जागते रहो

निर्देशक- अमित मित्रा और शंभु मित्रा

लेखक- अमित मित्रा और के.ए. अब्बास (संवाद)

आलेख एवं प्रस्तुति- प्रियंका सिंह

 

राजकपूर की फ़िल्म जागते रहो सामाजिक बुराइयों पर प्रहार करती ब्लैक एंड व्हाइट क्लासिक है। नायक एक चोर की दृष्टि से शरीफ़ लोगो के भीतर का चोर देखता है और फिर उसे एहसास होता हैं कि शराफ़त का चोला पहने समाज के भ्रष्टाचारी लोग तो समाज के अंदर खुले आम घूम रहे हैं।  फिल्म में राजकपूर ने मुख्य भूमिका निभाते हुए उस ग़रीब गांव वाले की भूमिका को जिया है जो बेहतर ज़िन्दगी की तलाश में शहर आता है और एक मध्य वर्गीय समाज की उन बुराइयों से वाक़िफ़ होता है जो गांव की सीधी-सादी ज़िन्दगी से कोसों दूर है। ग़रीब गांव वाला हर परिवार के अंदर कुछ न कुछ ऐसा देखता है जिससे उसका शहर की बेहतर ज़िन्दगी से विश्वास उठता जाता है।  फ़िल्म की कहानी और अभिनय के अलावा छाप छोड़ते गीत इसकी ख़ासियत हैं। फ़िल्म में संगीत सलिल चौधरी का है और संगीत को अपने बोल से शैलेंद्र और प्रेम धवन ने सजाया है। फ़िल्म में राजकपूर के अलावा मोतीलाल, प्रदीप कुमार और सुमित्रा देवी जैसे कलाकारों ने अहम किरदार निभाये हैं। फिल्म के अंतिम दृश्य में अभिनेत्री नरगिस अतिथि भूमिका में नज़र आई हैं। ‘जागते रहो’ आर.के.फिल्म्स के बैनर तले नरगिस की आख़िरी फिल्म थी।