भारत-आसियान संबंधो की प्रगाढ़ता

आलेख – दीपांजन रॉय चौधरी, कूटनीतिक संवाददाता

अनुवाद- नीलम मलकानिया

नवंबर 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12वें आसियान-भारत सम्मेलन तथा 9वें पूर्व एशिया सम्मेलन में म्यांमार में ‘एक्ट ईस्ट नीति’ की शुरूआत की थी। उसके बाद से आसियान और विस्तृत भारत-प्रशांत क्षेत्र के साथ भारत की सक्रियता को और तेज़ी से बढ़ी है। इस अहम मंच पर प्रधानमंत्री मोदी चौथी बार उपस्थित रहे।

साल 2017 आसियान के साथ भारत की संवाद साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ है। मनीला में 15वें आसियान-भारत सम्मेलन में श्री मोदी और आसियान नेताओं ने स्मरणीय गतिविधियों और आसियान-भारत सहयोग विस्तार के सभी पहलुओं की समीक्षा की।

भारत-आसियान के बीच तीस वार्ता तंत्र है जिनकी नियमित रूप से बैठकें होती हैं। इनमें विदेश मंत्रालय, वाणिज्य, पर्यटन, कृषि, पर्यावरण, नवीकरणीय ऊर्जा और दूरसंचार की सात मंत्रिस्तरीय बैठकें तथा एक सम्मेलन शामिल हैं। फिलिपींस के मनीला में इसी साल अगस्त में आयोजित आसियान-भारत विदेश मंत्रियों की बैठक में तथा पूर्व एशिया सम्मेलन में विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत के विदेश राज्य मंत्री जनरल वी.के.सिंह (सेवानिवृत) शामिल हुए थे। वाणिज्य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने सितंबर में मनीला और भारत विमर्श में शामिल हुए। जहां मंत्रियों ने अपना आर्थिक सहयोग मज़बूत करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

सुश्री निर्मला सीतारमण ने रक्षामंत्री के रूप में अपनी पहली विदेश यात्रा पिछले माह मनीला में आयोजित आसियान रक्षा मंत्रियों की चौथी बैठक प्लस में शामिल होने के लिए की थी। उन्होंने आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त न करने का भारत का रुख़ दोहराया और ख़तरे का सामना करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मंचों की भूमिका को महत्व दिया।

भारत और आसियान के बीच 2016-17 में 71 अरब अमरीकी डॉलर का व्यापार हुआ जो दुनिया के साथ भारत के कुल व्यापार का 10.85 प्रतिशत हिस्सा है। क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता जल्द तैयार होने से इस क्षेत्र के साथ हमारा व्यापार तथा निवेश संबंध और बेहतर होगा।

फिलिपींस की इस यात्रा के बाद भारत की ओर से पिछले तीन वर्षों में आसियान के सभी दस देशों की राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री स्तर की उच्च स्तरीय यात्राएं हो चुकी हैं। इससे पता चलता है कि भारत आसियान देशों के साथ अपने संबंधों को कितना महत्व देता है। इससे आसियान सदस्य देशों के साथ विशेष तौर से गहरे संबंध बनाने की भारत की प्रतिबद्धता का पता चलता है। इस क्षेत्र की अनदेखी करने से यहां भारत के हित को नुक़सान पहुंचा है। वर्षों बाद अब सक्रिय रुख अपनाने से चीन को हावी होने से रोका जा सकता है।

प्रधानमंत्री की यात्रा एक ऐसे अहम समय में हुई है जब हम भारत-आसियान वार्ता साझेदारी के 25 साल, सम्मेलन स्तर सहभागिता के 15 साल और आसियान के साथ सामरिक साझेदारी के पांच साल मना रहे हैं। आसियान सम्मेलन से अलग प्रधानमंत्री मोदी ने फिलिपींस के राष्ट्रपति दूतर्ते के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की जो कि आसियान के वर्तमान अध्यक्ष भी हैं। श्री मोदी ने अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप औप जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे से भी मुलाक़ात की।

भारत समेत आसियान क्षेत्र की संयुक्त आबादी 1.85 अरब है जो वैश्विक आबादी का एक चौथाई हिस्सा है। इस क्षेत्र का संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद क़रीब 3.8 ट्रिलियन डॉलर है जो दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक क्षेत्रों में से एक है। पिछले 17 वर्षों में आसियान की ओर से निवेश स्तर बिलियन डॉलर से अधिक हुआ है जो हमारी कुल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के 17 प्रतिशत से अधिक है। इसी समयावधि में भारत ने आसियान में चालीस बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है।

भारतीय अर्थव्यवस्था तथा आसियान देशों की अर्थव्यवस्थाओं की गतिशीलता के चलते पहले से शानदार भारत-आसियान द्विपक्षीय व्यापार और निवेश और भी प्रभावी हो सकता है। नि:संदेह आसियान देशों के साथ आर्थिक आर्थिक सहयोग और गहरा से सभी पक्षों को लाभ होगा और इसकी संभावनाएं भी मौजूद हैं।

भारत और फिलिपींस सुशासन, समग्र विकास, अवसंरचनात्मक विकास तथा सहयोगी संघवाद में विश्वास रखते हैं। दोनों देशों के वैश्विक दृष्टिकोण में बहुत सामंजस्य है। बहुत सी समानताओं की वजह से भारत फिलिपींस के साथ संबंधो को और मज़बूत करने की असीम संभावनाएं देखता है।

भारत-आसियान की एकता और क्षेत्रीय सुरक्षा के केन्द्रीयता का समर्थन करता है। भारत ने विशेषतौर से कंबोडिया, लाओस, म्यामार और वियतनाम पर आधारित आसियान एकीकरण पहल के हिस्से के तौर पर क्षमतावर्धन की बहुत सी पहलें की हैं। भारत तीन कोषों के माध्यम से परियोजनाओं के लिए आर्थिक मदद करता है। ये हैं एक सौ मिलियन डॉलर राशि वाला भारत-आसियान सहयोग कोष, आसियान भारत हरित कोष और आसियान-भारत विज्ञान तथा तकनीक कोष।

आसियान के साथ सहयोग में भारत जन से जन का संपर्क बढ़ाने और वास्तविक, डिजिटल तथा आर्थिक संपर्क बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। भारत इस क्षेत्र में अपनी ख्याति का आनंद उठा रहा है। इससे आसियान के साथ भारत की राजनीतिक सुरक्षा, आर्थिक और सामाजिक-सांस्कृतिक सक्रियता और तेज़ होगी।