भारत-संयुक्त अरब अमीरात संबंध नई ऊँचाई पर

दोनों देशों के संबंध जिस मधुर स्थिति में हैं उसका इससे स्पष्ट और गहरा संकेत कोई और नहीं हो सकता कि पिछले पाँच वर्षों में संयुक्त अरब अमीरात अर्थात यूएई के विदेश मंत्री पाँच बार भारत की यात्रा कर चुके हैं। 7 से 9 जुलाई के बीच यूएई के विदेश मामलों के मंत्री अब्दुल्ला बिन ज़ायद अल नाह्यान की यात्रा पिछले पाँच साल में उनकी पाँचवीं लगातार यात्रा थी जिससे, निःसंदेह, दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध अधिक घने होंगे और ये ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा राजनैतिक संबंध नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर सकेंगे। ये सब तब आरम्भ हुआ जब 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में 34 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने यूएई की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सामरिक साझेदारी का शुभारंभ हुआ। भारत के सामरिक पेट्रोलियम पुनर्संरक्षण कार्यक्रम में भाग लेने वाला पहला देश भी यूएई ही है। यूएई के विदेश मंत्री की वर्तमान यात्रा से दोनों देशों के वर्तमान संबंध बहुआयामी बन सकेंगे क्योंकि उनके पास अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय का भी कार्यभार है।

यूएई के विदेशमंत्री के साथ एक उच्चस्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आया है जिससे दोनों देशों के गहराते आर्थिक संबंधों का पता चलता है। इस समय भारत यूएई का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार तथा जीसीसी राष्ट्रों के इस महत्वपूर्ण सदस्य से चौथा सबसे बड़ा ऊर्जा आयातक देश है। ध्यान देने वाली बात है कि यूएई में भारतीय समुदाय के लगभग 3.3 मिलियन लोग रहते हैं जिन्होंने यूएई के समग्र विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

देश में अपने तीन दिन के प्रवास के दौरान श्री अब्दुल्ला बिन ज़ायद अल नाह्यान ने अपने भारतीय समकक्ष डॉ जयशंकर, जो राजनयिक से राजनेता बने हैं, के साथ व्यापार एवं निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, आतंकवाद निरोध तथा जनसंपर्क जैसे क्षेत्रों पर द्विपक्षीय वार्ता की। यूएई के विदेशमंत्री ने श्री जयशंकर के साथ सीरिया, लेबनान, यमन के वर्तमान हालात और वर्तमान वैश्विक राजनीति और सामरिक स्थिति पर भी चर्चा की। आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष भारत-यूएई दोनों के लिए ही बड़ी चुनौती रही है। दोनों ने इस बात को दोहराया कि आतंकवाद का हर तरह से खात्मा समय की मांग है।

अपनी यात्रा के अंतिम चरण में यूएई के विदेशमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत की जो दूसरी बार सत्ता में आये हैं। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की बात कही। इस बैठक में दोनों पक्षों ने आपसी संबन्धों के नए आयाम खोजने और अपनी अपनी महत्वाकांक्षाओं को पुर करने की बात भी दोहराई। श्री अब्दुल्ला बिन ज़ायद ने 2018 में भी श्री मोदी से भेंट की थी। उस समय वह नई दिल्ली में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा आयोजित एक संयुक्त कार्यशाला में भाग लेने आए हुए थे। इससे पहले भी वह 2016 तथा 2017 में नई दिल्ली की यात्रा कर चुके हैं। उस समय वह युवराज शेख़ मुहम्मद बिन ज़ायद अल नाह्यान के साथ आये थे। हाल के वर्षों में भारत-यूएई के बीच लगातार बातचीत होती रही है और सबसे महत्वपूर्ण बात है मार्च 2019 में इस्लामी सहयोग संगठन के अध्यक्ष यूएई द्वारा संगठन की 46वीं परिषद में भारत को विशिष्ट अतिथि के रूप में आमन्त्रित करना।

इस यात्रा से यह संकेत मिलता है कि अरबी देशों, विशेष रूप से खाड़ी देशों के साथ प्रधानमंत्री मोदी द्वारा संबंध प्रगाढ़ बनाने के प्रयास फलीभूत हुए हैं और यह क्रम आगे भी जारी रहेगा। अपने विशाल  पड़ोस के साथ भारत की एक सुपरिभाषित नीति है और उनके साथ अपने आर्थिक एवं सामरिक हितों की रक्षा के लिए एक योजना भी तैयार है। साथ ही, यूएई के विदेशमंत्री की यह यात्रा यह संदेश देने के लिए पर्याप्त है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में रखी गई सुदृढ़ द्विपक्षीय संबंधों की आधारशिला पर भविष्य में अनवरत रूप से एक ऊँची इमारत बनती रहेगी।

आलेख – डॉ फ़ज़्ज़ुर रहमान सिद्दीकी
अनुवादक – हर्ष वर्धन