13.06.2018

आलेखः- हिन्दी एकांश, विदेश प्रसारण प्रभाग, आकाशवाणी

देश के विभिन्न समाचार पत्रों ने विविध विषयों पर संपादकीय लिखे हैं और साथ ही कुछ सुर्खियां भी ध्यान आकर्षित करती हैं। आज समाचार पत्रों ने अलग-अलग खबर को अपनी सुर्खी बनाया है।

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के बीच कल सिंगापुर में ऐतिहासिक वार्ता को अधिकांश समाचार पत्रों ने पहली खबर बनाया है। दैनिक जागरण की सुर्खी है–कोरियाई प्रायःदीप में अमन का आगाज़, दुनिया ने ली राहत की सांस। पचास मिनट की मुलाकात में खत्म हुई अड़सठ साल की दुश्मनी। पत्र लिखता है–अमरीकी राष्ट्रपति ने दी उत्तर कोरिया को सुरक्षा की गारंटी, लेकिन बने रहेंगे प्रतिबंध। अमर उजाला के शब्द हैं–दुनिया की शांति का करारः ट्रम्प से सुरक्षा गारंटी के बदले किम का एटमी हथियार खत्म करने का वादा। जनसत्ता लिखता है–किम ने किया पूर्ण निरस्त्रीकरण का वादा।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर चलेगा मुकदमा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मानहानि मामले में अदालत में उनके खिलाफ आरोप तय होने का समाचार भी अधिकांश अखबारों के पहले पन्ने पर है। अमर उजाला की सुर्खी है–कोर्ट ने तय किये आरोप, राहुल बोले मैं बेकसूर, आरोप गलत।

दिल्ली के एम्स में भर्ती पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सेहत में सुधार की खबर भी लगभग सभी अखबारों में है। नवभारत टाइम्स की सुर्खी है–इन्फेक्शन ठीक होने तक रहेंगे एम्स में।

खुदरा महंगाई के चार महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंचने का समाचार हिंदुस्तान सहित कई अखबारों में है। पंजाब केसरी लिखता है–महंगाई से अभी राहत नहीं। दैनिक भास्कर की सुर्खी है–ईंधन और खाद्य पदार्थ के दाम बढ़ने से खुदरा महंगाई चार माह में सबसे ज़्यादा।

हिंदुस्तान ने मानसून की रफ्तार पर ब्रेक और इसमें देरी की खबर देते हुए लिखा है–एक सप्ताह के लिये ठिठका मॉनसून, बिहार, झारखंड का लम्बा हो सकता है मॉनसून का इंतज़ार, दिल्ली वालों का भी इंतज़ार बढ़ेगा।

‘कगार से वापसी’ शीर्षक मे नवभारत अपने संपादकीय से लिखता है कि मंगलवार को सिंगापुर में हुई अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की ऐतिहासिक मुलाकात पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी थीं। उत्तर कोरिया द्वारा एक के बाद एक किए गए मिसाइल और परमाणु परीक्षणों के चलते न केवल कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव असाधारण रूप से बढ़ गया था,

ऐसे माहौल में दोनों नेताओं में मुलाकात पर सहमति बनना खुद में बहुत बड़ी बात मानी गई थी। हालांकि सहमति बनने से लेकर वास्तव में मुलाकात होने तक कई पेचीदा मोड़ आए। कभी एक ने तो कभी दूसरे ने बैठक की संभावना से इनकार किया, मगर बात बिगड़ते-बिगड़ते आखिरकार बन गई अमेरिका ने जहां साउथ कोरिया से अपने सैनिकों की वापसी पर हामी भरी है, वहीं नॉर्थ कोरिया ने परमाणु निरस्त्रीकरण प्रक्रिया के निरीक्षण की बात मान ली है। किम ने एक महत्वपूर्ण मिसाइल इंजन परीक्षण स्थल को नष्ट करने की बात पहले ही स्वीकार कर ली थी, लेकिन ट्रंप ने कहा है कि उत्तर कोरिया पर लगे प्रतिबंध फिलहाल जारी रहेंगे।

इस शुरुआत के प्रति शुभकामना जताते हुए इससे एक याद रखने लायक सबक यह निकाला जा सकता है कि दुनिया के बड़े देशों के नेता अगर आपसी सहयोग और तालमेल के साथ आगे बढ़ें तो कुछेक असाध्य मसलों के भी शांतिपूर्ण हल निकाले जा सकते हैं।

राष्ट्रीय सहारा अपने संपादकीय शीर्षक ‘पूर्ण राज्य पर राजनीति’ से लिखता है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने करीब साढ़े तीन साल तक सरकार चलाने के बाद दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए आंदोलन करने की घोषणा की है। दिल्ली की सत्ता संभालने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ पहली मुलाकात में ही उन्होंने यह मुद्दा उठाया था। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की इस राय से असहमत होने का कोई कारण नजर नहीं आता कि नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए पूर्ण राज्य का मुद्दा उठा रही है आम आदमी पार्टी। हालांकि इस बात से कोई कैसे इनकार कर सकता है कि केंद्र सरकार और दिल्ली की सरकार के बीच वैचारिक मतभेद नहीं हैं। इस विवाद को केजरीवाल की आधारहीन राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा का परिणाम कहा जा सकता है। इसका सबसे ज्यादा खमियाजा दिल्ली की जनता को उठाना पड़ रहा है। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने का मुद्दा राजनीति के लिहाज से बहुत अहम है क्योंकि राज्य की तीन प्रमुख शक्तियां-पुलिस, नौकरशाही और भूमि पर नियंतण्रकेंद्र के पास हैं। भाजपा और कांग्रेस, दोनों पार्टियां इस मुद्दे का समर्थन करती हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी जिस गैर-जिम्मेदाराना ढंग से किसी भी मुद्दे को उठाती है, उसका कोई समर्थन नहीं कर सकता। बिजली और पानी सस्ता करके उसने कुछ गरीबों का दिल जरूर जीता है, लेकिन महज इनके भरोसे वह अगला चुनाव नहीं जीत सकती। इसीलिए वह आक्रामक ढंग से पुराने मुद्दे को उठा रही है। लेकिन पार्टी को याद रखना होगा कि काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती।