संगीतकार प्यारेलाल रामप्रसाद शर्मा

संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साझेदार प्यारेलाल  रामप्रसाद शर्मा का जन्म तीन सितम्बर 1940 को हुआ । प्यारेलाल के पिता रामप्रसाद शर्मा एक तुरही वादक थे, जिनसे प्यारेलाल ने अपनी बुनयादी शिक्षा हासिल की । प्यारेलाल ने आठ साल की उम्र में ही वायोलिन सीखना शुरू कर दिया था और वो रोजाना आठ से बारह घंटे उसका अभ्यास किया करते थे। उन्होंने वायोलिन की शिक्षा गोवा के एक संगीतकार एंथनी गोंजाल्विस से प्राप्त की । अमर अकबर एंथनी फिल्म का मशहूर गाना ‘माय नेम इस एंथनी गोंजाल्विस’ प्यारेलाल द्वारा अपने गुरु को दी गयी एक श्रद्धांजलि माना जाता है । बारह वर्ष की उम्र तक पहुँचने पर, उनके घर की आर्थिक हालात ख़राब रहने के चलते उन्हें मजबूरन स्टूडियो में काम करना पड़ा । प्यारेलाल की मुलाकात लक्ष्मीकांत से दस साल की उम्र में, मंगेशकर परिवार द्वारा चलायी जा रही बच्चों की अकादमी सुरील कला केंद्र में हुई । समान उम्र और आर्थिक स्थिति के चलते लक्ष्मीकांत और प्यारेलाल अच्छे दोस्त बन गये। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने साथ मिलकर पहली बार 1963 में आई फिल्म पारसमणि को अपने संगीत से सजाया, जिसके सभी गाने बहुत लोकप्रिय हुए, जैसे ‘हँसता हुआ नूरानी चेहरा’ और  ‘वो जब याद आये’ । लता मंगेशकर और मोहमद रफ़ी जैसे बड़े गायकों ने लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के साथ ही अपने अधिक्तर गाने गाये । लक्ष्मीकांत प्यारेलाल को सात बार सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया । उन्हें दोस्ती, मिलन, जीने की राह, अमर अकबर एंथनी, सत्यम शिवम सुंदरम, सरगम और कर्ज़ के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का  पुरुस्कार मिला ।