प्रधानमंत्री की सफल खाड़ी यात्रा

आलेख- पदम सिंह, समाचार विश्लेषक, ऑल इण्डिया रेडियो

अनुवाद- नीलम मलकानिया

जब से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता संभाली है, तब से मध्य एशिया के साथ भारत की सक्रियता में नाटकीय बदलाव आया है। पिछले चार वर्षों में यह संबंध सामरिक स्तर तक पहुंचे हैं। तीन देशों, फिलिस्तीन, संयुक्त अरब अमिरात और ओमान, की प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से दुनिया के एक बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र तक भारत की पहुंच मजबूत हुई है। फिलिस्तीन की सफल यात्रा के बाद श्री मोदी अबूधावी और दुबई पहुंचे। दुबई में प्रधानमंत्री छठे विश्व सरकारी सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि थे और वहां उन्होंने प्रौद्योगिकी और विकास विषय पर प्रधान वक्तव्य दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त अरब अमिरात के राष्ट्रपति और अबुधावी के शासक शेख खलीफा बिन जायद अल न्हायान और युवराज शेख मोहम्मद बिन जायद अल न्हयान से वार्ता की तथा संयुक्त अरब अमिरात के अमीर मोहम्मद बिन राशिद अल मखतूम से भी मुलाकात की।

दोनों पक्षों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की गई। संयुक्त अरब अमिरात के साथ भारत के ऊर्जा संबंध से जुड़ा समझौता एक सबसे अधिक अहम समझौता रहा।

भारत और संयुक्त अरब अमिरात के बीच श्रम शक्ति से जुड़े एक समझौता ज्ञापन पत्र पर भी हस्ताक्षर किए गए। अमिरात में 33 लाख भारतीय कामगार रहते हैं। रेल व्यवस्था के सुविधाजनक अध्ययन के लिए भारतीय रेल मंत्रालय और संयुक्त अरब अमिरात के संघीय सड़क और परिवहन प्राधिकरण विभाग के बीच समझौता ज्ञापन पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।

श्री मोदी ने कहा कि वे इस यात्रा को विस्तारित समुद्री पड़ोस की यात्रा के रूप में देखते हैं और खाड़ी देशों के साथ सक्रियता बनाने के संदर्भ में विदेश संबंधों में मुख्य प्राथमिकता के रूप में देखते हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने एक वक्तव्य में कहा कि अमिरात के साथ भारत के बहु-आयामी साझेदारी संबंध हैं। हम इन रिश्तों में नए आधार जोड़ रहे हैं। भारत आर्थिक स्तम्भ जोड़ रहा है और जब भी इस सरकार ने अरब जगत और आम तौर पर खाड़ी देशों से वार्ता की है, यही मुख्य विषय वस्तु रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने अमिरात में हिन्दू मंदिर के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध करवाने के लिए अबु-धावी के शासक और सरकार को धन्यवाद कहा।

यात्रा के अंतिम पड़ाव के तौर पर प्रधानमंत्री मोदी ने सुल्तान कबूस बिन सैयद के निमंत्रण पर मस्कट का दौरा किया। सुल्तान और प्रधानमंत्री मोदी ने परस्पर हित वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार साझे किए। यह वार्ता सौहार्द्रपूर्ण और मैत्रिपूर्ण माहौल में हुई। दोनों पक्षों ने इस पर जोर दिया कि हिन्द महासागर और अरब सागर के समुद्री पड़ोसी होते हुए भारत और ओमान ने निकट और गहरे ऐतिहासिक संबंधों का आनंद उठाया है। उन्होंने कहा कि एंतिहासिक रूप से निकट द्विपक्षीय संबंधों में जोशपूर्ण सांस्कृतिक आदान-प्रदान और समुद्री व्यापार भी शामिल है और ये संबंध परस्पर सम्मान तथा विश्वास पर आधारित सामरिक साझेदारी तक पहुंचे हैं।

दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के वर्तमान स्तर पर संतुष्टि व्यक्त की। विशेष तौर से मजबूत सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर और साथ ही अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
दोनों पक्षों ने यात्रा के दौरान विभिन्न समझौतों और 8 समझौता ज्ञापन पत्रों पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। इनके चलते दोनों देशों के बीच वर्तमान द्विपक्षीय सहयोग और मजबूत होगा और नए क्षेत्रों तक फैलेगा।

भारत और ओमान ने पश्चिम एशिया, मध्य एशिया और दक्षिण एशिया में सुरक्षा हालात के साथ ही साझे हित वाले क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार साझे किए। इस सफल और रचनात्मक विचार-विमर्श से दोनों पक्ष हिन्द उपमहाद्वीप के साथ खाड़ी क्षेत्र के स्थिरता और सुरक्षा संबंधी निकट अंतर-संबंधों की पहचान, दृष्टिकोण और हितों पर एक-दूसरे के रवैए को समझ पाए और सराहना कर पाए।

दोनों पक्षों ने आतंकवाद की वजह से विश्व शांति और सुरक्षा के लिए पैदा हुए साझे खतरे के बारे में वार्ता की और इसका सामना करने के लिए द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक रूप से साथ मिलकर काम करते रहने पर सहमति जताई। चाहे किसी के भी द्वारा किया जाए और कहीं भी किया जाए लेकिन सभी प्रकार के आतंकवाद की दोनों पक्षों ने निंदा की और यह घोषणा की है कि कहीं भी किसी भी तरह की आतंकी गतिविधि को न्यायसंगत नहीं ठहराया जाएगा।

पहले से ही मजबूत द्विपक्षीय संबंधों में प्रधानमंत्री की खाड़ी यात्रा से एक नया जोश जुड़ गया है।