भारत-दक्षिण कोरिया संबंध : भविष्योन्मुखी सहयोग की धारणा

भारत की एक्ट ईस्ट और दक्षिण कोरिया की नई दक्षिणी नीति के बीच सामंजस्य बनाए रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मून जे इन ने उन की चार दिवसीय भारत राजकीय यात्रा के दौरान दोनों देशों की आपसी विशेष सामरिक साझेदारी को और मजबूत किया है। भारत के ‘मेक इन इण्डिया’, ‘स्किल इण्डिया’, डिजिटल इण्डिया’, ‘स्टार्ट अप इण्डिया’ और ‘स्मार्ट सिटीज’ जैसी फ्लैगशिप पहलों में दक्षिण कोरिया जरूरी विकासीय साझेदार रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की 2015 में सोल यात्रा के दौरान अवसंरचनात्मक परियोजनाओं के लिए रियायती दरों और विकासात्मक सहयोग के लिए दस अरब अमरीकी डॉलर की वित्तीय सहायता दी है। दोनों देश कोरिया के आर्थिक विकास सहयोग कोष और निर्यात ऋण के माध्यम से अवसंरचनात्मक परियोजनाओं की तलाश कर रहे हैं।

दक्षिण कोरिया की विनिर्माण ताकत से भारत की ‘मेक इन इण्डिया’ पहल को लाभ मिला है। राष्ट्रपति मून की यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने सैमसंग की निर्माण इकाइ का उद्घाटन किया। इसमें 2020 तक 120 मिलियन मोबाइल फोन निर्माण की वार्षिक क्षमता हासिल की जाएगी। इससे न सिर्फ हजारों लोगों को मोबाइल मिलेगा बल्कि वैश्विक बाजार में फोन निर्यात भी किए जाएंगे। इससे पहले 2017 में किया मोटर्स ने आंध्र प्रदेश में एक विशाल मोटर वाहन निर्माण इकाई के लिये सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। इसके अतिरिक्त दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान चौथी औद्योगिक क्रांति के लिए नवीन तकनीक हासिल करने, इंटरनेट सुविधा बढ़ाने, कृत्रिम बौद्धिकता पाने, नवीनतम दूरसंचार सेवाएं पाने, सस्ते जल शोधन के लिए वैज्ञानिक शोध, तीव्र परिवहन व्यवस्था, शहरी अवसंरचनात्मक क्षेत्र, कौशल प्रशिक्षण और नवीकरण ऊर्जा, संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं और आधुनिक शोध व विकास सुविधा केन्द्र, लघु, मझौले और अति लघु उद्योगों के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा की तैयारी, गैर क्षेपण और सब्सिडी के लिए तथा अन्य क्षेत्रों में व्यापार परेशानियों को दूर करने उपाय तलाशने के लिए भी बहुत से समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

पोत निर्माण, अर्ध चालक, मोटर वाहन और इलैक्ट्रोनिक उत्पादों में दक्षिण कोरिया निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था है और भारत एक उभरता बाजार। भारत के आईटी साफ्टवेयर और दक्षिण कोरिया के आईटी हार्डवेयर, डिजायनिंग, इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग बढ़ रहा है। अगर भारत कोरिया के आयात बाजार मे प्रवेश करना चाहता है तो भारत के लिए यह जरूरी है कि प्राथमिक उत्पादों के साथ उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों पर ध्यान देते हुए इनमें विविधता लाई जाए। 2017 में जहां द्विपक्षीय व्यापार 20 अरब अमरीकी डॉलर का था वहीं कोरिया का भारत को निर्यात में एफडीआई संचयन 68 अरब अमरीकी डॉलर रहा। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते या सीईपीए को बेहतर बनाने के लिए वार्ता भी की। प्रसंस्कृत मछली, झींगा और घोंघा सहित अन्य क्षेत्रों में व्यापार उदारीकरण के मुख्य क्षेत्रों की पहचान करते हुए सीईपीए के संशोधित रूप से शीघ्र उत्पत्ति पैकेज तैयार करने संबंधी भी एक संयुक्त वक्तव्य तैयार किया गया।

भारत और दक्षिण कोरिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के मंच ने मोटरवाहन, अवसंरचना, सेवाएं, आईटी, इलैक्ट्रोनिक्स, स्टार्ट अप और नवाचार, रक्षा निर्माण तथा अन्य कई क्षेत्रों से जुड़े 6 कार्यकारी समूह बनाए गए हैं।

विशेष सामरिक साझेदारी पर जोर देते हुए दोनों नेताओं ने रक्षा उद्योग सहयोग बढ़ाने की बात की। इससे पहले 2017 में दोनों पक्षों ने पोतनिर्माण क्षेत्र में रक्षा उद्योग सहयोग के लिए एक अंतः – सरकारी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।

क्षेत्रीय स्तर पर दोनों देशों के संबंध लोकतंत्र, मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था, कानून, शांति, स्थिरता और सुरक्षा के लिए समान प्रतिबद्धता और नियम आधारित व्यवस्था जैसे साझे सार्वभौमिक मूल्यों पर टिके हैं। क्षेत्रीय शांति और स्थिरता में योगदान करने के लिए दोनों देशों ने तीसरे देश में सहयोग करने की व्यवस्था पर काम करने का फैसला किया है और अफगानिस्तान से इसकी शुरूआत की जाएगी। पूर्वोत्तर एशिया और दक्षिण एशिया के बीच अप्रसार सम्पर्क को रेखांकित करते हुए भारत और दक्षिण कोरिया ने आतंकियों और असामाजिक तत्वों के हाथों में हथियार पड़ने से रोकने के लिए विध्वंसक हथियारों के अप्रसार और आपूर्ति व्यवस्था को रोकने में सहयोग करने का संकल्प व्यक्त किया। कोरियाई प्रायद्वीप में अपरमाणुकरण और स्थायी शांति में साथ देने के लिए भारत ने अंतःकोरिया सम्मेलन का स्वागत किया। अतीत में कोरियाई युद्ध में भारत की ऐतिहासिक भूमिका और वर्तमान समय में कोरियाई शांति प्रक्रिया एक पक्ष की भूमिका के रूप में श्री मोदी और श्री मून ने विशाल हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सामरिक साझेदारी को और गहरी करने पर सहमति जताई।

आलेख- डॉ. तितली बसु, पूर्व और दक्षिण पूर्व एशिया के सामरिक मामलों की विश्लेषक

अनुवादक- नीलम मलकानिया