प्रगाढ़ होता भारत-बेलारूस सहयोग

आलेख – सुनील गताडे, राजनीतिक समीक्षक

अनुवाद- नीलम मलकानिया

अपने द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करते हुए भारत और बेलारूस ने विविध क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 10 समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं। हालांकि बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको की हालिया सम्पन्न भारत यात्रा का मुख्य आकर्षण रक्षा क्षेत्र में विनिर्माण और संयुक्त विकास का फैसला रहा।

जब भारत ने अपने महत्वाकांक्षी कार्यक्रम मेक इन इंडिया की शुरुआत की तब यह महसूस किया गया कि बेलारूस के साथ रक्षा सहयोग की बहुत सम्भावनाएं हैं। इस संदर्भ में यह याद रखा जाना चाहिए कि बेलारूस सोवियत संघ के समय इसे विनिर्माण और तकनीकि सहयोग उपलब्ध करवाता था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत यात्रा पर आये बेलारूस के राष्ट्रपति लुकाशेंको अपनी गहन वार्ता में दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार और निवेश  बढ़ाने के लिए तैयार हुए।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस वार्ता को वृहद और भविष्योन्मुखी बताया वहीं राष्ट्रपति लुकाशेंको ने यह घोषणा की कि दोनों देश सहयोग के नये युग की शुरुआत करने को तैयार हैं। वे चाहते हैं कि भारत इस बहु-ध्रुवीय दुनिया में शक्तिशाली ध्रुव बनकर उभरे। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी मई 2015 में बेलारूस गये थे।

पारंपरिक रूप से ही बेलारूस के साथ भारत के सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं। सोवियत संघ के विघटन के बाद 1991 में बेलारूस को सबसे पहले स्वतंत्र राष्ट्र मानने वाले देशों में भारत भी था। 1992 में इसके साथ औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित करते हुए मिंस्क में भारतीय दूतावास खोला गया। बेलारूस ने सन 1998 में भारत में अपना दूतावास खोला था।

बेलारूस के राष्ट्रपति द्वारा इस समय की गई तीसरी भारत यात्रा और भी अहम हो जाती है क्योंकि दोनों देश कूटनीतिक संबंधों की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ माना रहे हैं। इस यात्रा के दौरान मुख्य गतिविधि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लुकाशेंको द्वारा 25वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक डाक टिकट जारी किया जाना है।

जो समझौते किये गये हैं उनके अंर्तगत तेल और गैस, कृषि, विज्ञान और तकनीक, शिक्षा और खेल सहित विविध क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने के अवसर मिलेंगे। मेक इन इंडिया पहल के अंर्तगत दोनो पक्ष रक्षा क्षेत्र में संयुक्त विकास और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए राज़ी हुए।

भारतीय निवेशकों को बेलारूस आमंत्रित करते हुए श्री लुकाशेंको ने यह वादा किया कि उन्हें कारोबार के लिए बेहद अनुकूल और उपयुक्त परिस्थितियां उपलब्ध कराई जायेंगी। भारत यूरेशिया आर्थिक संघ और अतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे जैसे बहुपक्षीय आर्थिक प्रोत्साहनों के अंतर्गत भी बेलारूस से जुड़ा है।

भारत यूरेशिया आर्थिक संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते के लिए वार्ता कर रहा है। पांच देशों वाले इस संघ के सदस्य बेलारूस को प्रभावशाली मध्य-एशियाई केन्द्र माना जाता है। सन् 2016 में भारत और बेलारूस के बीच लगभग 402 मिलियन अमरीकी डॉलर का व्यापार किया गया। औषधि, तेल और गैस क्षेत्र समेत बहुत से क्षेत्रों में कारोबार और निवेश के असीम अवसर मौजूद हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने सही कहा कि आर्थिक संबंधों को नया आयाम देने के लिए दोनों पक्षों की कंपनियों को विक्रेता-क्रेता रूप-रेखा से ऊपर उठना होगा। यह इसलिए जरूरी है ताकि दोनों पक्ष एक-दूसरे का स्वाभाविक सहयोग कर सकें।

राजनीतिक परिदृश्य में दोनों नेताओं ने बहु-पक्षीय मंचों पर परस्पर हित वाले मुद्दों पर एक-दूसरे का सहयोग करने का फैसला किया। दोनों देश लगभग सभी अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों के बारे में एक जैसी राय रखते हैं इसलिए अंतर्राष्ट्रीय, बहु-पक्षीय और क्षेत्रीय मामलों में दोनों देश एक दूसरे का सहयोग भी करते हैं।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदवारी का बेलारूस समर्थन करता आया है। सन् 2011-2012 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थाई सदस्य के तौर पर भी बेलारूस ने भारत का समर्थन किया था और साथ ही परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भी भारत का ही साथ दिया। भारत ने गुट निरपेक्ष समूह और अंतर संसदीय संघ जैसे अन्य अंतर्राष्ट्रीय तथा बहु-पक्षीय मंचों पर बेलारूस की सदस्यता का समर्थन किया। जिसे बेलारूस ने सराहा।

बेलारूस को निशाना बनाते हुए जिनेवा और न्यूयार्क में मानवाधिकार उल्लंघन तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित करने संबंधी प्रस्तावों के समय भारत ने बेलारूस का समर्थन किया और बेलारूस ने भारत के इस फैसले की सराहना की। बेलारूस भारत को उभरती हुई वैश्विक शक्ति के तौर पर देखता है और इसके साथ सामरिक संबंध विकसित करना चाहता है। राष्ट्रपति लुकाशेंको की हालिया सम्पन्न यात्रा इस बात का प्रमाण है। आर्थिक सक्रियता में तेज़ी लाने के लिए श्रेष्ठ प्रयास किये गये हैं जो दोनों देशों के लिए लाभदायक हैं।