अर्द्धसत्य

१९८३ में गोविन्द निहलानी द्वारा निर्मित फिल्म अर्धसत्य जीवन के आदर्शों और यथार्थ की वास्तविकता के बीच व्यक्ति के मार्मिक संघर्षों पर आधारित है । ये फिल्म एस डी पंवलकर द्वारा रचित लघु कथा सूर्य पर आधारित है | फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई है ओम पुरी, स्मिता पाटिल, अमरीश पुरी और शफी ईनामदार ने । साथ ही फिल्म में सदा शिव अमरापुरकर नकारात्मक भूमिका में नज़र आये हैं | इस फिल्म में ओम पुरी ने ऐसे पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका निभाई है जो जीवन भर समाज की बुराइयों और अपने फ़र्ज़ के बीच जूझता रहता है । स्मिता पाटिल भी समाज में फैली अराजकता के खिलाफ संघर्ष करती हैं | फिल्म अर्धसत्य को १९८३ में राष्टीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया, साथ ही इस फिल्म के लिए ओम पुरी को १९८३ में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरुस्कार और निर्देशक गोविन्द निहलानी को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के पुरस्कार से सम्मानित किया गया | इस फिल्म को अनेक राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। अपनी पटकथा और किरदारों की शानदार भूमिका की वजह से ये फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई |

अर्धसत्य हिन्दी सिनेमा की उन चुनिंदा फिल्मों में से एक है जो तथाकथित यथार्थ  परक फिल्म होने के बावजूद व्यवसायिक तौर पर सफल साबित हुई। कहा जाता है कि फिल्म में नायक की भूमिका पहले अमिताभ बच्चन को पेश की गई थी लेकिन किन्हीं कारणों से उन्होंने फिल्म करने मना कर दिया। फिल्म में राजकुमार संतोषी ने बतौर सह-निर्देशक काम किया और अर्धसत्य के 6 साल बाद राजकुमार संतोषी ने फिल्म घायल के साथ बतौर निर्देशक हिन्दी सिनेमा में धमाकेदार शुरुआत की। इस फिल्म ने हिन्दी सिनेमा के नायक का चेहरा हमेशा के लिए बदल दिया।