अभिनेत्री नूतन

 

सादगी की मिसाल, भोली चमकती आॅंखों और सलोनी काया की धनी नूतन समर्थ बहल का जन्म 4 जून 1936 को निर्देशक कुमारसेन समर्थ और 1940 की सफल अभिनेत्री शोभना समर्थ के यहाॅं हुआ । नूतन को बचपन से कत्थक नृत्य तथा शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा मिली । 8 वर्ष की उम्र में यह पहली बार सिल्वर स्क्रीन पर अपने पिता की बनाई फिल्म ‘नल दमयंती’ में दिखी । इनकी बढ़ती लोकप्रियता देख माॅं शोभना ने इन्हें 1950 मंे स्वयं निर्मित फिल्म ‘हमारी बेटी’ में लाॅन्च किया । इसके बाद नूतन ने ‘नगीना’, ‘हम लोग’, ‘शबाब’, ‘लैला मजनूं’ जैसी फिल्मों में काम किया जो ज्यादा नहीं चली । फिर यह पढ़ाई पूरी करने स्विज़रलैंड चली गई ।

भारत लौटने पर इन्होंने ‘मिस इंडिया’ प्रतियोगिता में भाग लिया और 1952 में यह प्रतियोगिता जीतने वाली पहली महिला बनी । मंद मुस्कान, लम्बी-पतली कद-काठी, लम्बे बाल और ज़्यादातार साड़ी में दिखने वाली नूतन का असली फिल्मी सफर 1956 में प्रदर्शित ‘सीमा’ फिल्म से हुआ, जिसके लिए इन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला । अपने दौर के लगभग सभी अभिनेताओं के साथ नूतन ने काम किया जिनमे देव आंनद के साथ ‘पेइंग गेस्ट’, तेरे घर के सामने,’ राजकपूर के साथ ’अनाड़ी, बारिश’ किशोर कुमार के साथ ’ दिल्ली का ठग’ सुनील दत्त के साथ ‘सुजाता, मिलन’ फिल्में शुमार हैं । गहरे भाव, संवेदनशील और विविध किरदार निभाने की क्षमता ने नूतन को उस दौर के निर्माता निर्देशकों की पहली पसंद बना दिया था । 23 साल की उम्र में नूतन ने नेवी के लेफि0 कमांडर रजनीश बहल से शादी रचाई और इनके बेटे मोहनीश बहल भी हिन्दी सिनेमा से बहुत समय से जुड़े हुए हैं । नूतन की सबसे लोकप्रिय और सफल फिल्में रही ‘सीमा, सुजाता, बन्दिनी, मिलन, सरस्वती चंद्र, मैं तुलसी तेरे आॅंगन की, सौदागर’ इत्यादि । इनके अलावा ‘युद्ध, नाम, मेरी जंग, कर्मा, साजन बिना सुहागन’ फिल्मों में भी इनके काम को बेहद सराहा गया । नूतन को गाने का बहुत शौक था जिसे इन्होनें फिल्मों तथा स्टेज पर गाकर पूरा किया । इनका गाया ‘छबीली’ फिल्म का गाना ‘ऐ मेरे हमसफर’ बेहद लोकप्रिय हुआ ।

40 वर्ष के फिल्मी सफर में नूतन ने लगभग 70 फिल्मों में काम किया और 6 बार फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार को हासिल किया । आखिरकार 54 साल की उम्र में 21 फरवरी 1991 में लीवर केंसर की वज़ह से इनकी मृत्यु हो गई ।