मेरा गांव मेरा देश

निर्देशक- राज खोसला

पटकथा – जी.आर. कामत, अख्तर रोमानी (संवाद)

 

 

1971 में आई फिल्म ‘मेरा गाँव मेरा देश’ एक सामाजिक किंतु अति नाटकीय फिल्म है, जो बॉक्स ऑफिस पर हिट रही थी। इस फिल्म में अभिनेता विनोद खन्ना ने पहली बार खलनायक की भूमिका निभाई जिसे लोगों की खूब सराहना भी मिली। विनोद खन्ना के अलावा फिल्म में धर्मेन्द्र, आशा पारेख और जयंत ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। फिल्म में मजबूर चोर अजीत (धर्मेन्द्र) को समाज एक ज़िम्मेदार नागरिक बनने का पूरा मौका देता है। अजीत अब मेहनतकश किसान की तरह खेतों में काम करता है और अपनी ज़िन्दगी बिताता है। आगे अजीत की ज़िन्दगी में अंजु (आशा पारेख) आती है और दोनों एक-दूसरे के प्यार में पड़ जाते है। फिल्म के खलनायक जब्बर सिहं (विनोद खन्ना) के अत्याचारों से सारा गांव दुखी है। जब्बर सिंह, अंजु को अगवा कर लेता है और अजीत अपने प्यार को बचाने के लिए जब्बर सिंह से बदला लेने की ठान लेता है। फिल्म की कहानी और अभिनय के अलावा फिल्म के गाने भी सुपरहिट रहे। फिल्म के गानों को आनंद बक्शी ने अपने बोल दिए हैं, और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने संगीत से सजाया है। फिल्म ‘मेरा गांव मेरा देश’ की कहानी और किरदार काफी हद तक 1975 में आई फिल्म ‘शोले’ से मिलती है। कहा जाता है कि उस दौर में फिल्म ‘मेरा गाँव मेरा देश’ ने इस तरह की ड़्रामा फिल्मों का चलन शुरु किया जिससे आगे चलकर हिन्दी सिनेमा को ‘शोले’ जैसी सदाबहार क्सासिक मिली।