12.06.2019

आज के हिन्दी समाचार पत्रों ने अलग-अलग विषयों पर सम्पादकीय प्रकाशित किए हैं और समाचार पत्रों की सुर्खियाँ भी ध्यान आकर्षित करती हैं | वायुसेना के लापता विमान का मलबा आठ दिन बाद दिखाई देने को लगभग सभी अख़बारों ने सुर्खियों में दिया है।  कुछ विशेष जगहों पर विमानों के दुर्घटनाग्रस्‍त होने पर जानकारीपूर्ण विश्‍लेषण भी अख़बारों ने दिये हैं। दैनिक भास्‍कर ने लिखा है- 140 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलने वाली हवा, घाटियों के बीच ऐसी स्थिति बना देती है कि उड़ान बेहद कठिन हो जाती है। विश्‍व में कई जगहों पर ऐसी स्थितियों के बाद विमान लापता होते हैं। ईस्‍ट अरूणाचल में अमरीका का एक विमान ऐसी ही परिस्थितियों में 75 वर्ष पूर्व दूसरे विश्‍व युद्ध के दौरान लापता हुआ था और इसी वर्ष फरवरी में मिला।

अरब सागर से उठ रहे चक्रवाती तूफान के लिए पहले से की जा रही बचाव तैयारियों और गृहमंत्री के तटीय इलाकों पर लोगों की सुरक्षा के निर्देशों का ज़िक्र भी लगभग सभी अख़बारों में है।

समूचे उत्‍तर भारत में भीषण गर्मी की ख़बर को लगभग सभी अख़बारों ने अहमियत दी  है। देशबंधु ने लिखा है- सुस्‍त मॉनसून किसानों पर भारी पड़ सकता है। कुछ अख़बारों का अनुमान है कि दिल्‍ली, हरियाणा और पंजाब में गर्मी की तेज़ी में कमी आयेगी।

“नौकरशाही की चमक” शीर्षक से नवभारत टाइम्स अपने एक सम्पादकीय में लिखता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौकरशाही से सीधा संवाद करने और उसे गतिशील बनाए रखने की नीति को अपने दूसरे कार्यकाल में भी जारी रखा है। उन्होंने सोमवार को विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों के साथ बैठक की और उन्हें भविष्य के लिए ज़रूरी दिशा-निर्देश दिए। सबसे पहले तो प्रधानमंत्री ने उनके कामकाज की तारीफ की और अपनी चुनावी सफलता का श्रेय भी उन्हें दिया। उन्होंने साफ कहा कि आप सभी ने जिस कड़ी मेहनत से काम पूरा किया, उसी का परिणाम था कि चुनाव में हमारे पक्ष में सकारात्मक वोट पड़े। उन्होंने अधिकारियों को अपने-अपने मंत्रालय के लिए पांच साल की योजना तैयार करने को कहा और आश्वस्त किया कि योजनाओं को सौ दिनों के भीतर मंजूरी मिल जाएगी।

अभी तक सभी अफसरों की नियुक्ति संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के जरिए होती रही है, लेकिन सरकार अब नीति आयोग के जरिए भी अधिकारियों को नियुक्त करना चाहती है। सरकार का मानना है कि विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपने-अपने फील्ड में सामान्य आईएएस की तुलना में बेहतर रिज़ल्ट दे सकते हैं। न्यूज़ीलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका में यह प्रयोग काफी सफल रहा है। उम्मीद की जानी चाहिए कि मोदी सरकार भारतीय नौकरशाही के ढांचे और माइंडसेट में बदलाव लाएगी जिसका लाभ देश के हर वर्ग को मिलेगा।

हिंदुस्तान अपने सम्पादकीय में “भ्रष्ट अधिकारी” शीर्षक से लिखता है कि पहली नज़र में यह एक सामान्य सी ख़बर ही है। सरकार ने राजस्व विभाग के 12 वरिष्ठ अधिकारियों को भ्रष्टाचार और यौन उत्पीड़न के आरोपों में बाहर का रास्ता दिखा दिया है। बेशक, यह ज़रूरी कदम है, और सराहनीय भी। इन अधिकारियों के खिलाफ लगे आरोपों के विस्तार में जाएं, तो पता चलता है कि ये सारे मामले न सिर्फ गंभीर हैं,  बल्कि पूरी व्यवस्था सारी जानकारी और मामलों की गंभीरता को समझते हुए भी लगातार चल रही थी। मसलन, इन 12 अधिकारियों में शामिल एक आयकर आयुक्त का मामला ही लें। उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोप सही पाए गए थे और इन आरोपों के कारण उन्हें दस साल पहले ही निलंबित कर दिया गया था। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार कानून के तहत मामला दर्ज कराया गया, जो अभी तक चल रहा है। यह अकेला मामला ही बता देता है कि भ्रष्टाचार रोकने की हमारी व्यवस्था में कितने छिद्र हैं।

ये मामले बता रहे हैं कि प्रशासन को भ्रष्टाचार और यौन उत्पीड़न से मुक्त बनाने का काम कितना जटिल है। ऐसे मामलों को निपटाने में कई बरस लगते हैं और न तो समय रहते सज़ा मिल पाती है और न सज़ा बाकी लोगों के लिए सबक बन पाती है। भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए सबसे ज़रूरी यह है कि मामलों का निपटारा जल्दी हो और भ्रष्टाचारियों के लिए सज़ा की पक्की व्यवस्था बने। अधिकारियों को सेवामुक्त किया जाना स्वागत योग्य है, पर प्रशासन से भ्रष्टाचार मिटाने के लिए इससे आगे बढ़कर बहुत कुछ करने की ज़रुरत है।