12.07.2018

देश के विभिन्न समाचार पत्रों ने विविध विषयों पर संपादकीय लिखे हैं और साथ ही कुछ सुर्खियां भी ध्यान आकर्षित करती हैं। आज समाचार पत्रों ने अलग-अलग खबर को अपनी सुर्खी बनाया है।

अन्नदाता और देश की आत्मा हैं किसान- पंजाब के मलोट में किसान कल्याण रैली में प्रधानमंत्री का सम्बोधन जनसत्ता सहित अधिकांश अखबारों की प्रमुख खबर है। देशबंधु ने प्रधानमंत्री के शब्द प्रकाशित किए हैं- सरकार के किसान हितैषी कदमों से कांग्रेस की नींद उड़ी। अर्थव्यवस्था की नई उड़ान- फ्रांस को पछाड़ कर भारत के छठी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की खबर पंजाब केसरी सहित कई अखबारों में है। हिन्दुस्तान ने गर्व शीर्षक से लिखा है- विश्व बैंक ने माना नोटबंदी, जी.एस.टी. के बाद तेजी से बढ़ी अर्थव्यवस्था की गति। उच्चतम न्यायालय में विभिन्न मुकदमों की सुनवाई पर भी अखबारों की नजर है। नवभारत टाइम्स लिखता है- समलैंगिकता अपराध है या नहीं- केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ा फैसला। बकौल अमर उजाला एक अन्य मुकदमे में सरकार ने अदालत में कहा शादी की पवित्रता के लिए व्यभिचार अपराध ही रहना चाहिए। धारा-497 खत्म करने से विवाह संस्था कमजोर होगी। दैनिक जागरण ने लिखा है- विवाहेत्तर संबंध में महिला को भी दंडित करने पर हो रहा विचार। ताजमहल की खूबसूरती नहीं बचा सकते तो ध्वस्त कर दो, हरिभूमि के अनुसार- सुप्रीम कोर्ट ने विश्व धरोहर के संरक्षण को लेकर केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई। दैनिक भास्कर की खबर है- स्वास्थ्य मंत्रालय ने दर्द निवारक वोवेरॉन इंजेक्शन के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है, किडनी पर पड़ रहा था असर। नेट तटस्थता पर मुहर- इंटरनेट इस्तेमाल पर अब भेदभाव नहीं- नई दूरसंचार नीति की घोषणा भी राजस्थान पत्रिका सहित अनेक अखबारों में है। अमर उजाला का कहना है- चालीस लाख रोजगार सृजन का लक्ष्य है नई नीति में। देश की पहली इंटरनेट टेलीफोन सेवा शुरू। राष्ट्रीय सहारा के आर्थिक पन्ने की खबर के अनुसार- बी.एस.एन.एल. की सेवा का लाभ 25 जुलाई से मिलेगा। कंपनी के यूजर्स विंग्स मोबाइल ऐप से देश भर में किसी भी नंबर पर कर सकेंगे कॉल।

‘अर्थव्यवस्था की दिशा’ शीर्षक से प्रकाशित अपने संपादकीय में ‘हिन्दुस्तान’ लिखता है कि, दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सूची में भारत का एक स्थान ऊपर चले जाना अच्छी खबर भले ही हो, लेकिन इसमें ऐसा कुछ नहीं है,  जिसे नई बात कही जा सके। भारतीय अर्थव्यवस्था के आगे बढ़ने की जो गति चल रही है, उसमें भारत का स्थान लगातार ऊंचा होना ही है, यह बात पूरी दुनिया काफी समय से समझ रही है। विश्व बैंक ने दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं के जो आंकड़े बुधवार को जारी किए हैं, उसके अनुसार पहले भारत इस फेहरिस्त में सातवें नंबर पर था, जो अब छठे नंबर पर पहुंच गया है। यह फेहरिस्त दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के 2017 के आंकड़ों पर आधारित है। भारत की जीडीपी पिछले दो-ढाई दशक से काफी तेजी से बढ़ रही है। पिछले एक दशक में तो यह लगभग दोगुनी ही हो गई है। अब इस फेहरिस्त में भारत से पहले अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देश ही हैं।  जिस देश में जितने युवा हाथ होते हैं, उस देश की उत्पादक संभावनाएं उतनी ही विस्तृत होती हैं। हालांकि इसका पूरा फायदा तभी उठाया जा सकता है, जब हम सभी युवाओं को रोजगार दे सकें, उन्हें जीडीपी की वृद्धि में भागीदार बना सकें। इस लक्ष्य को जल्द हासिल करना होगा। जिस दिन हम यह कर लेंगे, अभी जो तरक्की की रफ्तार है, उसे बहुत पीछे छोड़ देंगे। तब हमारी और पश्चिम की अर्थव्यवस्थाओं में प्रति व्यक्ति समृद्धि का जो अंतर है, वह भी शायद इतना नहीं रहेगा।

‘जनसत्ता’ ने ‘कामयाबी की मिसाल’ शीर्षक से प्रकाशित अपने संपादकीय में लिखा है कि, थाईलैंड में एक गुफा से बारह बच्चों और उनके कोच को सुरक्षित निकालने का अभियान अब पूरा हो चुका है। इस मिशन को कामयाब बनाने में जुटे दल और थाईलैंड सरकार की जितनी तारीफ की जाए, कम होगी। अठारह दिन से गुफा में चार किलोमीटर से भी ज्यादा अंदर पानी के बीच फंसे बच्चों और उनके कोच को सुरक्षित निकालने के लिये थाई नेवी सील और सेना के अलावा ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, आॅस्ट्रेलिया, जापान, म्यामां और चीन के विशेषज्ञ मोर्चे पर डटे रहे। यह एक बड़ा और जोखिम भरा अभियान था। जरा सी चूक, असावधानी, जल्दबाजी या कोई भी गलत फैसला गुफा में फंसे बच्चों के साथ बचावकर्मियों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता था। इसलिए पूरे अठारह दिन फूंक-फूंक कर कदम रखे गए। सभी को गुफा से सुरक्षित निकालने के लिए दुनिया भर में दुआएं मांगी जाती रहीं। सबसे बड़ी और अच्छी बात यह रही कि मिशन पूरा होने के बाद तक किसी ने भी, यहां तक कि थाईलैंड सरकार तक ने कोई श्रेय लेने की होड़ नहीं दिखाई। इस मामले में बच्चों के कोच की प्रशंसा की जानी चाहिए कि उन्होंने ध्यान के जरिए बच्चों का मनोबल बनाए रखा और उन्हें विचलित या प्रतिकूल मनोस्थिति का शिकार होने से बचा लिया। सारे बच्चों में और अपने भीतर आत्मविश्वास बनाए रखा। ऐसी घटनाएं-हादसे हमें सबक भी देकर जाते हैं। हालात कितने ही जटिल क्यों ना हों, हताश नहीं होना चाहिए।