भारत में दृष्टिहीनता की नई परिभाषा, अब कम होगी दृष्टिहीनों की संख्या

भारत में लगभग चार दशक से चली आ रही दृष्टिहीनता की परिभाषा को इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानदंड के अनुरूप कर दिया है। अब इसका आकलन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से तय वैश्विक मानक के आधार पर किया जाएगा। भारत के मौजूदा मानक के तहत छह मीटर तक अंगुलियों को देखने में असमर्थ व्यक्ति को दृष्टिहीन माना जाता है, जबकि डब्ल्यूएचओ के मानक के अनुसार यह दूरी तीन मीटर है। नई परिभाषा के अनुसार, कोई व्यक्ति जो तीन मीटर की दूरी से उंगलियां नहीं गिन सकता उसे दृष्टिहीन माना जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। भारत ने छह मीटर का मानक वर्ष 1976 में अपनाया था। अब नई परिभाषा के तहत वैश्विक मानकों के अनुरूप आंकड़े जुटाए जा सकेंगे।