21.04.2017

राजधानी दिल्ली से प्रकाशित समाचारपत्रों ने अलग-अलग विषयों पर सम्पादकीय प्रकाशित किए हैं। केन्द्र सरकार द्वारा वीआईपी कल्चर खत्म कर गाड़ियों से लाल बत्ती हटाने का निर्णय, लगभग सभी अख़बारों के सम्पादकीय में है। दूसरी ओर, आईएस के तीन संदिग्ध आतंकवादियों की गिरफ्तारी से जुड़े विषयों पर भी अख़बारों ने सम्पादकीय लिखे हैं। कुछ ऐसी ख़बरें भी हैं, जो आज के अख़बारों की सुर्खियां बनी हैं। इनमें से कई ख़बरों ने अख़बारों के पहले पन्ने पर स्थान पाया है।

देश में बड़े आतंकवादी हमले की साजिश को नाकाम करते हुए आतंक रोधी दस्ते- एटीएस द्वारा इस्लामिक स्टेट के दस संदिग्ध को गिरफ्तार किये जाने की खबर हिन्दुस्तान सहित सभी अख़बारों की पहली खबर है। दैनिक जागरण लिखता है- वारदात करने के बेहद करीब थे।

नोएडा प्राधिकरण के पूर्व ओ.एस.डी. के पास मिली दो हजार करोड़ रूपये की सम्पत्ति अमर उजाला की पहली ख़बर है। नवभारत टाइम्स़ का कहना है- सरकार ने करोड़पति बाबुओं पर कसा शिकंजा। इसी अख़बार ने वी.आई.पी कल्रर पर नई सर्जिकल स्ट्राइक शीर्षक से लिखा है कि वीआईपी ड्यूटी से गैरहाजिर पुलिसकर्मी हटाये जाएंगे और रिटायर हुए अफसरों से वापस ली जाएंगी सुविधाएं।

दैनिक भास्कर ने गृहमंत्री के इस बयान को प्रमुखता से दिया है कि नौकरशाह निष्पक्ष रहें और नेताओं के यस मैन न बनें।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र  मोदी और पेटीएम के संस्थापक टाइम पत्रिका की सूची में दुनिया के सबसे प्रभावशाली सौ लोगों की सूची में शामिल होने की खबर अमर उजाला में प्रमुखता से है। पत्र लिखता है कि श्री मोदी को 2015 के सौ सबसे प्रभावशाली लोगों में भी शामिल किया गया था।

सीबीएसई की देशभर के स्कूलों को यह चेतावनी कि मंहगी किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर न करें राजस्थान पत्रिका में है। पत्र ने यह टिप्पिणी भी की है कि स्कूल सामु‍दायिक सेवा है कारोबार नहीं। दैनिक भास्कर की टिप्पणी है कि निजी स्कूल सिर्फ पढ़ायें, ड्रेस, बैग, किताब कॉपी का धंधा न करें।

दिल्ली का पारा जैसलमेर के बराबर पहुंचा को हिन्दुस्तान ने प्रमुखता से देते हुए आज बारिश की संभावना व्यक्त की है। दैनिक जागरण ने लिखा है भीषण गर्मी और लू के थपेड़े लोगों को कर रहे बेहाल।

बापू के डाक टिकट चार करोड़ रूपये में हुए नीलाम जनसत्ता में है। राष्ट्री्य सहारा ने लिखा है कि भारतीय डाक टिकटों के लिए अभी तक मिली यह सबसे बड़ी राशि है। ये इस लिहाज से भी दुर्लभ है कि ये डाक टिकट चार के सैट में है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण – एनजीटी का यह कहना कि श्री श्री रविशंकर का रवैया बेहद गैर जिम्मेदार है को हिन्दुस्तान ने प्रमुखता से दिया है। पत्र ने श्री श्री के उस बयान को भी छापा है कि यमुना के डूब क्षेत्रों को हुए नुकसान के लिए केन्द्र और एनजीटी जिम्मेदार है।

“उतर गई बत्ती” शीर्षक से नवभारत टाइम्स अपने एक सम्पादकीय में लिखता है कि लाल बत्ती का किस्सा खत्म कर देना केंद्र सरकार का एक दमदार फैसला है। इसके लागू होने की तिथि 01 मई रखी गई है, लेकिन केंद्र और कई राज्यों के मंत्रियों ने 20 अप्रैल को ही, अपनी गाड़ी की लालबत्ती, अपने हाथों से उतारने की फोटो खिंचाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दी। यह बताता है कि देश में सही फैसलों की गूंज आज भी सुनाई देती है। इस फैसले के संबंध में प्रधानमंत्री ने ट्वीट करके कहा है कि देश का हर नागरिक वीआईपी है। प्रधानमंत्री का यह ट्वीट सराहनीय है। अख़बार लिखता है कि वीआईपी कल्चर खत्म करने से देश में कोई बड़ा बदलाव भले न आए, पर इससे आम लोगों के मन से खास लोगों का खौफ कुछ कम जरूर होगा।

दैनिक जागरण ने अपने एक सम्पादकीय में ‘आतंक की विषबेल’ शीर्षक से लिखा है कि उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद विरोधी दस्ते ने पांच राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर मुंबई, जालंधर और बिजनौर में आइएस के तीन संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तारी कर, आतंकवाद के बढ़ते खतरे को फिर से उजागर कर दिया है। इन संदिग्ध आंतकियों के साथ छह अन्य संदिग्ध तत्वों को भी गिरफ्तार किया गया है। ये संदिग्ध आतंकी क्या ताना-बाना बुन रहे थे और उनके इरादे कितने खतरनाक थे,  इसका पता तो पूछताछ के बाद ही लगेगा। लेकिन ऐसे तत्वों की गिरफ्तारी से इतना तय है कि आईएस भारत में भी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कोशिशें कर रहा है। इस हकीकत को स्वीकार किया जाना चाहिए कि आइएस की विषाक्त विचारधारा युवाओं को आतंक के रास्ते पर ले जाने का काम कर रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ-साथ समाज के लोगों को भी इस हकीकत को स्वीकार करना होगा।

जनसत्ता अपने एक सम्पादकीय में “चीन की चाल” शीर्षक से लिखता है कि हाल ही में तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा की तवांग यात्रा को लेकर चीन ने तीखी आपत्ति जताई थी और यहां तक कहा था कि इससे द्विपक्षीय संबंधों को ‘गंभीर क्षति’ हो सकती है। बुधवार को चीन ने अरुणाचल प्रदेश की छह जगहों के लिए ‘मानकीकृत’ और ‘आधिकारिक’ नामों का एलान किया। चीन ने अपने इस कदम को वैध होने की घोषणा भी की। चीन की गतिविधि एवं सोच से साफ है कि अब उसने सोच-समझ कर उकसावे की कार्रवाई शुरू कर दी है। नामों की घोषणा फिलहाल केवल खबर के स्तर पर है, तो भी यह भारत की संप्रभुता में चीन के अनधिकृत दखल की कोशिश है। गौरतलब है कि भारत और चीन की सीमा पर 3488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लंबे समय से विवाद बना हुआ है। इसे सुलझाने के मकसद से दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों की उन्नीस दौर की बातचीत हो चुकी है। लेकिन अब तक किसी नतीजे पर पहुंचे बिना चीन ने एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश को ‘दक्षिण तिब्बत’ बताना शुरू कर दिया है। भारत ने हमेशा की तरह चीन के इस दावे पर तीखी आपत्ति दर्ज कराई है।