अभिनेता ,गायक एवम् पार्श्वस्वर कलाकार अमिताभ बच्चन

 

पद्म-विभूषण अमिताभ बच्चन जाने-माने कवि हरिवंश राय ‘बच्चन’ के सुपुत्र हैं। यूँ तो कविवर हरिवंश राय बच्चन के परिवार में नाम के बाद श्रीवास्तव उपनाम लगाने का चलन रहा, लेकिन हरिवंश राय ‘बच्चन’ ने कविनाम ‘बच्चन’ कलम के लिए अपनाया। बाद में यही उपनाम उनकी पहचान बन गया और उनके परिजन बच्चन परिवार के सदस्य कहलाए। ‘अमिताभ’ नाम का मतलब कभी न ख़त्म होने वाली रोशनी है और यह महात्मा बुद्ध के नामों में से एक है। बॉलीवुड के शंहशाह, बिग बी और स्टार ऑफ दि मिलेनियम जैसे नामों से जाने गए अमिताभ बच्चन के नाम की रौशनी अभी तक बरक़रार है। अमिताभ बच्चन अपनी मॉं तेजी बच्चन के बहुत क़रीब थे। माता तेजी बच्चन को थियेटर का  शौक था और उन्हीं से प्रभावित होकर अमिताभ को अभिनय का चस्का लगा। 70 के दशक से आज तक फिल्म इंडस्ट्री में राज करने वाले अमिताभ बच्चन ने अपने करियर में बहुत से उतार-चढाव भी देखे। फिल्म ‘कुली’ की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन को इतनी गहरी चोट आई कि एक समय पर डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था, लेकिन चमत्कारिक रूप से अमिताभ ने मौत को भी हरा कर जीवन पाया । फिल्म कंपनी ABCL शुरु करने के लिए अमिताभ ने अपनी सारी संपत्ति दाव पर लगा दी लेकिन कुछ ही दिनों में कंपनी का दीवाला निकल गया। कहते हैं इसके बाद यश चोपड़ा ने फिल्म मोहब्बतें में अमिताभ बच्चन को काम देकर उन्हें मुश्किल दौर से निकाला। फिर अमिताभ ने छोटे परदे का रुख़ किया और ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की मेज़बानी की। कहते हैं कि छोटे परदे पर काम करने के लिए पत्नी जया ने अमिताभ को बार-बार मना किया था। उन्हें लगता था कि छोटे परदे पर जाने से अमिताभ का करियर नीचे चला जाएगा लेकिन ‘कौन बनेगा करोडपति’ की अपार सफलता ने अमिताभ के करियर को जीवनदान दिया और उसके बाद से आज तक अमिताभ फिल्म जगत में लगातार योगदान कर रहे हैं। अमिताभ को टेक्नोलॉजी  का बहुत शौक है इसीलिए अपने नाती-नातिन से अमिताभ लेटेस्ट चीज़ें सीखते रहते हैं। उनका परिवार आस्थावान है और शायद इसीलिए अमिताभ अपने किसी भी काम की शुरुआत ईश्वर की पूजा आराधना के साथ ही करते हैं। यहाँ दर्शाई गई तस्वीर में वे 1975 में आई सुपरहिट फ़िल्म दीवार के एक दृश्य में नज़र आते हैं  । आपने अपनी फ़िल्मों के लिए कई यादगार गीत गाए हैं और कुछ अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फिल्मों और डॉक्युमेंटरीज़ में पार्श्व स्वर के माध्यम से अपनी गहरी छाप छोड़ी है । मुंशी प्रेमचंद की कहानी शतरंज के खिलाड़ी पर आधारित सत्यजित रे की  फिल्म उन्हीं की आवाज़ के साथ शुरू होती है । ल मार्श द ल’एम्परर , लूक याकेट कृत अकादमी पुरुस्कार से सम्मानित वृत्तचित्र है, जिसमे एंपरर पैंग्विंस की दुर्गम यात्रा का वृत्तांत  है । इसके हिन्दी संस्करण में आप अमिताभ बच्चन की जादुई आवाज़ सुन सकते हैं । आपके व्यक्तित्व एवम् कृतित्व से जुड़ी और बहुत सी बातों को जानने के लिए सुनिए हमारी प्रस्तुति ।