बांग्लादेश के लिए भारत की रेल और बिजली संचरण परियोजनाएँ

एक प्रभावशाली गतिविधि के रूप में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उन की बांग्लादेशी समकक्ष शेख़ हसीना ने बंगाल की मुख्य मंत्री ममता बैनर्जी और त्रिपुरा के मुख्य मंत्री बिप्लब कुमार देब के साथ संयुक्त रूप से तीन विकासात्मक परियोजनाओं का उद्घाटन किया है।

बांग्लादेश के विकास की परियोजनाओं में भारत से बांग्लादेश को 500मेगावाट की अतिरिक्त बिजली आपूर्ति और दो रेल परियोजनाएँ शामिल हैं। अखाउरा-अगरतला रेल संपर्क और बांग्लादेश रेलमार्ग के कुलाउरा-शाहबाज़पुर हिस्से की पुनर्बहाली। इन का उद्देश्य दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी देशों के बीच व्यापार और वाणिज्य के साथ रेलवे सम्पर्क सुधारना है।

वीडियो कॉंफ्रेंस के माध्यम से तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन नई दिल्ली और ढाका के बीच सौहार्द्रपूर्ण संबंधों की मज़बूती दर्शाता है। इस समारोह के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया भारत और बांग्लादेश के प्रगाढ़ होती मैत्री, बेहतर सम्पर्क और सुधरता जीवन स्तर। इस से इन तीनों परियोजनाओं का महत्व पता चलता है।

उद्घाटन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि बांग्लादेश में मौजूदा भेरामरा और भारत में बहरामपुर संचरण मार्गें के माध्यम से बांग्लादेश को अतिरिक्त 500मैगावाट बिजली आपूर्ति करने का निर्णय भारत की इस इच्छा को रेखांकित करता है कि 2021 तक मध्यम आय वाले देश और 2041 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की बांग्लादेश की यात्रा में भारत सहभागी बनना चाहता है।

श्री मोदी ने प्रधानमंत्री हसीना के आगामी दो दशकों में अपने देश को मध्यम आय वर्ग वाले और फिर एक विकसित देश बनाने के विकासात्मक लक्ष्य की सराहना की। भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और बांग्लादेश के विदेश मंत्री भी नई दिल्ली और ढाका में वीडियो सम्मेलन में शामिल हुए।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विद्युत संचरण सम्पर्क पूरे होने से बांग्लादेश को होने वाली बिजली की कुल आपूर्ति अब 1.16 गिगावाट हो गई है। उन्होंने मेगावाट से गिगावाट तक की यात्रा को भारत और बांग्लादेश के संबंधों का सुनहरा युग कहा।

अखाउरा-अगरतला रेल सम्पर्क के बारे में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के सीमा-पार सम्पर्कों को इस से नया आयाम मिलेगा। उन्होंने कहा कि निकट संबंध और जन से जन का सम्पर्क दोनों देशों के विकासऔर सम्पन्नता को नई उचाइयों तक लेकर जाएगा।

उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से इस लक्ष्य की दिशा में लगातार प्रगति होती रही है और इन परियोजनाओं के उद्घाटन से भारत और बांग्लादेश ने दोनों देशों के विद्युत और रेल सम्पर्क भी बेहतर कर दिए हैं। बांग्लादेश को अतिरिक्त ऊर्जा की आपूर्ति और त्रिपुरा में अगरतला तथा बांग्लादेश में कुलाउरा-शाहबाज़पुर हिस्से की पुनर्बहाली दोनों देशों के लिए लाभदायक स्थिति है। दोनों देशों के एक-दूसरे के विकास से लाभ मिलेगा।

इन रेल परियोजनाओं द्वारा भारत के पूर्वोत्तरी राज्यों को बांग्लादेश और दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ा जाना है ताक़ि रेलमार्ग द्वारा देश के अभी तक नज़रअंदाज़ हुए राज्यों में व्यापार और विकास किया जा सके।

इस रेलमार्ग की बहाली के बाद यह प्रशांत पार रेल परियोजनाओं का अहम हिस्सा होगी जो दक्षिण एशिया को दक्षिणपूर्व एशियाई देशों से जोड़ेगी। आशा है कि 15.5 किलोमीटर लंबा अखाउरा-अगरतला रेल मार्ग दुनिया का व्यस्ततम पत्तन माने जाने वाले चिट्गौंग पत्तन के माध्यम से भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार बढ़ाएगा। सुश्री शेख़ हसीना की 2010 में भारत यात्रा के दौरान तैयार इस रेल परियोजना से त्रिपुरा से असम और फिर पश्चिम बंगाल के बीच यात्रा का समय और दूरी बहुत कम हो जाएगी क्योंकि इससे बांग्लादेश के अखाउरा से कोलकाता पहुँचा जा सकेगा। अगर सब नियोजित तरीक़े से चलता रहा तो इस परियोजना का दो वर्षों के समय में संचालन शुरू हो जाएगा।   

आलेख- दीपांकर चोक्रवोरती, विशेष संवाददाता, द स्टेट्समैन

अनुवाद- नीलम मलकानिया