14.09.2018

देश के विभिन्न समाचार पत्रों ने विविध विषयों पर संपादकीय लिखे हैं और साथ ही कुछ सुर्खियां भी ध्यान आकर्षित करती हैं। आज समाचार पत्रों ने अलग-अलग खबर को अपनी सुर्खी बनाया है। भगोड़े कारोबारी विजय माल्‍या को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्‍यारोप का दौर, दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी की जीत आज के अखबारों की सुर्खियां हैं।

नवभारत टाइम्‍स लिखता है – माल्‍या पर महाजंग, कांग्रेस ने लगाया जेटली पर भगोड़े से सांठगांठ का आरोप। बीजेपी बोली – यूपीए ने दिया था किंगफिशर को फायदा। हिन्‍दुस्‍तान की सुर्खी है – पीएम-कांग्रेस अध्‍यक्ष खुद मोर्चे पर। पत्र ने प्रधानमंत्री का बयान दिया है – सरकार के खिलाफ दुष्‍प्रचार करने में जुटा है विपक्ष। साथ ही राहुल गांधी का बयान है – माल्‍या पर सरकार झूठ बोल रही। जनसत्‍ता कहता है – माल्‍या-जेटली मुलाकात के दावे पर घमासान।

दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की कामयाबी की ख़बर देते हुए नवभारत टाइम्‍स ने लिखा है – अध्‍यक्ष समेत तीन पद ए.बी.वी.पी. ने जीते, एक पद एन.एस.यू.आई. को मिला।

हिन्‍दुस्‍तान ने उच्‍चतम न्‍यायालय का फैसला दिया है – बिना बीमा वाले वाहन से दुर्घटना होने पर वाहन बेचकर पीड़ि‍त को मुआवज़ा दिया जाए।

अमर उजाला की पहली ख़बर है – गणेश उत्‍सव पर यूपी को दहलाने की साजिश नाकाम, हिजबुल आतंकी कानपुर से गिरफ्तार।

हलाला के खिलाफ याचिका देने वाली महिला पर तेजाब से हमला अमर उजाला के पहले पृष्‍ठ पर है।

गैंगरेप के आरोपी ज्‍योतिषाचार्य आशु महाराज की गाजियाबाद से गिरफ्तारी की ख़बर अखबारों ने पहले पन्‍ने पर दी है।

हिन्‍दुस्‍तान ने पहले पृष्‍ठ पर उत्‍साहजनक ख़बर बॉक्‍स में दी है – हिंदी डिस्‍लेक्सिया से निपटने में दवा का काम कर रही। शोधकर्ता डॉक्‍टर नंदिनी ने इसका कारण बताया है कि डिस्‍लेक्सिया से पीड़ि‍त बच्‍चे भारतीय भाषाएं बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।

जनसत्‍ता ने पहले पृष्‍ठ पर सबसे नीचे हिंदी या हिंग्लिश भी बना सकती है आपको डॉक्‍टर-शीर्षक से बताया है कि मध्‍यप्रदेश में चिकित्‍सा पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं अब हिंदी में भी।

सनसनी का सहारा शीर्षक से प्रकाशित अपने संपादकीय में दैनिक जागरण लिखता है कि वित्तमंत्री अरुण जेटली से मुलाकात का दावा कर सनसनी फैलाने के उपरांत लंदन में रह रहे कारोबारी विजय माल्या ने जिस तरह यह माना कि यह तथाकथित मुलाकात संसद के गलियारे में अचानक हुई थी उसके बाद उस हल्ले-हंगामे का कोई मतलब नहीं रह जाता जो विपक्ष और खासकर कांग्रेस की ओर से मचाया जा रहा है। यह हास्यास्पद है कि वित्तमंत्री की ओर से यह स्पष्ट किए जाने के बाद भी उन्हें कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की जा रही है कि माल्या ने संसद परिसर में उनसे चलते-चलाते अनौपचारिक तौर पर अपनी बात कही थी।

यह सही है कि माल्या के लंदन भाग जाने से सरकार की किरकिरी हुई, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि उनके खिलाफ शिकंजा कसने का काम भी इसी सरकार ने किया है। विजय माल्या की घेरेबंदी कर उन्हें केवल भारत लाने की ही कोशिश नहीं हो रही है, बल्कि उनसे बकाये कर्ज की वसूली के लिए भी हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। फिलहाल यह कहना कठिन है कि माल्या को कब तक भारत लाया जा सकेगा, लेकिन यह सबको पता है कि उन्हें नियमों के विरुद्ध कर्ज देने का काम कब हुआ।

बंद गली में लड़कियां शीर्षक से प्रकाशित अपने संपादकीय में नवभारत टाइम्सने लिखा है कि महिलाओं की खुदकुशी पर आई लैंसेट पब्लिक हेल्थ जर्नल की रिपोर्ट खास तौर पर भारत के लिए चिंता पैदा करने वाली है। इसके मुताबिक पूरी दुनिया में आत्महत्या करने वाली 1000 महिलाओं में 366 भारतीय होती हैं। हालांकि आंकड़ों के मुताबिक, 1990 से लेकर 2016 के बीच भारत में आत्महत्या करने वाली महिलाओं की तादाद घटी है, बावजूद इसके, वैश्विक स्तर पर महिला खुदकुशी के आंकड़ों में हमारा योगदान अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है।

देश में आत्महत्या का रास्ता पकड़ने वाली महिलाओं में 71.2 फीसदी हिस्सा 15 से 39 साल के आयु वर्ग का होता है। रिपोर्ट इस तथ्य को खास तौर पर रेखांकित करती है कि खुदकुशी करने वाली महिलाओं में ज्यादातर शादीशुदा होती हैं। ध्यान देने की बात है कि 1990 से 2016 के बीच की जो अवधि अध्ययन के लिए चुनी गई है, भारत में उस दौरान लड़कियां न केवल शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ीं बल्कि स्त्री-पुरुष संबंधों के ढांचे में भी अहम बदलाव देखने को मिले। बड़े शहरों में लिव-इन जैसे रिश्ते आम होते गए, तो छोटे शहरों में भी रिश्तों का खुलापन आया।

अन्य देशों का अनुभव बताता है कि जरा सी मदद और सही समय पर थोड़ी सी हौसला अफजाई उनकी मुश्किल आसान कर सकती है। बस इसी जरा सी मदद का इंतजाम सरकार और समाज को करना है।