अरब-भारत सहयोग फोरम की बैठक

अरब-भारत सहयोग मंच के वरिष्ठ अधिकारियों की तीसरी बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सम्पन्न हुई। विदेश मंत्रालय में (महापौर, पासपोर्ट और वीजा तथा प्रवासी भारतीय मामलों) के सचिव, संजय भट्टाचार्य और सहायक विदेश मंत्री एवं अरब देशों की लीग के साथ मिस्र के स्थायी प्रतिनिधि और राजदूत मोहम्मद अबू अल-ख़ैर ने बैठक की सह-अध्यक्षता की थी जिसमें अरब देशो और भारत के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ अरब लीग के महासचिवों की भागीदारी रही।

वरिष्ठ अधिकारियों ने अरब और भारत के बीच मौजूद ऐतिहासिक और सभ्यतागत सम्बंधों को याद किया और दोनों पक्षों को एक सूत्र में पिरोने वाले वाणिज्यिक और सांस्कृतिक सम्बंधों के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने अरब देशो औरभारत के सहयोग के लिए मजबूत नींव, महान क्षमता और व्यापक संभावना की सराहना की, अरब-भारत के रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए मंच की भूमिका की जिम्मेदारी का इसमें अहम स्थान है।

वरिष्ठ अधिकारियों ने क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा की और  दोनों पक्षों के बीच सहयोग और समन्वय तंत्र को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया जो  एक तरह से आपसी हितों को संवारता है और क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखता है।

इस सम्बंध में उन्होंने मध्य पूर्व में क्षेत्रीय मुद्दों और राजनीतिक संकटों के राजनीतिक समाधान की आवश्यकता को दोहराया। विशेषकर फिलिस्तीनी मुद्दे तथा सीरिया और लीबिया में संकट, प्रासंगिक अंतर्राष्ट्रीय वैधता प्रस्तावों और प्रासंगिक समझौतों और अंतर्राष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुसार, आतंकवाद से निपटने और नेविगेशन की स्वतंत्रता और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहयोग की आवश्यकता है।

अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि कोविड-19 महामारी के प्रकोप के कारण दुनिया को असाधारण परिस्थितियों और अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। संघर्ष और संकट के क्षेत्रों सहित इस महामारी के बाद पैदा होने वाली स्थिति का सामना करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता है। दोनों पक्षों ने निदान और उपचार के क्षेत्र में भारत और अरब देशों के बीच चल रहे सहयोग पर चर्चा की, और कोविड के बाद आर्थिक गतिवीधियों में सुधार के परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय दृष्टिकोण पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

अरब पक्ष ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी सदस्य के रूप में दो साल के कार्यकाल (2021-2022) के लिए चुने जाने के लिए भारत को बधाई दी, इस समय  अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत से निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका की उम्मीद की जारी रही है विशेष रूप से क्षेत्रीय मुद्दों के संबंध में आपसी हितों को लेकर।

वरिष्ठ अधिकारियों ने अरब-भारत सहयोग फोरम के ढांचे में सहभागिता बढ़ाने के तरीकों और साधनों पर भी चर्चा की जिसमें अर्थव्यवस्था, व्यापार और निवेश, ऊर्जा और पर्यावरण, कृषि और खाद्य सुरक्षा, पर्यटन और संस्कृति, शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, और मीडिया तथा मानव संसाधन विकास शामिल हैं।

भारत और अरब देशों के बीच आर्थिक सम्बंधों को राजनीतिक स्तर पर रणनीतिक साझेदारी और द्विपक्षीय समझ के साथ ताम-मेल बिठाते हुए आगे बढ़ाना होगा। भारत-अरब देशों की आर्थिक सहभागिता के प्रमुख तत्व ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, मानव संसाधन आदान-प्रदान, बढ़ते व्यापार और निवेश सम्बंध और मजबूत कनेक्टिविटी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि भारत और अरब देशों के बीच सम्बंध बहुआयामी और व्यापक हैं  लेकिन क्षमता इससे बहुत बड़ी है।

भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत में 53 प्रतिशत तेल का आयात और 41 प्रतिशत गैस का आयात (अरब) क्षेत्र से होता है। भारत के इराक, सीरिया, लीबिया, यूएई, यमन और दक्षिण सूडान में तेल ब्लॉक हैं। इस साझेदारी की प्रकृति, खरीदार और विक्रेता के बीच अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम परियोजनाओं, रिफाइनरियों में संयुक्त उद्यमों और रणनीतिक तेल भंडार के निर्माण में भागीदारी के लिए मात्र हाइड्रोकार्बन सम्बंधों से विकसित हुई है।

भारत और अरब क्षेत्र दोनों ही अर्थव्यवस्था में सुधार और परिवर्तनकारी उपाय अपनाने में लगे हुए हैं और ऐसे समय  लोगों के बीच मजबूत राजनीतिक समझ और सद्भावना आर्थिक समझौतो को उच्च स्तर पर ले जाने की जबरदस्त क्षमता प्रदान करती है।

दोनों पक्ष फोरम की संयुक्त गतिविधियों के जल्द निर्धारण पर सहमत हुए, जिसमें अरब-भारत सांस्कृतिक महोत्सव का तीसरा सत्र, ऊर्जा के क्षेत्र में अरब-भारत सहयोग पर संगोष्ठी, प्रथम अरब-भारत विश्वविद्यालय अध्यक्ष सम्मेलन, मीडिया के क्षेत्र में अरब-भारत सहयोग पर दूसरी संगोष्ठी, और अरब-भारत साझेदारी सम्मेलन का 6 वां सत्र।

भारत में आपसी सहमति से बनी सुविधाजनक तारीख को अरब-भारत सहयोग मंच की दूसरी मंत्रिस्तरीय बैठक जल्द ही होने की संभावना है।

आलेख:- पद्म सिंह, ऑल इंडिया रेडियो के समाचार विश्लेषक

अनुवाद एवं स्वर- वीरेन्द्र कौशिक