीमा का पता चल सके | इसके बावजूद, किए गए उपायों के परिणामस्वरूप, ना केवल घरेलू क्षेत्र का विकास होगा, बल्कि इससे भारत 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने के और निकट पहुँच सकेगा|

इसके साथ, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि आत्म-निर्भर भारत का अर्थ विश्व के शेष भागों से दूरी बना लेना कतई नहीं है| सरकार ने भी इसे स्पष्ट कर दिया है कि आत्म-निर्भर बनने का मतलब वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक बड़ा तथा और अधिक महत्वपूर्ण हिस्सा बनने से लगाया जाना चाहिए|

आलेख – शंकर कुमार, पत्रकार

अनुवाद – मनोज कुमार चौधरी