18.06.2019

आज के हिन्दी अख़बारों ने विभिन्न विषयों पर सम्पादकीय प्रकाशित किए हैं। समाचार पत्रों की सुर्खियों में भी अनेक विषयों को प्राथमिकता दी गई है। 17वीं लोकसभा के पहले सत्र की शुरुआत और पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों की सात दिन से जारी हड़ताल ख़त्‍म होने की ख़बर आज के अख़बारों की अहम सुर्खियां हैं। दैनिक जागरण की पहली ख़बर है – सत्र की शुरुआत के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी का संदेश, विपक्ष को दी जाएगी पूरी अहमियत। जनसत्‍ता ने लिखा है – प्रधानमंत्री ने दिया नया मंत्र। न पक्ष, न विपक्ष, केवल निष्‍पक्ष। इकोनॉमिक टाइम्‍स की सुर्खी है – “मैसेज कहां से शुरू हुआ, वॉट्सऐप को बताना होगा।” सरकार ने फेसबुक के मेसेजिंग प्‍लेटफार्म को दिया हर मेसेज को डिजिटली फ्रिंगरप्रिंट करने का सुझाव। नवभारत टाइम्‍स की बड़ी ख़बर है – जागी ममता, राज़ी डॉक्‍टर, पर हड़ताल से मरीज रहे बेहाल।

राष्ट्रीय सहारा ने “स्विस बैंक से सूचना” शीर्षक से अपने सम्पादकीय में लिखा है कि स्विस बैंक से सूचना देशी बैंकों में काला धन को लेकर आम भारतीयों के लिए अच्छी ख़बर यह है कि उसकी कुछ सूचनाएं भारत आने लगी हैं। दरअसल, नरेन्द्र मोदी सरकार ने कई देशों से ऐसे समझौते किए थे, जिनके तहत एक निश्चित समय के बाद सूचनाएं अपने-आप भारत को मिलनी थीं। स्विट्जरलैंड के साथ भी ऐसा ही समझौता था। हमारे यहां स्विस बैंकों में कथित काला धन एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है। सूचना है कि स्विट्जरलैंड की ओर से करीब 50 भारतीयों के बैंक खातों से संबंधित सूचनाएं भारत को मिलने वाली हैं। उसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। दरअसल, ऐसी सूचना देने के पहले स्विट्जरलैंड अपने कानूनों का ध्यान रखते हुए ऐसे लोगों को नोटिस जारी कर उनसे कुछ प्रश्न करता है। उसके बाद ही सूचनाएं प्रदान की जाती हैं। वह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जिन लोगों के बारे में सूचना मिल रही है; उनमें ज्यादातर प्रापर्टी, वित्तीय सेवा, प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, पेंट, घरेलू साज-सज्जा, कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान और रत्न एवं आभूषण के कारोबार से जुड़े व्यवसायी और कंपनियां शामिल हैं। मोदी सरकार ने काला धन को लेकर कड़े कानून बनाए, जिससे इनकी सूचना लेना और कार्रवाई करना संभव हुआ है। किंतु यह जानना भी आवश्यक है कि वाकई कितना काला धन विदेशी बैंकों में है? काला धन पर बना विशेष जांच दल सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में काम कर रहा है। अभी तक काफी कम राशि की सूचना उसके पास पहुंची है। तो देखते हैं कुल कितने के चेहरों से पर्दा उठता है।

दैनिक भास्कर ने “मोदी सरकार और टीम इंडिया की रफ़्तार एक जैसी” शीर्षक से अपने सम्पादकीय में लिखा है कि फिलहाल मोदी सरकार और इंडियन क्रिकेट टीम की रफ़्तार एक सी है होश में भी है जोश में भी है और परफॉरमेंस भी उम्दा है | दूसरी जीत के बाद मोदी सरकार में परिपक्वता और ज्यादा दिखाई दे रही है | सरकार क़सम खा रही है कि विपक्ष का एक-एक शब्द उसके लिए क़ीमती होगा | वह विपक्ष से विचार-विमर्श करना चाहती है कि सरकारी ख़र्चा बचाने के लिए क्यों न विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ कराने की नीति बनाई और अपनाई जाए | यह सब क़दम सरकार की गंभीरता बताते हैं और फोकस भी | हकीक़त में क्या होता है, यह बाद में पता चलेगा | बहरहाल, रूठे नितीश कुमार को मनाने की ज़्यादा कोशिश नहीं हो रही है | इसकी ज़रुरत भी ज़्यादा महसूस नहीं की जा रही | नितीश अपनी जगह सही हैं और भाजपा अपनी जगह | नितीश का तर्क है कि दो सीटों वाले अकाली दल का भी एक मंत्री और सोलह सीटों वाले जदयू से भी एक | यह कौन सा न्याय है ? जहाँ तक भाजपा का सवाल है, उसकी सीटें तीन सौ से भी ज़्यादा हैं | सही है, वे एनडीए को फिर भी बचाए रखना चाहते हैं, लेकिन जदयू का मामला अभी इतना ज़रूरी नहीं है | फिलहाल ताज़ा चर्चा देश में अगले आम बजट को लेकर चल रही है जो अगली पांच जुलाई को लोकसभा में पेश होने वाला है | उधर ममता बनर्जी केंद्र सरकार के चुने जाने के बाद से ही लगातार मुसीबतों से घिरी हुई है | उन्हें सांस तक लेने की फुर्सत नहीं है | कभी उन्हें धरने पर बैठना पड़ रहा है, कभी डॉक्टर्स हड़ताल से जूझना पड़ रहा है | कुल मिलकर अगले विधानसभा चुनाव की चिंता उनके सर पर आकर बैठ गई है |