कन्यादान

1968 में आई फिल्म कन्यादान एक सोशल-ड्रामा है जिसमें मुख्य भूमिका शशि कपूर, आशा पारेख, दिलीप राज और सईदा खान ने निभाई हैं। फिल्म का निर्देशन मोहन सहगल ने किया है। फिल्म की कहानी उस समय बाल-विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा की विसंति को उजागर करती है। फिल्म में अमर (दिलीप राज) और रेखा (आशा पारेख) की बचपन में ही शादी हो जाती है जिसे बड़े होकर अपनाना दोनों के लिए मुश्किल हो जाता है। फिल्म में शशि कपूर और दिलीप राज दोनों नायकों का एक ही नाम ‘अमर’ है जिसकी वजह से कहानी में कई तरह की ग़लतफहमियां होती है और कहानी आकर्षक मोड़ लेते हुए आगे बढ़ती है, आखिरकार फिल्म में यह संदेश स्पष्ट किया जाता है कि लड़की का सही कन्यादान तभी माना जाता है जब लड़की की मर्जी और खुशी के साथ उसका हाथ किसी लड़के के हाथ में दिया जाए। फिल्म ने उस समय बॉक्स ऑफिस पर ज़बरदस्त कमाई करते हुए सबसे ज़्यादा कमाई का रिकॉर्ड बनाया। फिल्म के गीतकार हसरत जयपुरी हैं जबकि गीतों को शंकर-जयकिशन ने अपना संगीत दिया। फिल्म में नायकों को महेन्द्र कपूर और मोहम्म्द रफ़ी ने अपनी आवाज़ें दी हैं, वहीं नायिकाओं को लता मंगेश्कर और आशा भोंसले ने अपनी सुरीली आवाज़ों से नवाज़ा है। मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ में गाया गया गीत ‘लिखे जो ख़त तुझे….’ लोगों के बीच सबसे ज़्यादा लोकप्रिय हुआ और यह गीत आज भी तरोताज़ा लगता है।