ऊर्जा क्षेत्र में अगुआई करता भारत

नई और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन या आईएसए की पहली, हिन्द महासागर रिम संगठन ऊर्जा मंत्रीगण स्तरीय दूसरी बैठक और वैश्विक रि-निवेश की दूसरी बैठक और प्रदर्शनी का आयोजन किया। इन तीनों आयोजनों का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया। इनका उद्देश्य अक्षय ऊर्जा का स्तर बढ़ाने के लिए विश्वस्तरीय प्रयासों को तेज़ करना और भारतीय ऊर्जा पक्षधारकों से वैश्विक निवेश समुदाय को जोड़ना था।

दूसरी वैश्विक रि-निवेश भारत-आईएसए साझेदारी अक्षय ऊर्जा निवेश बैठक और प्रदर्शनी में 77 देशों के बीस हज़ार से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए जिन में से चालीस मंत्रीमंडल स्तर के थे। आयोजन में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि, बहुपक्षीय विकास बैंकों के अध्यक्ष, वैश्विक कोष, अंतरराष्ट्रीय वित्त संस्थानों के प्रतिनिधि और कोर्पोरेट जगत के प्रतिनिधियों ने शिरकत की। रि-निवेश 2018 के दौरान नौ देशों के सत्र का आयोजन फ्राँस, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, यूके, फिनलैंड और यूरोपीय संघ जैसे रि-देशों की अगुआई से शुरु हुआ।

वैश्विक सौर ऊर्जा क्षेत्र में आईएसए द्वारा निभाई जा सकने वाली भूमिका को उजागर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आईएसए जलवायु न्याय करने का एक मंच है। हम भावी पीढ़ियों को यह उपहार दे रहे है। भविष्य में यह गठबंधन वही रूप ले लेगा जो आज दुनिया में ओपेक का है।

सौर उर्जा वह भूमिका निभाएगी जो आज तेल के कुएँ निभा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि आईएसए संयुक्त राष्ट्र के लिए बहुत अहमियत रखता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आईओआरए देश भी ऐसी ही ऊर्जा चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और इसलिए हमें अक्षय ऊर्जा पर ध्यान देते हुए इनका समाधान निकालना होगा। भारत ने 2030 तक ग़ैर जीवाश् स्रोतों से ऊर्जा का चालीस प्रतिशत हिस्सा हासिल करने का लक्ष्य रखा है और 2022 तक हम 175 गीगा वाट का नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लेंगे। उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री नोदी ने एक दुनिया, एक सूरज और एक ग्रिड नाम का मुख्य लक्ष्य सामने रखा।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुतेरेस ने ज़ोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन आज हमारे अस्तित्व के लिए प्रत्यक्ष ख़तरा है। यह स्पष्ट है कि हम वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्रांति के गवाह हैं हालांकि अभी भी लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए राजनीतिक प्रतिबद्धताओं की कमी है, जिस के लिए और अधिक महत्त्वाकांक्षी लक्ष्यों की ज़रूरत है।

केंद्रीय विद्युत और अक्षय ऊर्जा मंत्री राजकुमार सिंह ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री ने हमें एक दुनिया, एक सूरज और एक ग्रिड के रूप में एक अन्य चुनौती दी है। यह संभव है और हम इसे हासिल कर लेंगे।

21 देशों ने अक्षय ऊर्जा पर दिल्ली घोषणापत्र को स्वीकार किया है जो हिन्द महासागर तटीक्षेत्रों में, यहाँ अक्षय ऊर्जा के साझे एजेंडा के विकास के लिए क्षेत्रीय क्षमता वर्धन को बढ़ावा देने के लिए आईओआरए सदस्य देशों के सहयोग की माँग करता है।

भारत का लक्ष्य 2022 पूरा होने के लिए लगभग 76 अरब अमरीकी डॉलर निवेश की ज़रूरत है और इसके लिए सार्वजनिक फंड ही पर्याप्त नहीं है। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी के सपने को सच बनाने के लिए नए प्रकार की नीजि पूँजी की ज़रूरत है। स्वच्छ ऊर्जा, अक्षय ऊर्जा क्षेत्रों को जल्द अदायगी के लिए शीघ्र भुगतान व्यवस्था स्थापित करना और संगठित प्रयास का मानक तय करने के लिए सामरिक वैश्विक साझेदारी ज़रूरी है। जलवायु परिवर्तन जैसी भयानक चुनौती का सामना करने के लिए अफ़्रीका समेत महाद्वीपों के बीच सहयोग और शीघ्र राजनीतिक निर्णय लिए जाने की ज़रूरत है ताकि अक्षय ऊर्जा का विकास किया जा सके। गो ग्रीन प्रयास में भारत ने 2015 से 2018 तक, पिछले तीन वर्षों में दुनिया को नई राह दिखाई है और हमारे अक्षय ऊर्जा क्षेत्र ने 81 प्रतिशत वृद्धि हासिल की है। 2030 तक ग़ैर जीवाश् स्रोतों से ऊर्जा का चालीस प्रतिशत हिस्सा हासिल करने और 2022 तक 175 गीगा वाट नवीकरणीय ऊर्जा हासिल करने का भारत का लक्ष्य सिर्फ़ एक महत्वाकांक्षा ही नहीं है बल्कि एक हासिल करने योग्य उपलब्धि भी है। भारत अक्षय ऊर्जा का एक बड़ा बाज़ार है और दुनिया भर से कंपनियाँ यहाँ निवेश करके ख़ुद भी विकसित हो सकती हैं।

आलेख- योगेश सूद, पत्रकार

अनुवाद- नीलम मलकानिया