संसद ने अनुसूचित जाति और जनजाति अत्‍याचार निवारण संशोधन विधेयक पारित किया। 

संसद ने अनुसूचित जाति और जनजाति-अत्‍याचार निवारण संशोधन विधेयक 2018 पारित कर दिया है। राज्‍यसभा ने इसे ध्‍वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही मंजूरी दे चुकी है। इसका उद्देश्‍य अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय को न्‍याय देना है। संशोधित विधेयक में दलितों के प्रति अत्‍याचार करने वालों की गिरफ्तारी के लिए पूर्व अनुमति का प्रावधान हटा दिया गया है।
सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार गरीबों के कल्‍याण और दलितों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्‍होंने कहा कि इस विधेयक में अनुसूचित जातियों और जनजातियों पर अत्‍याचार से संबंधित मामलों के लिए विशेष अदालतें बनाने का प्रावधान किया गया है। उन्‍होंने विपक्ष के इन आरोपों को नामंजूर कर दिया कि यह विधेयक किसी दवाब के तहत लाया गया है।
उन्होंने कहा कि ये कहा जा रहा है कि ये विधेयक में जो संशोधन ला रहे हैं वह किसी दबाव के कारण। मैं कहना चाह रहा हूं कि जब सरकार बनी थी, नरेन्‍द्र मोदी जी ने कहा था कि उनकी सरकार गरीबों को समर्पित सरकार है , पिछड़े वर्ग के लिए समर्पित सरकार है, उस समय कौन सा दबाव था।
इससे पहले, कांग्रेस की कुमारी शैलजा ने भोजनावकाश के बाद चर्चा शुरू करते हुए भाजपा पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया।